माहिरा ख़ान बोलीं- मेरे अब्बू के पासपोर्ट पर जन्म स्थान दिल्ली है

माहिरा ख़ान

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    • Author, वंदना
    • पदनाम, टीवी एडिटर, बीबीसी इंडिया

"आप कहाँ से बात कर रही हैं" ?

इंटरव्यू शुरू होने से पहले ही माहिरा ख़ान ने मुस्कुराते हुए पूछा. जवाब में मैंने कहा, ''दिल्ली''.

तपाक से जवाब आया कि ''मेरे अब्बू भी दिल्ली से हैं और उनके पासपोर्ट पर अब भी लिखा हुआ है कि बॉर्न इन दिल्ली''.

माहिरा ख़ान से बातचीत इस बेहद प्यारे से नोट पर शुरू हुई. माहिरा इन दिनों पाकिस्तान की सबसे महंगी फ़िल्मों में से एक 'द लेजेंड ऑफ़ मौला जट्ट' की रिलीज़ में मसरूफ़ हैं जिसमें वो और फ़वाद ख़ान एक साथ नज़र आ रहे हैं.

वीडियो कैप्शन, शाहरुख़ खान और भारत में काम करने को लेकर ये बोलीं माहिरा ख़ान

ये पहली बार है जब माहिरा ने किसी पंजाबी फ़िल्म में काम किया है.

भारत के लिए माहिरा नई नहीं है. पाकिस्तानी टीवी सीरियल 'हमसफ़र' के ज़रिए उन्होंने लाखों भारतीय फ़ैन बटोरे हैं. 2014 में जब भारत में इस सीरियल का आख़िरी एपीसोड दिखाया गया था तो भारत में वो छा गई थीं.

"शाहरुख़ ख़ान बचपन में मेरे पहले क्रश थे. तब मैं स्कूल में थी. मैंने स्कूल में ऐसा लड़का ढूँढना शुरू किया जिसमें कुछ तो शाहरुख़ जैसा हो." ये पाकिस्तानी अभिनेत्री माहिरा ख़ान का बचपन का किस्सा है जो जिन्होंने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में बताया था.

माहिरा का ये सपना पूरा हुआ जब फ़िल्म 'रईस' में उन्हें शाहरुख़ ख़ान के साथ काम करने का मौका मिला.

शाहरुख़ के बारे में पूछने पर माहिरा बताती हैं, "मेरा ख़्वाब था कि मैं शाहरुख़ के साथ काम करूँ. अल्लाह मियां ने पूरा कर दिया. मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा और मैं उनकी बहुत इज़्ज़त करती हूँ.अगर उनको मिस करती हूँ तो मैसेज कर देती हूँ."

शाहरुख़ ख़ान और माहिरा ख़ान

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इमेज कैप्शन, शाहरुख़ ख़ान और माहिरा ख़ान

भारत-पाकिस्तान रिश्तों पर क्या कहती हैं माहिरा

दरअसल फ़िल्म 'रईस' के दौरान पाकिस्तानी अभिनेत्री माहिरा को लेकर विवाद हो गया था और तब से वो भारत नहीं आईं. नेता राज ठाकरे ने पाकिस्तानी कलाकारों के बॉलीवुड में काम करने को लेकर विरोध जताया था जिसके बाद फ़िल्म के प्रमोशन कैम्पेन से माहिरा को दूर रखा गया.

हालांकि एक वक़्त था जब दोनों देशों के ऐक्टर एक-दूसरे की फ़िल्मों में काम करते थे. 'बोल' जैसी पाकिस्तानी फ़िल्में भी भारत में रिलीज़ होती थीं, लेकिन फ़िलहाल ऐसा नहीं है.

उनकी फ़िल्म 'लेजेंड ऑफ़ द मौला जट्ट' क्या कभी भारत में रिलीज़ होगी इस पर माहिरा कहती हैं, "आप अपनी सरकार से बात कीजिए जो हमारी फ़िल्म नहीं लगाने देते .मज़ा तो तब आएगा जब फ़िल्में दोनों जगह (भारत और पाकिस्तान में ) लगें.

ये राजनीति है और बहुत साल पहले ही मैंने सीख लिया था कि इस पर बात करना, अफ़सोस करना, या उम्मीद करना कि कुछ बदल जाएगा ये नासमझी होगी क्योंकि जब जी चाहेगा वो फ़िल्में लगा देंगे. जब चाहेंगे हमें इस्तेमाल करेंगे हम इज़ी टार्गेट हैं."

माहिरा कहती हैं कि भारत को लेकर उनके मन में सिर्फ़ और सिर्फ़ खुशनुमा यादें हैं. वो कहती हैं, "लोगों ने बहुत कुछ कहा कि उन्हें निकाल दिया. ये कर दिया. असली बात तो ये है कि मैं दिल्ली घूमी, गुजरात घूमी और मुंबई में रही.

रोज़ चाट खाने जाती थी. ख़ूब दोस्त बनाए भारत में और बहुत मज़ा किया. मैं सब लोगों को बहुत याद करती हूँ. अफ़सोस ये है कि फ़िल्म तो दूर की बात, मैं भारत में अपने दोस्तों से भी नहीं मिल पाऊँगी.

हम हैं तो एक जैसे ही न. दिखते एक जैसे हैं, खाना एक जैसा, हमारे शौक़ भी एक जैसे, प्यार भी एक जैसा ही करते हैं और बदतमीज़ियाँ भी."

कोरोना वायरस

बॉलीवुड में पाकिस्तानी कलाकार

फ़वाद ख़ान

माहिरा ख़ान

सबा क़मर

सलमा आग़ा

अली ज़फ़र

कोरोना वायरस

पहली बार पंजाबी फ़िल्म में काम

एमटीवी वीजे से शुरुआत करने वाली माहिरा ने ख़ुद के लिए पाकिस्तानी फ़िल्म इंडस्ट्री में एक अलग जगह बनाई है. बतौर टीवी ऐक्टर और फ़िल्म हीरोइन ख़ुद को साबित करने के बाद माहिरा ने प्रोडक्शन में क़दम रखा और प्रोड्यूसर बनीं.

पहली बार अब माहिरा पाकिस्तान में एक पंजाबी फ़िल्म में काम रही हैं. कराची से आने वाली माहिरा की मातृभाषा पंजाबी नहीं है.

पर उन्होंने एक पंजाबी फ़िल्म में काम करने का क्यों सोचा. माहिरा कहती हैं, "अगर किसी ने कुछ साल पहले मुझसे कहा होता कि मैं कभी पंजाबी फ़िल्म में काम करूँगी तो मैं कहती कि पागल हो गए हो क्या. इसलिए नहीं कि पंजाबी फ़िल्म में कोई दिक्कत है, बल्कि इसलिए कि मैं ये ज़बान बिल्कुल नहीं जानती. लेकिन मेरे निर्देशक ने मुझे समझाया.

पंजाबी बहुत प्यारी ज़बान है. अगर फ़्रेंच के बाद मैं कोई भाषा सीखना चाहूँगी तो वो है पंजाबी. झगड़ा हो, प्यार हो, रोमांस हो , पंजाबी में कहने-करने की बात ही कुछ और है."

फ़िल्म द लीजेंड ऑफ़ मौला जट्ट

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'पुरानी 'मौला जट्ट' फ़िल्म'

वैसे 'मौला जट्ट' नाम की फ़िल्म 1979 में पाकिस्तान में बनी थी जिसे पाकिस्तानी सिनेमा में मील का पत्थर समझा जाता है और पाकिस्तान में लाउड किस्म की फ़िल्मों के लिए ज़िम्मेदार भी माना जाता है.

अब 'द लेजेंड ऑफ़ मौला जट्ट' आई है जिसमें कुछ पुराने किरदारों और डायलॉग को लेकर इसे नए तरीके से बनाया गया है.

फ़िल्म 'मौला जट्ट' का पाकिस्तान में ख़ास राजनीतिक महत्व है. फ़िल्म रिलीज़ होने के कुछ हफ़्ते बाद ही पाकिस्तान में ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो को फाँसी लगा दी गई थी. वो ज़िआ-उल हक़ के मार्शल लॉ का दौर था.

इस पंजाबी फ़िल्म में 'मौला जट्ट' नाम का हीरो था और एक ताकतवर विलेन और लोग इसे पाकिस्तान के राजनीतिक हालात से जोड़कर देख रहे थे. ज़िया-उल हक़ ने फ़िल्म पर बैन लग दिया, लेकिन कोर्ट ने इस पर स्टे ऑर्डर दिया.

हज़ारों लोगों ने फ़िल्म देखी और बार-बार देखी. ये फ़िल्म कोई ढाई साल तक पाकिस्तानी सिनेमा हॉल में रही और पाकिस्तान को नया हीरा दिया सुल्तान राही. लेकिन बाद में धीरे-धीरे पाकिस्तान में पंजाबी फ़िल्में बनना बहुत कम हो गईं.

अब लंबे समय बाद पाकिस्तान में पंजाबी फ़िल्म बनी है जिसमें माहिरा और फ़वाद काम कर रहे हैं. माहिरा का काम का दायरा पिछले कुछ सालों में काफ़ी बढ़ा है. वो अलग-अलग मुद्दों पर खुल कर बोलती रही हैं.

वीडियो कैप्शन, माहिरा ख़ान किसे हीरो नहीं मानतीं...

माहिरा को शाहरुख़ पसंद है और शायरी भी. उनके ट्विटर अकाउंट पर नईरा वहीद की ये पंक्तियाँ पिन टू टॉप रहती हैं- "माई हार्ट इज़ इन माई माइंड. आई थिंक दिस इज़ वाय आई ऐम ऐन आर्टिस्ट" - यानी मेरा दिल दरअसल मेरे दिमाग़ में हैं, शायद इसीलिए मैं एक कलाकार हूँ.

इस साल जनवरी में बीबीसी उर्दू को दिए इंटरव्यू में दिल की बातें साझा करते हुए माहिरा ने कहा था कि वो आज भी दिमाग़ से ज़्यादा दिल से सोचती हैं और इसलिए कभी-कभी ग़लत फ़ैसले भी ले लेती हैं.

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