उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम के बारे में जो बातें पता हैं

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उत्तर कोरिया ने इसी हफ़्ते (5 अक्टूबर को) एक मिसाइल दाग़ी जो जापान के ऊपर से होते हुए क़रीब 4500 किलोमीटर (2800 मील) की दूरी तय करने के बाद प्रशांत महासागर में गिरी.
उत्तर कोरिया अपने हथियार कार्यक्रम के तहत नियमित रूप से मिसाइल परीक्षण करता रहा है लेकिन 2017 के बाद से पहला मौका है जब उसने जापान के ऊपर से मिसाइल दाग़ी है.
आइए एक नज़र डालते हैं उत्तर कोरिया की मिसाइल क्षमताओं पर
उत्तर कोरिया किन मिसाइलों का परीक्षण कर रहा है?
उत्तर कोरिया ने इस साल तीस से अधिक मिसाइल परीक्षण किए हैं. इनमें कई मिसाइलें ऐसी हैं जो अमेरिका तक पहुंचने की क्षमता रखती हैं.
इनमें बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज़ मिसाइलें और हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं. हाइपरसोनिक मिसाइलें आवाज़ से कई गुना तेज़ गति पर नीची उड़ान भरती हैं ताकि रडारों से बच सकें.
जानकारों का दावा है कि जापान के ऊपर से दाग़ी गई मिसाइल मध्य दूरी की ह्वासोंग-12 हो सकती है जिसकी क्षमता 4500 किलोमीटर है.
उत्तर कोरिया से अमेरिकी द्वीप गुआम पर इससे निशाना साधा जा सकता है. उत्तर कोरिया ह्वासोंग-14 बैलिस्टिक मिसाइलों का भी परीक्षण कर रहा है.
ये 8000 किलोमीटर दूरी तक मार कर सकती है. हालांकि कुछ शोधों के अनुसार इसकी क्षमता दस हज़ार किलोमीटर तक भी हो सकती है. यानी ये न्यूयॉर्क तक भी मार कर सकती है.
ये उत्तर कोरिया की पहली इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (आईसीबीएम) में से एक है.

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सैन्य शक्ति दिखाने की कोशिश
उत्तर कोरिया की नई मिसाइल ह्वासोंग-15 की क्षमता 13000 किलोमीटर दूर तक मार करने की आंकी जा रही है. यानी समूचा अमेरिका इसकी मारक क्षमता के दायरे में होगा.
अक्तूबर 2020 में उत्तर कोरिया ने अपनी नई बैलिस्टिक मिसाइल ह्वासोंग-17 को दुनिया के सामने पेश किया था.
माना जा रहा है कि ये मिसाइल 15000 किलोमीटर से भी अधिक दूरी तक मार कर सकती है.
इस मिसाइल पर एक की जगह तीन या चार वॉरहेड तैनात किए जा सकते हैं. यानी जिस देश के ख़िलाफ़ इसे दाग़ा जाएगा उसके लिए अपने आप को इससे बचाना आसान नहीं होगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया नई-नई मिसाइलें सामने लाकर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन को संदेश भेज रहा है.
वो मानते हैं कि उत्तर कोरिया अपनी बढ़ रही सैन्य शक्ति को जगजाहिर करना चाहता है.
मार्च 2021 में भी उत्तर कोरिया ने हथियारों के परीक्षण किए थे. उत्तर कोरिया ने इन्हें 'न्यू टाइप टेक्टिकल गाइडेड प्रोजेक्टाइल' कहा था.
उत्तर कोरिया ने दावा किया था कि इस हथियार पर 2.5 टन का पेलोड लादा जा सकता है.
यानी थ्यौरी के आधार पर ये कहा जा सकता है कि ये परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है.
जेम्स मार्टिन सेंटर फॉर नॉनप्रोलिफेरेशन के विशेषज्ञों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया है कि ऐसा लगता है कि ये नया हथियार उत्तर कोरिया की पहले टेस्ट की गई मिसाइल केएन-23 का ही नया रूप है.

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उत्तर कोरिया के पास कौन-कौन से परमाणु हथियार हैं?
उत्तर कोरिया ने अंतिम परमाणु परीक्षण साल 2017 में किया था. उत्तर कोरिया के इस धमाके के दौरान क़रीब 100-370 किलो टन विस्फोटक का प्रभाव पैदा हुआ था.
अमेरिका ने जो परमाणु बम 1945 में जापान के हिरोशिमा पर दाग़ा था,100 किलोटन का बम उससे छह गुना अधिक शक्तिशाली होता है.
उत्तर कोरिया ने दावा किया था कि ये उसका पहला थर्मोन्यूक्लियर डिवाइस था. ये परमाणु हथियारों का सबसे विध्वंसक रूप होता है.
रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज़ इंस्टीट्यूट के रिसर्च फेलो जोसेफ़ बायर्ने मानते हैं कि अब उत्तर कोरिया इतनी ही क्षमता वाले लेकिन छोटे परमाणु हथियार के परीक्षण का इरादा रख रहा होगा.
वो कहते हैं, "ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उत्तर कोरिया अपनी किसी नई क्षमता का परीक्षण कर रहा है. एक ऐसा छोटा परमाणु हथियार जिसे कम दूरी की मिसाइलों समेत कई तरह की मिसाइलों पर तैनात किया जा सके."

परमाणु परीक्षण कहां हो सकता है?
पुंगेरी परमाणु परीक्षण स्थल पर अब तक उत्तर कोरिया छह भूमगित परीक्षण कर चुका है हालांकि साल 2018 में उत्तर कोरिया ने कहा था कि वो इस स्थल को बंद कर रहा है क्योंकि इसकी परमाणु क्षमता की पुष्टि हो चुकी है.
इसके बाद उत्तर कोरिया ने विदेशी पत्रकारों की मौजूदगी में इस परीक्षण स्थल की कुछ सुरंगों को बमों से उड़ा दिया था.
हालांकि उत्तर कोरिया ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को इस बात की पुष्टि नहीं करने दी थी कि ये स्थल वास्तव में बेकार हो गया है या नहीं.
इस साल सामने आई सेटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि पुंगेरी की मरम्मत का काम शुरू हो चुका है.
इस स्थल पर किया जाने वाला कोई भी परमाणु परीक्षण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन होगा.
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परमाणु रिएक्टर दोबारा शुरू?
साल 2018 में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को भरोसा दिया था कि उत्तर कोरिया अपने सभी परमाणु संवर्धन केंद्रों और इससे जुड़े पदार्थों को नष्ट कर देगा.
हालांकि, संयुक्त राष्ट्र की परमाणु मामलों की संस्था का कहना है कि सेटेलाइट तस्वीरों से ये संकेत मिल रहे हैं कि उत्तर कोरिया ने हथियारों के लिए प्लूटोनियम बनाने वाले अपने परमाणु संयंत्र को फिर से चालू कर दिया है.
इंटरनेशनल एटॉमिक इनर्जी एजेंसी (आईएईए) का कहना है कि उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम पूरी रफ़्तार से आगे बढ़ रहा है और प्लूटोनियम को अलग करने, यूरोनियम के संवर्धन और दूसरी परमाणु गतिविधियां ज़ोर-शोर से चल रही हैं.
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