उत्तर कोरिया ने किया ICBM का परीक्षण, जापान और दक्षिण कोरिया चिंतित

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दक्षिण कोरिया और जापान ने बताया है कि 2017 के बाद उत्तर कोरिया ने पहली बार प्रतिबंधित इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का परीक्षण किया है. यह मिसाइल जापान के दक्षिण में उसके जलक्षेत्र में गिरी.
जापानी अधिकारियों का अनुमान है कि इसकी मारक क्षमता 1,100 किलोमीटर है, क्योंकि एक घंटा उड़ कर इसने 1,100 किलोमीटर दूरी तय की.
उत्तर कोरिया का कोई इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यानी आईसीबीएम हज़ारों किलोमीटर की दूरी और पहले से तय रास्ते पर चलते हुए उत्तर कोरिया से अमेरिका तक पहुंच सकती है.
उत्तर कोरिया ने हाल के हफ़्तों में कई परीक्षण किए हैं. अमेरिका और दक्षिण कोरिया का कहना था कि उनमें ICBM सिस्टम का परीक्षण भी शामिल था.
बताया गया था कि उत्तर कोरिया 2017 के बाद पहली बार आईसीबीएम को उसकी पूरी क्षमता तक मिसाइल का परीक्षण कर सकता है.

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जापानी अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार को जो मिसाइल टेस्ट हुई, वो नया और पांच साल पहल टेस्ट हुई मिसाइल से कहीं ज़्यादा ताक़तवर है. बताया गया है कि यह मिसाइल आसमान में 6,000 किलोमीटर ऊंचाई तक गई है.
दक्षिण कोरिया की सेना ने पिछले हफ़्ते बताया था कि 16 मार्च को उत्तर कोरिया ने एक संदेहास्पद मिसाइल को भी टेस्ट किया था, जो कुछ ही ऊंचाई जाने के बाद फट गया था.
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन ने ताज़ा मिसाइल लॉन्चिंग की कड़ी निंदा की है.
उन्होंने कहा कि ऐसा करके उत्तर कोरिया के चेयरमैन किम जोंग-उन ने आईसीबीएम का परीक्षण टाल देने का दुनिया से किया गया पहले का अपना वादा तोड़ दिया है. उन्होंने यह भी किया कि यूएन के प्रतिबंधों का भी उल्लंघन है.

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पांच साल पहले रूका था आईसीबीएम का परीक्षण
मालूम हो कि 2017 में पिछले परीक्षण के बाद यूएन ने उत्तर कोरिया को बैलिस्टिक मिसाइलों के टेस्ट और परमाणु परीक्षण करने पर रोक लगाते हुए उस पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे.
अमेरिका के तब के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत के बाद किम जोंग-उन ने 2018 में लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइलों के टेस्ट और परमाणु परीक्षण को रोक दिया था.
लेकिन 2020 में उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जॉन्ग उन ने घोषणा की थी कि वो अब वादे से बंधे हुए नहीं हैं.
2017 में उत्तर कोरिया ने जिस आईसीबीएम 'ह्वासोंग 12' का परीक्षण किया था, वो क़रीब 4,500 किलोमीटर की ऊंचाई तक गया था. वहीं ह्वासोंग 14 ने कहीं ज़्यादा 8,000 किलोमीटर का रेंज तय किया था.
केवल अमेरिका, रूस और चीन के पास ही इतनी दूर तक मार करने वाले मिसाइल हैं.

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जानकारों का मानना है कि 2017 में टेस्ट किया गया आईसीबीएम यदि मानक ट्रैजेक्ट्री पर छोड़ा गया होता तो यह 13 हज़ार किलोमीटर तक मार कर सकता है. इसका मतलब यह हुआ कि ये मिसाइल अमेरिका के किसी भी कोने तक मार कर सकता है.
इस महीने के शुरू में उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण स्थल पुंगे-री की मिली सैटेलाइट इमेजों से पता चला कि वहां परीक्षण गतिविधियां फिर से शुरू कर दी गई हैं. देश के उत्तर पूर्व में स्थित इस संयंत्र को 2018 में बंद कर दिया गया था.
इससे आशंका बढ़ गई थी कि उत्तर कोरिया जल्द ही मिसाइलों के टेस्ट या परमाणु परीक्षण कर सकता है.
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