उर्दू प्रेस रिव्यू: आर्थिक संकट से जूझते पाकिस्तान पर एक और गंभीर ख़तरा

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- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते पाकिस्तान में पानी के संकट से जुड़ी ख़बरें सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियां बटोरने में कामयाब रहीं.
पाकिस्तान में पीने के पानी की सख़्त कमी है. पिछले हफ़्ते लगभग सभी अख़बारों ने इस बारे में ख़ूब लिखा.
पाकिस्तान में पानी की समस्या पर दो दिनों का एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया था.

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पाकिस्तान में पानी का संकट कितना गहरा है इस बात का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि इस सेमिनार को पाकिस्तान के राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश ने भी संबोधित किया.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश ने पानी के संकट पर लंबी बातचीत की और केंद्र सरकार को कई महत्वपूर्ण क़दम उठाने के निर्देश दिए.
अख़बार जंग ने सुर्ख़ी लगाई है, "बांध समय की सबसे अहम ज़रूरत है." अख़बार के अनुसार, राष्ट्रपति आरिफ़ अलवी ने कहा है कि पाकिस्तान में सिर्फ़ 30 दिन का पानी जमा करने की गुंजाइश है.
उन्होंने कहा कि भारत के साथ सिंधु जल संधि के तहत बातचीत करने की ज़रूरत है और अगर डैम न बने तो 1960 के पहले वाले हालत हो जाएंगे.
वहीं पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस साक़िब निसार ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि 40 साल तक इस मामले को नज़रअंदाज़ किया गया जो कि एक अपराध है.
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर फ़ौरन उचित क़दम नहीं उठाए गए तो सात साल के बाद पाकिस्तान को सूखे का सामना करना होगा.
अख़बार 'दुनिया' ने भी इसी बारे में सुर्ख़ी लगाई है, "पानी संकट पर आपराधिक अनदेखी की गई."
अख़बार के अनुसार, जस्टिस साक़िब निसार ने कहा कि 'पानी जीने-मरने का सवाल है, लेकिन 40 साल तक इसकी अनदेखी की गई. पिछली ग़लतियों पर क़ाबू पाने का अब भी वक़्त है.'

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आर्थिक संकट
पानी के अलावा पाकिस्तान इन दिनों आर्थिक संकट से भी गुज़र रहा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि मनी लॉड्रिंग रोक कर आर्थिक संकट पर क़ाबू पाया जा सकता है.
अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार इमरान ने पिछली सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि @पिछली सरकारों ने पाकिस्तान की सरकारी संस्थाओं को पूरी तरह तबाह कर दिया है.'
उनका कहना था, 'पिछली सरकारों ने जहां एक तरफ़ देश को अंदरुनी और बाहरी कर्ज़ों के दलदल में धकेल दिया, वहीं दूसरी तरफ़ संस्थाओं को तबाह कर दिया गया और आज हालत ये है कि बड़ी-बड़ी राष्ट्रीय संस्थाएं घाटों के बोझ तले दबी हुई हैं.'
पाकिस्तान ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपेक) के लिए बनी कैबिनेट कमेटी का पुनर्गठन किया है.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार प्रधानमंत्री इमरान ख़ान चीन का दौरा करने वाले हैं. इसीलिए उन्होंने चीन जाने से पहले ही इस महत्वपूर्ण कमेटी में बदलाव किए हैं.
अख़बार के अनुसार अब इस कमेटी में कुल 12 सदस्य होंगे जिनमें वित्त, गृह, विदेश, रेलवे, क़ानून और पेट्रोलियम जैसे अहम मंत्री शामिल हैं.
ज़ैनब के हत्यारे को फांसी
एक अन्य महत्वपूर्ण ख़बर जो सारे अख़बारों में छाई रही वो थी, छह साल की बच्ची ज़ैनब के हत्यारे को फांसी की सज़ा.

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इसी साल जनवरी में पंजाब के कसूर में रहने वाली छह साल की ज़ैनब को अगवा कर पहले उसके साथ बलात्कार किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई थी. इसके विरोध में पूरे पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन हुए थे.
मुख्य न्यायाधीश ने ख़ुद ही संज्ञान लेते हुए पुलिस को मामले की छानबीन करने का निर्देश दिया था. पुलिस ने इमरान अली नाम के एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया था और फिर अदालत ने इमरान को फांसी की सज़ा सुनाई थी. ज़ैनब के परिवार वालों ने इमरान को सार्वजनिक स्थल पर फांसी दिए जाने की मांग की थी.
अदालत ने उनकी इस अपील को ठुकरा दिया था, लेकिन फांसी दिए जाने के समय ज़ैनब के पिता को वहां मौजूद रहने की इजाज़त दे दी थी.
इमरान पर बिलावल भुट्टो का हमला
इसके अलावा इमरान ख़ान पर विपक्षी हमले भी सुर्ख़ियां बटोरते रहे.
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने इमरान सरकार के कामकाज की जमकर आलोचना की है.
अख़बार जंग के अनुसार, बिलावल का कहना था कि इमरान ख़ान की सरकार ने पिछले दो महीनों में अर्थव्यवस्था की जो हालत कर दी है, ग़रीब किसान और मज़दूर को जितना नुक़सान पहुंचाया है, लगता नहीं है कि ग़रीब जनता इस सरकार को पांच साल तक बर्दाश्त कर सकेगी. उन्होंने इमरान ख़ान पर विरोधी राजनेताओं को सरकारी संस्थाओं के ज़रिए परेशान किए जाने का भी आरोप लगाया.

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अख़बार के अनुसार बिलावल का कहना था कि जब प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार विरोधी संस्था - नैब के प्रमुख से ख़ुफ़िया तौर पर मिलें तो इससे बदले की राजनीति की आशंका बढ़ जाती है.
बिलावल का कहना था,"तहरीक-ए-इंसाफ़" अब "तहरीक-ए-इंतक़ाम" बन गई है. हम उनका मुक़ाबला करेंगे." एक और विपक्षी दल मुस्लिम लीग (नून) ने भी इमरान ख़ान और नैब के बीच साठगांठ का आरोप लगाया है.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार मुस्लिम लीग (नून) के अध्यक्ष शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि तहरीक-ए-इंसाफ़ और नैब में नापाक गठजोड़ है. शहबाज़ शरीफ़ के अनुसार उन पर पूर्व केंद्रीय मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ के ख़िलाफ़ गवाही देने के लिए दबाव डाला गया है.
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