पाकिस्तान: बन्नू कैंट में बंधकों को छुड़ाया गया 33 तालिबानी मारे गए

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पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने बताया है कि ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के ज़िले बन्नू में काउंटर टेररिज़्म डिपार्टमेंट के दफ़्तर में कर्मचारियों को बंधक बनाने वाले सभी चरमपंथियों को मार दिया गया है.
इसके साथ ही उन्होंने बताया है कि इस दौरान दो फ़ौजियों की भी मौत हुई है और एक अफ़सर समेत 15 लोग ज़ख़्मी हुए हैं. इस दौरान तमाम बंधकों को रिहा करा लिया गया.
ख़्वाजा आसिफ़ की ओर से इस बारे में पूरी जानकारी संसद में दी गई है.
उन्होंने बताया है कि 'बन्नू में काउंटर टेररिज़्म डिपार्टमेंट के कंपाउंड में 33 चरमपंथी थे, उनमें से एक चरमपंथी ने टॉयलेट जाते वक़्त वहां के एक कर्मचारी के सिर पर ईंट मारकर बाक़ी लोगों को भी बंधक बना लिया.'
ख़्वाजा आसिफ़ ने कहा, "आज साढ़े 12 बजे काउंटर टेररिज़्म डिपार्टमेंट ने ऑपरेशन शुरू किया. तमाम चरमपंथी इस ऑपरेशन में मारे गए हैं और आज ढाई बजे काउंटर टेररिज़्म डिपार्टमेंट का कंपाउंड क्लियर कर दिया गया है."
ख़्वाजा आसिफ़ ने ऑपरेशन के बारे में बताते हुए कहा कि इस दौरान दो फ़ौजी मारे गए हैं जबकि एक अफ़सर समेत 10 से 15 जवान ज़ख़्मी हुए हैं जबकि सारे के सारे लोग जिन्हें बंधक बनाया गया था उन्हें रिहा करवा लिया गया है. हालांकि ख़्वाजा आसिफ़ की ओर से बंधकों की तादाद नहीं बताई गई.

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क्या है मामला
पाकिस्तान के सरहदी प्रांत ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में तालिबान लड़ाकों और सरकार के बीच रविवार को बंधक बनाए गए लोगों को छुड़ाने के लिए हुई बातचीत बेनतीजा ख़त्म हो गई थी.
तालिबान के कुछ लड़ाकों ने बन्नू कैंट में एक काउंटर-टेररिज़्म सेंटर को कब्ज़े में ले लिया था. उन्होंने तक़रीबन दो दर्जन लोगों को वहां बंधक बनाकर रखा था.
दरअसल इस काउंटर-टेररिज़्म डिपार्टमेंट के पुलिस स्टेशन में एक गिरफ़्तार किए गए तालिबान मिलिटेंट को रखा गया था.
रविवार को इस मिलिटेंट ने पुलिस से एके-47 असॉल्ट राइफ़ल छीनी और अंधाधुंध गोलियां चलानी शुरू कर दीं.
उसके बाद मिलिटेंट ने थाने में बंद कुछ अन्य चरमपंथियों को रिहा कर दिया. सब रिहा हुए चरमपंथियों ने मिलकर सारे कंपाउंड को अपने कब्ज़े में ले लिया.
चरमपंथियों ने कई पुलिसकर्मियों को भी बंधक बनाया था.

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तीन दिन तक चला बंधक संकट
बंधक संकट के बाद बन्नू में हालात काफ़ी तनावपूर्ण हो गए थे. पुलिस और सुरक्षाबलों ने सारे कंपाउंड की घेराबंदी कर दी थी. इलाक़े में रह रहे लोगों को घर से बाहर न निकलने की सख़्त हिदायत दी गई थी.
आज इस बंधक संकट का तीसरा दिन था. गतिरोध बरकरार रहने की वजह से बन्नू ज़िले के सारे स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए थे. कैंट जाने और आने वाले रास्ते अभी भी सील हैं. मेडिकल टीचिंग इंस्टीट्यूट बन्नू और इसके संस्थानों में मेडिकल इमर्जेंसी लागू कर दी गई थी.
अधिकारियों का कहना है कि बन्नू कैंट और आस-पास के इलाक़ों में मोबाइल सेवाएं बंद कर दी गईं.
स्थानीय लोगों ने बताया है कि कल रात से अधिकतर इलाक़ों में बिजली नहीं थी और इंटरनेट सर्विस बंद है.
बन्नू कैंट के स्थानीय लोग जो रविवार को घरों से बाहर शहर की ओर गए थे वो अब तक अपने घरों को वापस नहीं जा सके, उन्होंने दूसरी रात भी अपने घरों से बाहर गुज़ारी है.
इससे पहले मंगलवार की सुबह ख़ैबर पख़्तूनख़्वा सरकार के प्रवक्ता बैरिस्टर मोहम्मद अली सैफ़ ने कहा था कि बन्नू कैंट में चरमपंथियों के साथ बातचीत जारी है और सरकार की कोशिश है कि वो हथियार फैंककर अपने आप को सुरक्षाबलों के हवाले कर दें.

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अमेरिका की भी घटना पर नज़र
वहीं इस घटना पर अंतरराष्ट्रीय नज़र भी बनी हुई है. अमेरिका ने कहा है कि वो बन्नू में जारी घटनाक्रम से अवगत हैं और इस पर नज़र रखे हुए हैं.
अपनी प्रेस ब्रीफ़िग में अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा कि वो मांग करते हैं कि प्रशासन बंधक बनाए गए लोगों की तुरंत रिहाई पर ज़ोर दे.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सरकार अफ़ग़ानिस्तान में और पाक-अफ़ग़ान सीमा पर मौजूद चरमपंथियों समेत ऐसी साझा चुनौतियों के लिए अमेरिका के साथ साझेदार है.
नेड प्राइस ने कहा कि अमेरिका ने इस चुनौती से निपटने में पाकिस्तानी सरकार की मदद की है और वो इस मौजूदा हालात से निपटने में मदद देने के लिए भी तैयार है. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि इसके लिए पाकिस्तानी सरकार को निवेदन करना चाहिए.
पाकिस्तान तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) अपनी इस मांग पर अड़ी है कि जितने भी चरमपंथी अंदर हैं उन्हें चुपचाप वहां से जाने दिया जाए.
टीटीपी चाहता है कि उनके लोगों को दक्षिण या उत्तरी वज़ीरिस्तान के कबायली ज़िलों तक बिना किसी रोक-टोक के जाने दिया जाए.
ख़बरों के अनुसार सुरक्षाबल शुरू से ही इस मांग को ख़ारिज करते आए हैं. सुरक्षाबल चाहते हैं कि उन्हें बंधकों को छुड़ाने के लिए ऑपरेशन करने की अनुमति दी जानी चाहिए.

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टीटीपी ने क्या कहा
सोमवार को टीटीपी के प्रवक्ता मोहम्मद ख़ुरासानी ने कहा था कि पुलिस वाले इस थाने में बंद चरमपंथियों के साथ अमानवीय व्यवहार कर रहे थे.
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान का गठन साल 2007 में हुआ था. ये पाकिस्तान के सरहदी प्रांत में एक्टिव कई चरमपंथी संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है. पिछले महीने इस संगठन ने पाकिस्तान के केंद्रीय सरकार के साथ चल रहे युद्धविराम को ख़त्म कर दिया था.
संगठन ने अपने चरमपंथियों से एक बार फिर से सक्रिय होने का आह्वान किया था.
उधर तड़के सुबह भी प्रांत के वाना इलाक़े के एक थाने में 50 चरमपंथी दाख़िल हुए और कुछ पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया. घटना सुबह एक बजे की है.
चरमपंथी थाने के सारे हथियार और गोला-बारूद लेकर चले गए. गोलीबारी में एक मिलिटेंट की भी मौत हुई है. बाक़ी चरमपंथी भागने में कामयाब रहे हैं.
पुलिस ने कहा है कि चरमपंथियों को पकड़ने के लिए इलाके में सघन तलाशी अभियान जारी है.
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