पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह की लड़कियाँ क्या सोचती हैं #BBCShe

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    • Author, शुमाइला जाफ़री
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, ऐबटाबाद (पाकिस्तान) से

दुनिया में बहुत से लोगों के लिए ऐबटाबाद की पहचान उस जगह के तौर पर है जहाँ से अमरीकी सैनिकों ने साल 2011 में चरमपंथी ओसामा बिन लादेन को पकड़ा था.

लेकिन पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह में हरी पहाड़ियों के बीच स्थित ऐबटाबाद पाकिस्तान के लोगों के लिए सबसे लोकप्रिय पर्यटक स्थल है.

पाकिस्तान की राष्ट्रीय सैन्य अकादमी भी ऐबटाबाद में ही स्थित है. इसके साथ ही यहाँ के कई उच्च शिक्षा संस्थान भी काफ़ी मशहूर हैं.

पाकिस्तान की #BBCShe टीम के लिए ऐबटाबाद की 'यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी' उनके सफ़र का तीसरा पड़ाव रही.

बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा और सिंध प्रांत के लरकाना शहर में सफल 'ओपन डिबेट' आयोजित करवाने के बाद हमारा मक़सद था कि हम पश्तून बहुल ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत की महिलाओं की आवाज़ सुनें.

वीडियो कैप्शन, BBC She : क्या सोचती हैं पाकिस्तान के लरकाना की लड़कियां

ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत को सबसे ज़्यादा रूढ़िवादी इलाक़ा माना जाता है. यहाँ एक बड़ी आबादी उन कबायली लोगों की है जो आज भी अपने रीति-रिवाज़ों और परंपराओं से जुड़े हुए हैं.

लेकिन यहाँ की लड़कियों के विचारों ने हमें ज़रा भी निराश नहीं किया. कई लड़कियों ने महिलाओं को लेकर होने वाली 'स्टीरियोटाइपिंग' पर और महिलाओं से जुड़े अन्य मुद्दों पर बहुत खुलकर बात की.

महिलाओं पर लेबल

ये मेरा व्यक्तिगत अनुमान था कि ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह की लड़कियाँ कुछ स्थानीय मुद्दों पर बात करेंगी. वो हमसे सम्मान और प्रतिष्ठा के नाम पर की जाने वाली ऑनर किलिंग की शिकायत करेंगी.

या वो सिर्फ़ ये कहेंगी कि कुछ रूढ़ियाँ हैं जिन्होंने उनके लिए बंदिशें खड़ी की हैं, लेकिन उन्होंने कुछ 'शहरी' समस्याओं के बारे में अपनी राय से हमें हैरान कर दिया.

एक लड़की ने कहा कि समाज पहले तो महिलाओं पर लेबल लगाता है और फिर उन्हीं के अनुसार महिलाओं को परखता है.

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उस लड़की ने कहा, "अगर कोई महिला तलाक़ लेती है तो लोग सिर्फ़ उसे ही शादी टूटने के लिए ज़िम्मेदार मानते हैं. लोग उसे एक ख़राब महिला के तौर पर देखते हैं."

एक अन्य छात्रा ने कहा कि मीडिया भी ख़ास तरह की ही सफल और योग्य महिलाओं को स्पेस दे रहा है. वो महिलाएं जो गोरी हैं, पतली हैं, लंबी हैं और देखने में आकर्षक हैं. बाकी महिलाओं के लिए मीडिया के पास स्पेस नहीं है. वो न तो अच्छी नौकरी पा रही हैं और न ही शौहर.

उस छात्रा की राय थी कि इस स्थिति ने युवतियों पर एक अलग किस्म का दबाव बनाया है. ये स्थिति लड़कियों में हीन भावना पैदा कर रही है और बहुत सी लड़कियों के जीवन को इसने घृणास्पद बनाया है.

उसने कहा, "शरीर और रंग रूप से आगे भी महिलाओं का अस्तित्व होता है."

बहुत सी लड़कियों की राय थी कि मीडिया को सभी महिलाओं की उपलब्धियों और क्षमताओं पर रोशनी डालनी चाहिए.

एक और छात्रा ने कहा कि जब उनका परिवार मीडिया में दिख रही लड़कियों को देखता है तो उनपर भी वैसे ही व्यवहार करने और दिखने का दबाव बनाया जाता है.

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जीवन की निराशा

ऐबटाबाद की ओपन डिबेट में एक अन्य छात्रा ने कहा कि उनके प्रांत में बहुत सारी महिलाएं अपने शादीशुदा जीवन से निराश हैं क्योंकि उन्हें शौहर चुनने का अधिकार नहीं है.

हवालियां ज़िले से आई एक छात्रा ने कहा, "कोई लड़की अगर ख़ुद अपने फ़ैसले लेने की कोशिश करती है तो उसकी तुलना 'कंदील बलोच' से की जाती है."

कंदील बलोच पाकिस्तान की सोशल मीडिया स्टार थीं. साल 2016 में उनके भाई ने 'इज़्ज़त के नाम पर' अपनी बहन कंदील की हत्या कर दी थी.

ओपन डिबेट सेशन में बहुत सारी लड़कियों ने ऑनर किलिंग का मुद्दा भी उठाया. एक लड़की ने बताया कि उनके प्रांत में ऑनर किलिंग के मामलों की संख्या काफ़ी ज़्यादा है.

छात्राओं के अनुसार, ऑनर किलिंग के ज़्यादातर मामलों को समाज के लोग दबाने की कोशिश करते हैं.

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कुछ छात्राओं ने सेक्स एजुकेशन को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की वकालत की और कहा कि सेक्स एजुकेशन से रेप और यौन उत्पीड़न के कई मामले कम किये जा सकते हैं.

ऐबटाबाद की 'यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी' के छात्रों ने ड्रामा, थियेटर और फ़िल्मों में महिलाओं के चित्रण की भी शिक़ायत की.

उन्होंने कहा कि इनमें अक्सर पढ़ी-लिखी महिलाओं को और अच्छे करियर की चाह रखने वाली महिलाओं को एक 'ख़राब माँ' के तौर पर दिखाया जाता है.

इन छात्रों का मानना था कि इससे समाज में जो राय विकसित हो रही है वो हज़ारों महिलाओं के सपनों के आड़े आ रही है. ख़ासकर उन महिलाओँ के जो कुछ करना चाहती हैं और अपना दम पर करियर बनाना चाहती हैं.

'राय रखने का अधिकार मिले'

एक छात्रा ने कहा कि वो ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत के कुछ इलाक़ों में महिलाओं को मतदान का अधिकार नहीं मिलने से निराश हैं. उन्हें लगता है कि इससे महिलाओं को उनकी राय रखने का अधिकार छिना है.

सांकेतिक तस्वीर

कई छात्राओं ने कहा कि संविधान में महिलाओं के अधिकारों और उनकी स्वतंत्रता की जो बात लिखी गई है वो सिर्फ़ कागज़ों तक ही सीमित रह गई है. और देश में मर्दों ने महिलाओं के लिए अपने ही नियम बनाकर समाज पर थोप दिये हैं.

इस ओपन डिबेट सेशन ने मुझे काफ़ी प्रेरित किया. वापस लौटते वक़्त मुझे महसूस हुआ कि बंद दरवाज़ों, रूढिवादी समाज, अवसरों के वियोग में और तमाम तरह की चुनौतियों के बीच पली बढ़ी ये लड़कियाँ कितनी बहादुर और चेतना से भरपूर हैं.

अब मेरा अगला पड़ाव पाकिस्तान का पंजाब होगा. देश का सबसे बड़ा और सबसे अधिक विकसित इलाक़ा. मैं तमाम तरह की आशाओं के साथ पंजाब की ओर बढ़ रही हूँ.

अब देखते हैं कि वहाँ की लड़कियाँ किस तरह की कहानियों को और चुनौतियों को हमारे सामने लाती हैं.

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