चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाक़ात में क्या होगा?

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- Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
- पदनाम, ख़बरों की रिपोर्टिंग और विश्लेषण
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस सप्ताह उज़्बेकिस्तान में होंगे और दोनों की मुलाक़ात होना तय है. समरकंद में 15-16 सितंबर को होने वाली बैठक में भारत, पाकिस्तान, तुर्की, ईरान और अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी होंगे.
ये सभी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंच रहे हैं.
चीन के नेता शी जिनपिंग से पुतिन की मुलाक़ात को रूस ख़ास तवज्जो दे रहा है.
दोनों नेताओं की पिछली मुलाक़ात बीजिंग में फ़रवरी में शीत ओलंपिक के दौरान हुई थी.
इस मुलाक़ात के बाद पुतिन और जिनपिंग की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया था कि दोनों देशों की दोस्ती की कोई सीमा नहीं है.
इस मुलाक़ात के कुछ दिन बाद ही रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण कर दिया था. लेकिन क्या उसके बाद से हालात बदल गए हैं?
बीबीसी मॉनिटरिंग ने ये समझने की कोशिश की कि रूस इस मुलाक़ात से क्या चाहता है और चीन को इससे क्या उम्मीदें हैं.
राष्ट्रपति पुतिन के लिए चीन के साथ क़रीबी रिश्ते उनकी 'एक नए बहुध्रुवी विश्व' की दृष्टि का अहम हिस्सा हैं जिसमें चीन और रूस जैसे देश दुनियाभर में पश्चिमी प्रभाव पर हावी होंगे.
ये नीति पुतिन के शासन का अहम हिस्सा है और वो इस पर सालों से चले आ रहे हैं. लेकिन अब ये नीति रूस के लिए और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है.
व्लादिमीर पुतिन के यूक्रेन पर आक्रमण करने के बाद से ही पश्चिमी देशों ने उनकी तीखी आलोचना की है और उन्हें अलग-थलग कर दिया है, ऐसे में वो दुनिया में अहम प्रभाव रखने वाले शी जिनपिंग जैसे नेताओं से मिलते हुए दिखना चाहते हैं.
लेकिन चीन के राष्ट्रपति से मिलना पुतिन के लिए सिर्फ़ दिखावे की बात ही नहीं है बल्कि रूस और पुतिन के लिए इसका महत्व इससे कहीं अधिक है.

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रूस और पुतिन की स्थिति
यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से रूस पर अभूतपूर्व प्रतिबंध लगे हैं. ऐसी स्थिति में पुतिन के लिए चीन का निवेश, तकनीक और चीन के साथ द्विपक्षीय कारोबार और भी अधिक अहम हो गया है. पुतिन चाहेंगे कि वो इसे बढ़ावा दें.
रूस से बड़े पैमाने पर पश्चिमी कंपनियां चली गई हैं तो अब पुतिन चाहेंगे की चीनी कंपनियां उनकी जगह लें.
पश्चिमी देश अब रूस के तेल और गैस पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं. व्लादिमीर पुतिन चाहेंगे कि वो अपने देश से तेल और गैस अब पूर्व में चीन की तरफ़ भेजें.
यूक्रेन में रूस का सैन्य अभियान भी पिछड़ रहा है और रूस चाहता है चीन उसकी हथियारों से मदद करे. लेकिन सहयोग के तमाम वादों के बावजूद चीन इस मामले में रूस की मदद को लेकर बहुत सावधानी बरत रहा है.
हालांकि, चीन के साथ नज़दीकी संबंध बनाने की पुतिन की इस नीति की अपनी चुनौतियां भी हैं. दोनों देश भू-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए एक दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हैं साथ ही घरेलू स्तर पर राष्ट्रपति पुतिन पर पूर्वी रूस में चीन के प्रभाव को बढ़ने देने के आरोप भी लग चुके हैं.


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यूक्रेन और रूस पर चीन का रुख़ अब तक क्या रहा है?
शी जिनपिंग की उज़्बेकिस्तान यात्रा साल 2020 में कोविड महामारी शुरू होने के बाद से उनकी पहली विदेश यात्रा है.
16 अक्तूबर को चीन में कम्यूनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की 20वीं राष्ट्रीय कांग्रेस का आयोजन होना है जो जिनपिंग के लिए बेहद संवेदनशील होगा. उनका ये दौरा उससे ठीक पहले हो रहा है.
माना जा रहा है कि शी जिनपिंग को पार्टी के इस सम्मेलन में तीसरी बार के लिए राष्ट्रपति चुन लिया जाएगा.
चीन के सरकारी मीडिया ने अभी राष्ट्रपति पुतिन के साथ जिनपिंग की मुलाक़ात के बारे में अधिक जानकारियां प्रकाशित नहीं की हैं. हालांकि ताइवान और हांगकांग का मीडिया ये कह रहा है कि इस यात्रा से जिनपिंग ये संकेत देना चाहते हैं कि उनके हाथ में पार्टी और देश का पूर्ण नियंत्रण है.
ताइवान की सरकार समर्थिन सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी का कहना है कि ये मुलाक़ात जिनपिंग के लिए 'शर्म' की वजह भी बन सकती है क्योंकि ये ऐसे समय में हो रही है जब यूक्रेन में हालात बदल रहे हैं और यूक्रेन ने रूस के सैनिकों को देश के पूर्वी हिस्से के बड़े इलाक़ों से खदेड़ दिया है.
हाल ही में चीन से वापस जा रहे रूस के राजदूत आंद्रे डेनिसोव के साथ मुलाक़ात में चीन के वरिष्ठ राजनयिक यांग जिएची ने रूस के प्रति चीन का समर्थन व्यक्त किया था.
वहीं चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के तीसरे सबसे बड़े नेता ली झांशू इसी महीने रूस की सद्भावना यात्रा पर गए थे. यांग और ली दोनों ही चाहते हैं कि रूस चीन के साथ रिश्ते और मज़बूत करे.
ली के मुताबिक चीन और रूस के रिश्तों को 'नए स्तर पर ले जाया जाएगा.'
हालांकि चीन ने बड़ी सावधानी से यूक्रेन युद्ध पर तटस्थ रुख बनाया हुआ है. लगातार बढ़ रही पश्चिमी देशों की रोकथाम के बीच चीन को रूस के सहयोग की ज़रूरत है लेकिन जिपिंग पुतिन के बेहद क़रीब खड़े हुए भी नहीं दिखना चाहते हैं.
यूक्रेन में परिस्थितियां बदल रही हैं और पुतिन के लिए हालात ख़राब हो रहे हैं, वहीं रूस के कई शहरों के काउंसलरों ने ट्विटर पर उनका इस्तीफ़ा मांगने के लिए अभियान चलाया है, ऐसे में जिनपिंग की अपने 'जिगरी दोस्त' से मुलाक़ात पर दुनिया की नज़रें टिकी रहेंगी.
क्या जिनपिंग रूस के नेता से अपने आप को और दूर करेंगे या फिर उन्हें अपना सहयोग देंगे ताकि पुतिन के गिरने की स्थिति में वो अलग-थलग न नज़र आएं?
















