चीन में विरोध प्रदर्शन की ताज़ा लहर शी जिनपिंग सरकार के लिए क्यों है चुनौती?

- Author, स्टीफ़न मैकडोनेल
- पदनाम, बीबीसी चीन संवाददाता, बीजिंग
चीन में विरोध की आवाजें पहले भी उठी हैं.
बीते कई सालों में, अचानक, कई तरह के मुद्दों, जैसे ज़हरीला प्रदूषण या ज़मीनों पर अवैध कब्ज़े या पुलिस के हाथों किसी समुदाय के लोगों के उत्पीड़न को लेकर स्थानीय लोगों विरोध जाहिर करते रहे हैं.
लेकिन इस बार ये विरोध अलग है.
चीन के लोगों के दिमाग़ में इस समय एक ही मुद्दा है और बहुत से लोगों में इसे लेकर बेचैनी बढ़ रही है. सरकार की 'ज़ीरो कोविड नीति' के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर विरोध बढ़ रहा है.
लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग (सामाजिक दूरी) को लागू करने के लिए लगाई गई पाबंदियों को तोड़ दिया है और अब बड़ी तादाद में लोग शहरों और यूनिवर्सिटी कैंपसों में सड़क पर उतर आए हैं.
ये कितना हैरान करने वाला मामला है इसकी व्याख्या करना मुश्किल है.
शंघाई में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की और उनका इस्तीफ़ा तक मांग लिया.
चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव के ख़िलाफ़ खुलकर बोलना बेहद ख़तरनाक माना जाता है. ऐसा करने पर जेल तक में डाला जा सकता है.
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बावजूद इसके लोग शंघाई की सड़क (वूलुमुक़ी लू) पर उतरे. ये सड़क शिनजियांग के उस शहर के नाम पर है जहां एक इमारत में आग लगने से दस लोगों की मौत हो गई.
ये माना जा रहा है कि ज़ीरो कोविड नीति के तहत लगाए गए प्रतिबंधों के कारण बचावकर्मियों के पहुंचने में देरी हुई.
एक प्रदर्शनकारी ने नारा लगाया, "शी जिनपिंग"
और सैकड़ों ने जवाब दिया, "गद्दी छोड़ो"
बार बार "शी जिनपिंग गद्दी छोड़ो, शी जिनपिंग गद्दी छोड़ो" का नारा गूंजता रहा.
ये नारा भी गूंज रहां था, "कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता छोड़ो, कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता छोड़ो"

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कम्युनिस्ट पार्टी एक ऐसा राजनीतिक संगठन है जिसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता सत्ता में बने रहना है.
ऐसे में ये प्रदर्शन कम्युनिस्ट पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं.
ऐसा लगता है कि सरकार ज़ीरो कोविड नीति के प्रति लगातार बढ़ रहे विरोध को समझ नहीं पाई.
इस नीति को राष्ट्रपति शी जिनपिंग से जोड़कर देखा जाता रहा है.
हाल ही में जिनपिंग ने कहा था कि चीन इस नीति से पीछे नहीं हटेगा.
और ऐसा लगता है कि चीन की पार्टी इस समय जिस स्थिति में आ गई है उससे बाहर निकलने का कोई आसान रास्ता नहीं है.
चीन की सरकार के पास देश को खोलने की तैयारी करने के लिए तीन साल थे. लेकिन अधिक अस्पताल और आईसीयू यूनिट बनाने और टीकाकरण की ज़रूरत पर ज़ोर देने के बजाए, चीन की सरकार ने बड़े पैमाने पर टेस्ट करने, लॉकडाउन लगाने, लोगों को अलग-थलग करने में भारी संसाधनों का निवेश किया.
चीन ऐसे वायरस से जंग जीतना चाहता है जो शायद कभी जाए ही नहीं.
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