इस्लाम ज़रा सी बात पर ख़तरे में आ जाता है, मिफ़्ताह इस्माइल ने ऐसा क्यों कहा

मिफ़्ताह इस्माइल

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पाकिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री मिफ़्ताह इस्माइल ने शुक्रवार को बताया कि उनका मुल्क भारत और बांग्लादेश से इतना पीछे क्यों हो गया है.

इस्माइल ने बताया, ''एक बांग्लादेशी की औसत उम्र पाकिस्तानियों से पाँच साल ज़्यादा है. हर बांग्लादेशी पाकिस्तानियों से तीन साल ज़्यादा पढ़ा है. कहीं न कहीं तो पाकिस्तान की सरकार ने लंबी ग़लती की है. हिन्दुस्तान के पास 600 अरब डॉलर से ज़्यादा का विदेशी मुद्रा भंडार है और पाकिस्तान के पास 10 अरब डॉलर भी नहीं है.''

शहबाज़ शरीफ़ इस साल जब इमरान ख़ान के बाद प्रधानमंत्री बने थे तो उन्होंने मिफ़्ताह इस्माइल को वित्त मंत्री बनाया था. मिफ़्ताह इस्माइल कुछ महीने ही वित्त मंत्री रहे लेकिन इसी दौरान उन्होंने कई कड़े फ़ैसले लिए थे. इसके साथ ही इस्माइल ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से बातचीत भी फिर से शुरू की थी.

मिफ़्ताह इस्माइल ने कहा, ''भारत की पूरी दुनिया में इज़्ज़त हो गई है. भारत 150 अरब डॉलर का निर्यात करता है. 150 अरब डॉलर का तो केवल आईटी का निर्यात करता है. हमने शुरुआत तो साथ में की थी. यहाँ तक कि 90 तक हम उनसे आगे होते थे. हमने अपने लोगों को क्या दिया? पाकिस्तान के 50 फ़ीसदी बच्चे जो स्कूल जाने लायक़ हैं, वे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. हमें ख़ुद से सवाल करना चाहिए कि मुल्क के साथ कर क्या रहे हैं?''

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मिफ़्ताह इस्माइल ने कहा, ''जब पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश नहीं बना था तो वहाँ की आबादी पश्चिमी पाकिस्तान से ज़्यादा थी. 361 सीटें पूर्वी पाकिस्तान में थीं और 138 पश्चिमी पाकिस्तान में. मुजीब-उर रहमान साहब पूर्वी पाकिस्तान से जीते और ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो साहब पश्चिमी पाकिस्तान से."

"अवामी लीग 160 सीटें जीती थीं और भुट्टो साहब 138 में से कुल 80 सीटें जीते थे. आज की तारीख़ में बांग्लादेश की आबादी 15 करोड़ है और हम यानी पश्चिमी पाकिस्तान की जनसंख्या 23 करोड़ पर पहुँच गई है. किसी की हिम्मत नहीं है कि पाकिस्तान में जनसंख्या नियंत्रण की बात कर दे. आप ज़रा सी बात करेंगे तो इस्लाम ख़तरे में आ जाता है.''

'हर मौलवी से डरते हैं'

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पाकिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री ने बताया, ''हर मौलवी से आप डरते हैं. वोट लेने के लिए इनका इस्तेमाल भी करते हैं. पाकिस्तान में चाहे सेना की हुकूमत हो या राजनीतिक हुकूमत हो लेकिन किसी ने इसे सुलझाने की कोशिश नहीं की. जनसंख्या विस्फोट को कौन सुलझाएगा? बच्चों को स्कूल में कौन भेजेगा? पाकिस्तान में कोई भी चीज़ ना करना एक संस्कृति बन गई है. हमें पाकिस्तान की राजनीति में फौज की भूमिका कम करनी होगी.''

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मिफ़्ताह इस्माइल ने कहा, ''पाकिस्तान महज़ एक फ़ीसदी रिपब्लिक है. पाकिस्तान में बस ड्राइवर का बेटा बस ड्राइवर ही बनता है. तालीम केवल एक फ़ीसदी लोगों को मिलती है. मैट्रिक पास यहाँ के बच्चों से पूछिए कि 40 का 70 फ़ीसदी कितना होगा तो कोई नहीं बताएगा. माइक्रोसॉफ्ट, ट्विटर और गूगल सब के सीईओ भारत से आए हैं. ये आईआईटी से निकल कर आए हैं. अपने यहाँ सरकारें बदलती रहती थीं और भारत में नेहरू आईआईटी बनवा रहे थे."

"हमारे बच्चों को आईटी के बारे में क्या पता है. मैं बिल्कुल वामपंथी नहीं हूं लेकिन सच कहना लेफ्ट होना होता है तो हूँ. लेकिन मैं मुक्त बाज़ार की वकालत करता हूँ. रियासत कम से कम तालीम और सेहत दे दे. हमारे बच्चे ख़ुद ही सब कुछ कर लेंगे.''

मिफ़्ताह इस्माइल ने कहा, ''इमरान ख़ान की एक उपलब्धि है कि नए लोगों को मौक़ा दिया. लेकिन इनकी पार्टी एक व्यक्ति की पार्टी है. मैं चाहता हूँ कि सरकार सबको शिक्षा और सेहत दे बाक़ी मुक्त बाज़ार पर आगे बढ़ना चाहिए.''

भारत से ट्रेड को लेकर मिफ़्ताह इस्माइल ने कहा, ''मैंने तो कहा था कि भारत से प्याज़ और टमाटर लेना चाहिए. हमारे टमाटर और प्याज़ ना लेने से हिन्दुस्तान हमें कश्मीर नहीं दे देगा. भारत हमसे आठ गुना ज़्यादा सेना पर खर्च करता है. हमारा कोई मैच नहीं है. कराची और लाहौर में जितने विमान जाते हैं, उनसे मुंबई और दिल्ली में उतरने वाले विमान की तुलना कर लें तो हक़ीक़त पता चल जाएगी. हिन्दुस्तान की आज दुनिया में बहुत इज़्ज़त है. क्षेत्रीय व्यापार बहुत ही ज़रूरी है. मोदी साहब की सियासत जैसी है, उसमें भारत से ट्रेड संभव नहीं है. उनकी पूरी राजनीति ही मुस्लिम विरोधी है.''

शहबाज़ शरीफ़

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पाकिस्तान की बदहाली

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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार पिछले तीन सालों में सबसे निचले स्तर पर चला गया है. पाकिस्तान अभी अपनी अर्थव्यवस्था किसी तरह से अलग-अलग क़र्ज़दाताओं की मदद से चला रहा है. पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक के डेटा के मुताबिक़ 30.3 करोड़ डॉलर की गिरावट के साथ विदेशी मुद्रा भंडार 7.59 अरब डॉलर हो गया है.

पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने कहा है कि यह गिरावट विदेशी क़र्ज़ों में भुगतान के कारण हुआ है. इनमें ब्याज और व्यावसायिक क़र्ज़ों के भुगतान भी शामिल हैं.

पाकिस्तान में भयावह बाढ़ आई थी और उसकी तबाही के कारण अर्थव्यवस्था और बुरी तरह से प्रभावित हुई है. दक्षिण एशिया के कई देशों के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट आई है और स्थानीय मुद्राएं भी ऐतिहासिक रूप से कमज़ोर हुई हैं.

पाकिस्तान अगस्त के आख़िर में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 1.1 अरब डॉलर का क़र्ज़ लिया था. इसके अलावा वर्ल्ड बैंक और एशियन डिवेलपमेंट बैंक से क़र्ज़ आना बाक़ी है. पाकिस्तान की सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए आयात पर भी कई तरह की पाबंदी लगाई है.

मिफ़्ताह इस्माइल ने कहा है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख क़मर जावेद बाजवा की कोशिश के कारण आईएमएफ़ से डील पटरी पर आई थी. उन्होंने यह भी कहा कि सऊदी अरब, यूएई और क़तर से क़र्ज़ की व्यवस्था करने में भी सेना की अहम भूमिका थी.

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