अपने ही परमाणु परीक्षण से ख़तरे में उत्तर कोरिया?

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क्या उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण की वजह से वहां की भूगर्भीय संरचना (ज़मीन के नीचे के ढांचे) में तब्दीली आई है?
कुछ विश्लेषकों ने बताया, ''ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि उत्तर कोरिया के परीक्षण की वजह से वहां का मनटैप पहाड़ प्रभावित हुआ है. उत्तर कोरिया के आख़िरी परमाणु परीक्षण से इस पहाड़ की स्थिति में परिवर्तन आया है.''
उसके आख़िरी परमाणु परीक्षण का धमाका काफ़ी प्रचंड था. इसके उत्तर-पूर्वी इलाक़े में परमाणु परीक्षण के बाद 6.3 मैग्निट्यूड का भूकंप आया था.

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उत्तर कोरिया में भूगर्भीय हलचल
उसके बाद से इस इलाक़े में तीन से ज़्यादा भूकंप आ चुके हैं. यह इलाक़ा प्राकृतिक भूकंप के लिए नहीं जाना जाता है. कोलंबिया यूनिवर्सिटी के भूकंप विज्ञानी पॉल जी रिचर्ड्स ने कहा, ''उत्तर कोरिया ज़मीन पर दबा हुआ दिख रहा है और विस्फोट के कारण हिल गया है.
चीनी वैज्ञानिकों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि उत्तर कोरिया ने और परमाणु परीक्षण किया तो पहाड़ ध्वस्त हो सकता है और धमाके से विकिरण का प्रसार होगा.

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नागासाकी में गिराए बम के बराबर
उत्तर कोरिया ने 2006 से अब तक 6 परमाणु परीक्षण किए हैं. ये सारे परीक्षण गहरे सुरंग खोदकर किए गए हैं. पूरा परीक्षण मनटैप पहाड़ के पास ही किया जाता है. यह इलाक़ा इसी के लिए जाना जाता है. सबसे हाल के परीक्षण को उत्तर कोरिया ने हाइड्रोजन बम बताया था.
वॉशिगंटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक विश्लेषकों का मानना है कि परीक्षण के बाद उत्तर कोरिया में भूकंप का जो पैमाना होता है वो जबर्दस्त होता है. वो थर्मोन्यूक्लियर डिवाइस विस्फोट करता है. इसका आकार 17 गुना होता है जो कि 1945 में अमरीका ने हिरोशिमा में जो परमाणु बम गिराया था उसके बराबर है.
अंतरिक्ष तकनीक कंपनी एयरबस ने वहां की तस्वीरें ली हैं. उसका इन तस्वीरों के आधार पर कहना है कि पहाड़ परीक्षण के दौरान अपनी जगह से हिल गया है.
इससे पहले दक्षिण कोरिया की सरकारी समाचार सेवा योनहैप ने कहा था कि उत्तर कोरिया ने तीन सितंबर को जिस परमाणु बम का परीक्षण किया था वो जापान के नागासाकी शहर पर 1945 में गिराए गए बम से चार-पांच गुना ज़्यादा शक्तिशाली है.

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दक्षिण कोरिया की रक्षा मामलों की संसदीय समिति के प्रमुख किम यंग वू ने सेना के सूत्रों का हवाला देते हुए बताया था कि तीन सितंबर को किया गया परीक्षण बीते साल किए गए पांचवें परमाणु परीक्षण से बहुत ज़्यादा शक्तिशाली है.
सितंबर 2016 में किया गए परीक्षण से दस किलोटन ऊर्जा उत्पन्न हुई थी. एक किलोटन एक हज़ार टन टीएनटी के बराबर होता है.
किम यंग वू ने बताया था, "उत्तर कोरिया के परीक्षण से लगभग सौ किलोटन ऊर्जा उत्पन्न हुई है, हालांकि ये शुरुआती रिपोर्ट है." उत्तर कोरिया इससे पहले 2006, 2009, 2013 और 2016 में परमाणु बमों का परीक्षण कर चुका है.

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रूस तक कंपन
आख़िरी परमाणु परीक्षण का धमाका इतना शक्तिशाली था कि इसका कंपन रूस के पूर्वी शहर व्लादिवोस्टक तक महसूस किया गया.
इस बीच सीआईए निदेशक माइक पोंपेओ ने चेतावनी दी है कि उत्तर कोरिया अमरीका को परमाणु मिसाइल से निशाने पर लेने में सक्षम होने की कगार पर है.
उन्होंने कहा कि अमरीका अब भी राजनयिक समाधान की तरफ़ देख रहा है जिसमें प्रतिबंध भी शामिल है लेकिन सैन्य समाधान भी एक विकल्प है.
उत्तर कोरिया दावा करता है कि उसने अमरीका पर हमला करने की क्षमता पहले ही हासिल कर ली है.

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पोंपेओ ने गुरुवार को वॉशिंगटन में एक कंजर्वेटिव थिंक टैंक फाउंडेशन फोर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसिज में कहा, ''उत्तर कोरिया अमरीका पर हमला करने की क्षमता हासिल करने के क़रीब है. इस मामले में हमें नीतियों के स्तर पर सतर्क रहने की ज़रूरत है. हमें अब यह सोचने की ज़रूरत है कि उत्तर कोरिया को कैसे मुकाम तक पहुंचने से रोकें.''
उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया की मिसाइल विेशेषज्ञता तेज़ी से उन्नत हो रही है. ऐसे में उत्तर कोरिया की इस प्रगति पर अमरीकी खुफिया एजेंसियों की ज़िम्मेदारी और बढ़ गई है. पिछले हफ़्ते अमरीकी विदेश मंत्री रेक्स टिलर्सन ने भी राष्ट्रपति ट्रंप से उत्तर कोरिया पर राजनयिक समाधान निकालने का आग्रह किया था.
इससे पहले ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि उत्तर कोरिया बातचीत के ज़रिए समाधान निकालना समय बर्बाद करना है.
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