पाकिस्तान के इस ज़िले में ऑनर किलिंग के नाम पर ले ली जाती है लड़के-लड़की की जान

सांकेतिक तस्वीर

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    • Author, मोहम्मद ज़ुबैर ख़ान
    • पदनाम, पत्रकार, पाकिस्तान

"मैं कोहिस्तान के रीति-रिवाजों और क़ानूनों को अच्छी तरह जानता हूं. मैं यह भी जानता हूं कि अगर यहां किसी लड़की का नाम किसी लड़के के साथ जुड़ जाता है तो दोनों की हत्या अनिवार्य हो जाती है. लड़की को इसलिए पहले मारा जाता है क्योंकि उसे मारना आसान होता है, लेकिन लड़की की हत्या के तुरंत बाद लड़के की हत्या भी ज़रूर कर दी जाती है."

यह कहना है पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत के कोहिस्तान ज़िले में स्थित पालस गाँव के रहने वाले मोहम्मद ताहिर का, जो एक स्थानीय सरकारी स्कूल में शिक्षक है.

मोहम्मद ताहिर ने स्थानीय पुलिस को शिकायत दी है जिसमें दावा किया गया है कि हाल ही में उनके क्षेत्र में एक महिला की कथित तौर पर ऑनर किलिंग की गई है. और क्योंकि उनके बेटे का नाम ग़लत तरीक़े से उस लड़की के साथ जोड़ा जा रहा इसलिए, उन्हें डर है कि जल्द ही उनके बेटे की भी हत्या कर दी जाएगी.

उन्होंने पुलिस से उनके बेटे को सुरक्षा दिए जाने की गुहार लगाई है.

संपर्क करने पर, ज़िला पुलिस अधिकारी सलमान ख़ान ने बताया कि उन्हें मोहम्मद ताहिर की तरफ से उनके बेटे को सुरक्षा देने के लिए अर्जी मिली है, जिस पर क़ानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है.

मोहम्मद ताहिर का कहना है कि कोहिस्तान के रूढ़िवादी रीति-रिवाजों के अनुसार, "अगर वह अपने बेटे को मरने के लिए पेश नहीं करते हैं, तो उन्हें और उनके परिवार को निशाना बनाया जा सकता है. जैसा कि अफ़ज़ल कोहिस्तानी मामले में हुआ था."

मोहम्मद ताहिर के मुताबिक़ उनका बेटा जान बचाने के लिए घर से भाग गया है. डीपीओ सलमान ख़ान का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद परिवार को सुरक्षा मुहैया कराई गई है.

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इमेज कैप्शन, साल 2012 में कोहिस्तान जिले के पालस इलाक़े में एक शादी समारोह का वीडियो सामने आया था जिसमें दो लड़के चार लड़कियों की ताली की थाप पर पारंपरिक डांस कर रहे थे

लड़की की हत्या कब हुई?

इस घटना को लेकर दर्ज की गई प्राथमिकी के अनुसार युवती की हत्या 24 सितंबर को हुई थी. यह प्राथमिकी लड़की के पिता की शिकायत पर दर्ज की गयी थी.

लड़की के पिता ने पुलिस को बताया कि वो मवेशियों को चराने के लिए घर से जानवरों का रेवड़ ले कर जा रहे थे. रास्ते में उन्होंने अपने बेटे और बेटी को किसी बात पर बहस करते देखा और विवाद इस हद तक बढ़ गया, कि भाई ने गोली मारकर अपनी बहन की हत्या कर दी.

प्राथमिकी में लड़की के पिता ने कहा कि गोली लगने के बाद उनकी बेटी की मौके पर ही मौत हो गई और वह इस घटना के एकमात्र चश्मदीद गवाह है.

हालांकि, अब मोहम्मद ताहिर की तरफ से पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि लड़की की कथित तौर पर ऑनर किलिंग की गई और इस मामले में कई लोग शामिल थे.

मोहम्मद ताहिर ने यह भी कहा कि कथित ऑनर किलिंग को छुपाने और इसमें शामिल लोगों को बचाने के लिए लड़की के परिवार ने इस मामले में लड़की के भाई को नामजद किया.

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ऑनर किलिंग का सबूत?

जबकि लड़की के पिता इस मामले में इकलौते चश्मदीद गवाह बने और ऐसा केवल इसलिए किया गया, ताकि जब मामला अदालत में जाए तो पिता, जो इस मामले में वादी भी है, बेटे को माफ कर दें और यह मामला भी ऑनर किलिंग के अन्य अपराधों की तरह ख़त्म हो जाए.

संपर्क करने पर, डीएसपी पालस मसूद ख़ान ने बताया कि पुलिस को कुछ हफ्ते पहले सूचना मिली थी कि इलाक़े में एक लड़की की हत्या कर दी गई है. जिस पर क़ानून के अनुसार कार्रवाई की गई और मामले में नामजद लड़की के भाई को गिरफ्तार कर लिया गया.

डीएसपी मसूद ख़ान ने कहा कि अब इस संबंध में शिकायत करने वाले मोहम्मद ताहिर के पास ऑनर किलिंग के सबूत मौजूद हैं, इसलिए उन्हें भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि क़ानूनी कार्रवाई की जा सके.

मसूद ख़ान ने कहा कि आरोपी के पास से आला क़त्ल भी बरामद कर लिया गया है और जल्द ही इस मामले को सुनवाई के लिए अदालत में पेश किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि जब ये सारी कार्यवाही हो रही थी तब याचिका दायर करने वाले मोहम्मद ताहिर समेत कोई भी पेश नहीं हुआ और किसी ने भी ऑनर किलिंग का कोई सबूत पेश नहीं किया.

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इमेज कैप्शन, अफ़ज़ल कोहिस्तानी की साल 2019 में ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत के एबटाबाद में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी

क़ानून का सहारा

मसूद ख़ान का कहना है कि अब मोहम्मद ताहिर की तहरीर मिलने के बाद पुलिस पूरे घटनाक्रम की दोबारा जांच करेगी.

मोहम्मद ताहिर का कहना है कि लड़की की हत्या की घटना कुछ हफ्ते पहले हुई थी, लेकिन उस वक्त उन्हें यह नहीं पता था कि लड़की के साथ उनके बेटे का नाम जोड़ा जा रहा है.

मुझे इस बात का बाद में पता चला कि मेरे बेटे की हत्या करने के लिए, उसे तलाश किया जा रहा है. जैसे ही मुझे सच्चाई का पता चला, मैंने क़ानून का सहारा लिया और सारे तथ्य पुलिस के सामने रख दिए.

मोहम्मद ताहिर का दावा है कि अगर पुलिस ने उन्हें गवाही देने के लिए बुलाया तो वो ख़ुद और इलाक़े के कुछ अन्य गवाह भी पेश होंगे कि यह कोई साधारण हत्या नहीं बल्कि ऑनर किलिंग है.

पेशावर हाई कोर्ट एबटाबाद बेंच बार के अध्यक्ष मेहदी ज़मान एडवोकेट का कहना है कि पहले भी कई बार यह देखा गया है, कि तथाकथित सम्मान के नाम पर हत्या करने के बाद आपसी सुलह के आधार पर अभियुक्तों को रिहाई मिल जाती है.

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उन्होंने कहा कि पुलिस को जांच करनी चाहिए और अगर ऐसे सबूत मिलते है तो ऑनर किलिंग की धाराओं को एफआईआर में शामिल किया जाना चाहिए ताकि रजामंदी के बाद भी अभियुक्त को रिहाई न मिल सके.

उन्होंने कहा कि वैसे भी कोहिस्तान जैसे इलाक़े में किसी भी लड़की की हत्या को लेकर पुलिस को बेहद सावधानी बरतने की ज़रूरत है.

'क़त्ल की गई लड़की और मेरा बेटा निर्दोष हैं'

मोहम्मद ताहिर ने डीपीओ पालस को दी गई शिकायत में कहा है कि लड़की वालों की तरफ़ से आयोजित किये गए जिरगे में मेरे बेटे के बारे में कहा गया है कि उसकी हत्या अनिवार्य है.

शिकायत में यह भी कहा गया है कि "मैं स्कूल में एक शिक्षक हूं और मेरे लिए भी इन परिस्थितियों में अपना कर्तव्य निभाना मुश्किल हो गया है. लड़की की हत्या का मामला भी ग़लत सूचना देकर दर्ज कराया गया है. ताकि उन लोगों को बचाया जा सके जिन लोगों ने कथित तौर पर लड़की को मारने का फैसला सुनाया था."

उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोग इस बात की गवाही देने को तैयार है कि उनके बेटे का लड़की से कोई संबंध नहीं था. उन्होंने बताया कि उनका बेटा शादीशुदा और दो बच्चों का पिता है.

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'ऑनर किलिंग का मामला इतना सीधा नहीं होता'

मानवाधिकार कार्यकर्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील ज़फ़र इक़बाल एडवोकेट का कहना है कि कोहिस्तान में ऑनर किलिंग का मामला इतना सीधा और आसान नहीं होता है.

"इससे पहले हमने देखा कि कोहिस्तान वीडियो स्कैंडल में अपने भाइयों की सुरक्षा के लिए लड़ते हुए अफ़ज़ल कोहिस्तानी मारा गया था और अभी भी उसके भाइयों की जान ख़तरे में है."

ज़फ़र इक़बाल एडवोकेट का कहना है कि कोहिस्तान की प्रथा को देखें तो ऐसे मामले में अगर लड़का भाग जाता है तो उसका पीछा किया जाता है और उसकी तलाश की जाती है. लड़के वाले भी इज़्ज़त के नाम पर लड़की की ऑनर किलिंग के बाद लड़के को सुरक्षा देने से बचते हैं.

उन्होंने कहा कि पुलिस, प्रशासन और सरकार को ऐसे उपाय करने की ज़रूरत है, जिससे लड़का और उसका परिवार सुरक्षित रहे और पीड़िता को भी न्याय मिल सके और इलाक़े में दुश्मनी की नई जंग की भी शुरुआत न हो.

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