पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल से कैसे चौपट हो रही है उसकी अर्थव्यवस्था?

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    • Author, तनवीर मलिक
    • पदनाम, पत्रकार, कराची

पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लाने के विपक्ष के एलान के बाद से देश का राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है.

सरकार और विपक्ष के बीच इस सियासी मुक़ाबले को कौन जीतेगा, इसे बता पाना अभी तो काफ़ी मुश्किल है, लेकिन जानकारों का मानना है कि देश की अर्थव्यवस्था पर इस तनाव का काफ़ी नकारात्मक असर हो रहा है.

जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ हफ़्तों की राजनीतिक अस्थिरता ने एक तरफ़ शेयर बाज़ार को बुरी तरह प्रभावित किया है, वहीं दूसरी तरफ़ पाकिस्तानी रुपये की क़ीमत भी इससे प्रभावित हुई है. लेकिन इस पूरी स्थिति का सबसे ज़्यादा नकारात्मक असर देश के लिए आर्थिक फ़ैसला लेने वाले विभाग पर पड़ रहा है, जो अभी उलझन में है.

इस्लामाबाद स्थित आर्थिक मामलों के एक वरिष्ठ पत्रकार ख़लीक़ कयानी का कहना है कि सरकार का ध्यान आर्थिक फ़ैसलों से हट गया है. यदि निचले स्तर पर कोई फ़ैसले हो भी रहे हैं, तो उन्हें मंज़ूरी देने वाली सबसे बड़ी संस्था संघीय कैबिनेट की बैठक पिछले कई हफ़्तों से नहीं हो रही है, जिसके चलते इन फ़ैसलों पर अमल होने में देरी हो रही है.

दूसरी तरफ़, सातवीं समीक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) के साथ भी उसकी बातचीत चल रही है.

वीडियो कैप्शन, पाकिस्तान की सरकार इतने ज़्यादा नोट छाप क्यों रही है?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की तरफ़ से पेट्रोल, डीज़ल और बिजली के क्षेत्रों में दी जाने वाली राहत पर भी आईएमएफ़ को आपत्ति है.

पाकिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री और अर्थशास्त्री डॉक्टर हफ़ीज़ पाशा का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक संकट के कारण आईएमएफ़ के साथ होने वाली बातचीत में मुश्किल हो रही है. उनका कहना है कि यदि आईएमएफ़ का कार्यक्रम ख़तरे में पड़ गया, तो पाकिस्तान के लिए आर्थिक मुश्किलें बढ़ जाएंगी.

पाकिस्तान का कारोबारी हलका भी इस स्थिति को लेकर चिंतित नज़र आ रहा है. पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज के प्रबंध निदेशक ने हाल में कहा कि एक बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनी ने राजनीतिक संकट के चलते शेयर बाज़ार में दाख़िल होने की अपनी योजना टाल दी है.

दूसरी ओर, संघीय वित्त मंत्रालय इस धारणा को ख़ारिज करता है कि देश की आर्थिक नीति के फ़ैसलों में देरी हो रही है या आईएमएफ़ के साथ बातचीत में मुश्किलें आ रही हैं. वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक़, देश के आर्थिक फ़ैसले हमेशा की तरह अभी भी लिए जा रहे हैं.

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इमेज कैप्शन, देश में जारी राजनीतिक अस्थिरता ने एक तरफ़ शेयर बाज़ार को बुरी तरह प्रभावित किया है, वहीं दूसरी तरफ़ पाकिस्तानी रुपये की क़ीमत भी इससे प्रभावित हुई है.

राजनीतिक संकट कैसे आर्थिक मामले प्रभावित कर रहा?

पाकिस्तान के संघीय मंत्रिमंडल की बैठक पिछले तीन सप्ताह में तीन बार स्थगित की जा चुकी है.

योजना आयोग में काम करने वाले एक सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कैबिनेट की बैठक बार-बार स्थगित होने से चीन-पाकिस्तान कॉरिडोर परियोजनाओं ग्वादर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और ग्वादर फ्रेंडशिप अस्पताल के लिए कच्चे माल को एंटी डंपिंग क़ानून से छूट देने के अहम फ़ैसले रुके हुए हैं.

उन्होंने कहा कि इस फ़ैसले का सारांश कई हफ़्ते पहले मंज़ूरी के लिए भेजा जा चुका है.

संघीय कैबिनेट की स्थगित होने वाली पिछली बैठक के एजेंडे में 29 बिंदु थे, जिनमें से कुछ बहुत ज़रूरी और तुरंत अमल में लाने वाले थे, लेकिन उनकी मंज़ूरी फ़िलहाल रुकी हुई है. इनमें आर्म्स लाइसेंस की एक अहम पॉलिसी भी शामिल है.

इसी तरह सरकार की तरफ़ से मध्यकालिक बजट समीक्षा का काम भी रुका हुआ है, जो आमतौर पर मार्च के शुरू में हो जाता है.

इसके अलावा, सरकार के एहसास कार्यक्रम के कुछ बिंदुओं को भी संघीय कैबिनेट की बैठक से मंज़ूरी मिलने का इंतज़ार है. पब्लिक सेक्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए संबंधित मंत्रालयों के साथ होने वाली समीक्षा बैठक भी पिछले कुछ हफ़्तों से नहीं हुई है.

वीडियो कैप्शन, भारत, पाकिस्तान और चीन की अर्थव्यवस्था के बारे में आईएमएफ़ ने क्या कहा?

पाकिस्तान के तेल के क्षेत्र में रिफ़ाइनरी नीति भी ज़ाहिर तौर पर पीछे चली गई है. एक तेल कंपनी के प्रमुख ने बीबीसी को बताया कि इस समय वैश्विक स्तर पर तेल की क़ीमतों के कारण पाकिस्तान के सामने जो मुश्किलें हैं, उसके लिए ज़रूरी था कि पाकिस्तान की रिफ़ाइनरी पॉलिसी को जल्दी मंज़ूरी दे दी जाती. लेकिन राजनीतिक संकट के चलते सरकार का ध्यान अब इसकी बजाय राजनीतिक मामलों पर केंद्रित हो गया है.

पत्रकार ख़लीक़ कयानी के मुताबिक़ इस समय मंत्रालयों में बहुत कम मंत्री नज़र आ रहे हैं, क्योंकि वे सभी इस समय राजनीतिक समस्याओं को सुलझाने में लगे हुए हैं और इस चलते इन मंत्रालयों की निर्णय लेने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है.

ख़लीक़ कयानी का दावा है कि नौकरशाही ने भी 'वेट एंड सी' (देखो और इंतज़ार करो) की नीति अपनाई हुई है. उन्होंने कहा कि इस समय मंत्रियों का अपने मंत्रालयों में प्रभाव नहीं है.

उन्होंने कहा, 'नौकरशाह किसी मंत्री की तरफ़ से किये गए फ़ैसले को लागू करने में भी देरी कर रहे हैं और इस बात का इंतज़ार कर रहे हैं कि अविश्वास प्रस्ताव के बाद यही मंत्री रहेंगे या नए आएंगे.'

पाकिस्तान सतत विकास से संबंधित काम करने वाली संस्था (एसडीपीआई) के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर आबिद क़य्यूम सिलहरी ने कहा कि राजनीतिक संकट निश्चित रूप से देश के आर्थिक निर्णयों और शासन को प्रभावित कर रहा है.

उन्होंने कहा कि इसका एक स्पष्ट उदाहरण यह है कि देश में पब्लिक सेक्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही के शुरू यानी मार्च के महीने में ज़्यादा धन जारी किये जाते हैं, लेकिन इस समय ऐसी स्थिति नज़र नहीं आ रही है. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि राजनीतिक संकट ने सरकार को इस तरह फंसाया हुआ है कि वह इस पर ध्यान नहीं दे पा रही है और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के काम की रफ़्तार भी पहले की तरह नहीं है.

उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में नौकरशाही भी इंतज़ार की नीति अपना लेती है और फ़ैसलों को तुरंत लागू करने से बचती है.

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इमेज कैप्शन, देश में बढ़ी हुई महंगाई ने आम पाकिस्तानियों की ज़िंदगी मुश्किल बना दी है.

राजनीतिक संकट और आईएमएफ़ से वार्ता

पाकिस्तान आईएमएफ़ के साथ 6 अरब डॉलर के कार्यक्रम की सातवीं समीक्षा के लिए बातचीत कर रहा है.

पाकिस्तान के पूर्व संघीय वित्त मंत्री और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ डॉक्टर हफ़ीज़ पाशा ने कहा कि आईएमएफ़ भी इस समय देश में मौजूदा राजनीतिक संकट पर नज़दीकी नज़र बनाए हुए है और कोई भी फ़ैसला लेने से पहले अविश्वास प्रस्ताव के नतीज़े का इंतज़ार करेगा.

उनके मुताबिक़, बातचीत तो जारी रहेगी लेकिन पाकिस्तान के लिए अगली क़िस्त जारी करने या कार्यक्रम को ख़त्म करने या बरक़रार रखने का फ़ैसला इस संकट के बाद ही लिया जाएगा.

डॉ. हफ़ीज़ पाशा ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक संकट के कारण सबसे बड़ी समस्या यह है कि सरकार की पूरी प्राथमिकता राजनीतिक मामलों पर केंद्रित है और आईएमएफ़ सरकार की तरफ़ से दिए जाने वाले राहत पैकेज के बारे में बात करना चाहता है.

डॉ. पाशा ने कहा कि अगर आईएमएफ़ के साथ बातचीत सफल नहीं हुई तो पाकिस्तान को भारी आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को आयात को नियंत्रित करने के लिए एक योजना बनानी होगी, जिस पर वर्तमान सरकार राजनीतिक मामलों के कारण ध्यान नहीं दे पा रही है.

डॉक्टर आबिद सिलहरी ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक संकट के चलते आईएमएफ़ भी इंतज़ार करने की नीति अपनाए हुए है कि इस सरकार के साथ बातचीत को किसी अंतिम नतीज़े तक पहुंचाए या किसी नए ढांचे के साथ मामले सुलझाए जाएं.

ख़लीक़ कयानी ने कहा कि आईएमएफ़ के साथ कार्यक्रम जारी रखने की एक वित्तीय क़ीमत है, जो पाकिस्तान को अदा करनी पड़ेगी, क्योंकि पिछली समीक्षा में जो तय हुआ था, उस पर पाकिस्तान ने अमल नहीं किया.

उन्होंने कहा, "इस क़ीमत को पूरा करने के लिए सरकार का स्थिर होना ज़रूरी है, लेकिन सरकार इस समय बैठकों में व्यस्त है और इस पर पूरा ध्यान नहीं दे पा रही है."

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सरकार ने ख़ारिज किए रूकावट के दावे

इस बीच, वित्त मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने इस धारणा को ख़ारिज कर दिया है कि राजनीतिक संकट के चलते आर्थिक और शासकीय फ़ैसले प्रभावित हो रहे हैं.

देश के आर्थिक निर्णयों और आईएमएफ़ के साथ बातचीत करने का ज़िम्मेदारी वित्त मंत्रालय पर होती है. मंत्रालय के प्रवक्ता मुज़म्मिल असलम ने कहा कि इस समय आर्थिक समन्वय समिति की बैठकें चल रही हैं और अन्य सरकारी संस्थाएं भी ऐसे ही अपना काम कर रही हैं और फ़ैसले ले रही हैं.

इस बारे में ख़लीक़ कयानी ने कहा कि हालांकि ईसीसी और दूसरे फोरम ने फ़ैसले लिए हैं, लेकिन उनके निर्णय तब तक लागू नहीं किए जा सकते, जब तक कि संघीय मंत्रिमंडल इसकी पुष्टि नहीं करता, जिसकी बैठक पिछले तीन हफ़्तों में तीन बार स्थगित हुई है.

संघीय मंत्रिमंडल की बैठक न होने पर मुज़म्मिल असलम ने कहा कि संघीय मंत्रिमंडल की बैठकें स्थगित हुई हैं, लेकिन कैबिनेट के सदस्यों को सर्कुलेशन के ज़रिये कोई भी निर्णय भेज कर उनसे मंज़ूरी ली जा रही है.

असलम ने आईएमएफ़ के साथ पाकिस्तान की बातचीत को लेकर किसी भी डेडलॉक की धारणा को भी ख़ारिज करते हुए कहा है कि बातचीत हो रही है और जल्द ही अंतिम फ़ैसला लिया जाएगा.

वीडियो कैप्शन, सऊदी ने पाकिस्तान के लिए उठाया बड़ा कदम

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