इमरान ख़ान की उपचुनावों में जीत के बाद उठे छह सवाल और उनके जवाब

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- Author, उमर दराज़ नंगियाना
- पदनाम, बीबीसी उर्दू संवाददाता, लाहौर
पाकिस्तान की पूर्व सत्ताधारी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) ने इस साल दो बड़े उप-चुनाव लड़े और दोनों ही बार उसे बड़ी कामयाबी हासिल हुई लेकिन पीटीआई की इन दोनों कामयाबियों और उनके नतीजों के बीच एक स्पष्ट अंतर है.
इस वर्ष पंजाब प्रांत के उपचुनावों में मिली सफलता से पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ सूबे में अपनी खोई हुई सरकार को वापस पाने में सफल रही थी.
हालांकि नेशनल असेंबली की आठ सीटों पर होने वाले उपचुनावों में छह सीटें जीतने के बाद भी ज़ाहिरा तौर पर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ का संसद में जाने का कोई इरादा नहीं है.
इसकी एक वजह यह भी है कि इन सभी सीटों पर पीटीआई के चेयरमैन इमरान ख़ान ने जीत हासिल की है.
इमरान ख़ान की इस जीत ने पाकिस्तान में चुनावी प्रक्रिया पर भी कुछ सवाल खड़े कर दिए हैं. पाकिस्तान के सोशल मीडिया पर होने वाली चर्चाओं में यूज़र्स इससे जुड़े कई सवाल पूछते नज़र आ रहे हैं.
इनमें से ज़्यादातर सवाल पाकिस्तान के राजनीतिक परिदृश्य से जुड़े हैं जो इमरान ख़ान की जीत के बाद सामने आए हैं.
बीबीसी ने ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब तलाश करने की कोशिश की है.
इमरान ख़ान जिन सीटों को छोड़ देंगे उनका क्या होगा?

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अगर पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान संसद जाने का फ़ैसला करते हैं तो वह छह में से सिर्फ़ एक सीट ही रख पाएंगे.
याद रहे कि क़ानूनी रूप से इमरान अभी भी पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य हैं क्योंकि नेशनल असेंबली के अध्यक्ष ने अभी तक उनका इस्तीफ़ा स्वीकार नहीं किया है.
पाकिस्तान इंस्टिट्यूट ऑफ़ लेजिस्लेटिव डेवलपमेंट एंड ट्रांसपेरेंसी के अध्यक्ष और विश्लेषक अहमद बिलाल महबूब ने बीबीसी को बताया कि संवैधानिक रूप से इमरान ख़ान अपनी पसंद की कोई भी एक सीट रखने का फ़ैसला कर सकते हैं.
"जब वह इस सीट से नेशनल असेंबली की शपथ ले लेंगे, तो बाकी सभी सीटें जिनसे उन्होंने जीत हासिल की और उनकी पुरानी सीट एक बार फिर उपचुनाव के लिए खाली हो जाएगी."
हालांकि, अगर वह किसी भी सीट से नेशनल असेंबली के सदस्य के रूप में शपथ नहीं लेते हैं, तो इन सभी सीटों पर फिर से चुनाव कराना ज़रूरी होगा. जब तक इमरान ख़ान शपथ लेने या न लेने पर अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं करते, तब तक यह मामला टल जाएगा.
इमरान ख़ान को अगर शपथ नहीं लेनी है तो चुनाव में क्यों आए?
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ के नेतृत्व की तरफ़ से ऐसे बयान सामने आए हैं जिनसे यह स्पष्ट होता है कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान हाल के उपचुनावों के बाद संसद सदस्य बनने का इरादा नहीं रखते हैं.
वे अपनी बात पर अड़े हुए हैं कि मौजूदा सरकार जल्द से जल्द आम चुनाव कराने का फ़ैसला करे और वे सरकार से केवल इस विषय पर ही चर्चा करने के लिए तैयार हैं.
ऐसे में एक सवाल यह भी उठता है कि अगर इमरान ख़ान का संसद जाने का इरादा नहीं है या नहीं था, तो उन्होंने चुनाव में हिस्सा ही क्यों लिया.
पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक सलमान ग़नी का मानना है कि 'इमरान ख़ान इतनी सीटों पर एक साथ चुनाव में भाग लेकर और जीतकर किसी को ये दिखाना चाहते थे कि वह कितने लोकप्रिय नेता हैं.'
सलमान ग़नी के मुताबिक़ इमरान ख़ान इसमें काफ़ी हद तक सफल भी हुए हैं.
इन चुनावों के नतीजों के बाद इसमें कोई शक नहीं कि इमरान ख़ान एक राजनीतिक हक़ीक़त हैं.
उन्होंने कहा कि यह न केवल इमरान ख़ान का चुनाव था बल्कि पाकिस्तान के स्टेबलिशमेंट का भी चुनाव था.
क्या जानबूझकर ऐसा करना धांधली की कैटेगरी में आ सकता है?

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यह जानते हुए कि उनका इरादा संसद सदस्य बनने का नहीं है, एक से अधिक सीटों से चुनाव लड़ना क्या तकनीकी रूप से धांधली की कैटेगरी में आ सकता है.
अहमद बिलाल महबूब का मानना है कि इस तरह का सवाल अदालतें उठा ज़रूर सकती हैं, लेकिन पाकिस्तान में प्रस्तावित क़ानून किसी को भी एक से ज़्यादा सीटों से चुनाव लड़ने से नहीं रोकता है.
"निश्चित रूप से हमारे सिस्टम में ये एक ख़ामी ज़रूर है, लेकिन समस्या यह है कि इरादे को साबित करना मुश्किल होता है. आप यह कैसे साबित कर सकते हैं कि कोई व्यक्ति संसद जाने का इरादा नहीं रखता था, लेकिन उसने चुनाव में हिस्सा लिया.'
हालांकि, अहमद बिलाल महबूब के अनुसार, कई अन्य बड़े लोकतांत्रिक देशों में, किसी व्यक्ति को एक या ज़्यादा से ज़्यादा दो सीटों से चुनाव लड़ने की इजाज़त होती है.
"मुझे लगता है कि पाकिस्तान जैसे देश में केवल एक सीट की ही इजाज़त होनी चाहिए."
एक से अधिक सीटों पर चुनाव में हिस्सा लेने की सूरत में, एक को छोड़कर बाक़ी सीटों पर होने वाले चुनाव का ख़र्च ख़ुद उम्मीदवार को ही अदा करना चाहिए.
आम लोगों के पैसे की बर्बादी?
क्या सभी सीटों से चुनाव लड़ना इमरान ख़ान की राजनीतिक चाल थी?
विश्लेषक और पत्रकार सलमान ग़नी का मानना है कि पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) में शामिल पार्टियों द्वारा पीटीआई के सभी सदस्यों के बजाय कुछ सदस्यों के इस्तीफ़े मंज़ूर करना इस बात को ज़ाहिर करता है कि वे इससे राजनीतिक फ़ायदा उठाना चाहते थे.
सलमान ग़नी ने कहा कि "पीडीएम सरकार ने यह समझा कि जिन ग्यारह सीटों पर उन्होंने इस्तीफ़े मंज़ूर किये हैं वहां उपचुनाव में उनके द्वारा समर्थित उम्मीदवारों के जीतने की अधिक संभावना होगी."
उनका मानना है कि शायद यही वजह रही होगी कि इमरान ख़ान ने पीडीएम पार्टियों की इस चाल को नाकाम करने के लिए सभी सीटों से ख़ुद चुनाव में हिस्सा लेने का फ़ैसला किया. इमरान ख़ान और उनकी पार्टी का शुरू से यही पक्ष रहा है कि वे उपचुनाव नहीं बल्कि आम चुनाव चाहते हैं.
सलमान ग़नी ने कहा कि पीडीएम अपने उद्देश्यों को हासिल करने में विफल रहा और दूसरी ओर इमरान ख़ान और उनकी पार्टी अपने राजनीतिक परिणामों को हासिल करने में ज़्यादातर सफल रहे.
क्या पीटीआई की जीत इमरान ख़ान की वजह से हुई?

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हाल ही में हुए उपचुनाव में नेशनल असेंबली की सात सीटों पर पीटीआई की तरफ़ से इमरान ख़ान ख़ुद ही उम्मीदवार थे. केवल एक सीट ऐसी थी जहां वह उम्मीदवार नहीं थे और पीटीआई उस सीट से हार गई है.
इमरान ख़ान सात में से केवल एक सीट हारे. कुछ यूज़र्स ने यह सवाल भी किया कि पीटीआई में इमरान ख़ान के अलावा कोई ऐसा नेता मौजूद नहीं है जिस पर इमरान ख़ान भरोसा कर सकते कि वह चुनाव जीत सकते हैं?
पीआईएलडीएटी के अध्यक्ष अहमद बिलाल महबूब का मानना है कि ऐसा नहीं है कि पीटीआई की हालिया जीत केवल इमरान ख़ान के सभी सीटों से उम्मीदवार के रूप में सामने आने के कारण हुई है.
"इस समय इमरान ख़ान की जिस तरह की लोकप्रियता है, अगर उनकी पार्टी के किसी अन्य उम्मीदवार ने भी चुनाव में भाग लिया होता, तो भी पीटीआई ज़्यादातर सीटों पर जीत जाती."
अहमद बिलाल महबूब के मुताबिक़ इमरान ख़ान समर्थित उम्मीदवार के लिए मौजूदा हालात में जीत हासिल करना मुश्किल नहीं है.
जिन सीटों पर पीटीआई ने इस्तीफ़ा दिया है, उन पर उपचुनाव कब होगा?

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पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ का कहना है कि उन्होंने नेशनल असेंबली से इस्तीफ़ा दे दिया है और उनके 131 सदस्यों ने नेशनल असेंबली के स्पीकर को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है, लेकिन नेशनल असेंबली के स्पीकर ने इन सभी सदस्यों के इस्तीफ़े स्वीकार नहीं किए हैं.
नेशनल असेंबली के स्पीकर का कहना है कि ये सभी इस्तीफ़े हाथ से नहीं लिखे गए हैं, जो कि नियमों के ख़िलाफ़ है और वह प्रत्येक सदस्य से मिलकर यह पता करेंगे कि उन्होंने अपनी मर्ज़ी से इस्तीफ़ा दिया है.
नेशनल असेंबली के स्पीकर ने अब तक केवल ग्यारह पीटीआई सदस्यों के इस्तीफ़े स्वीकार किए हैं. इसकी वजह से ही ख़ाली होने वाली सात सीटों पर उपचुनाव हुए हैं.
पीआईएलडीएटी के अध्यक्ष अहमद बिलाल महबूब के मुताबिक़, इस्तीफ़े के संबंध में पीटीआई नेतृत्व द्वारा दिए गए किसी भी बयान का कोई क़ानूनी महत्त्व नहीं है.
"जब नेशनल असेंबली के स्पीकर पीटीआई के सदस्यों के इस्तीफ़े मंज़ूर करने के बाद पाकिस्तान के चुनाव आयोग को सूचित करेंगे, उसके बाद ही इन सीटों को ख़ाली माना जाएगा."
अहमद बिलाल महबूब ने कहा कि उसके बाद चुनाव आयोग इन सीटों पर उपचुनाव कराने के लिए बाध्य होगा.
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