उत्तर कोरिया में कैसी है 'देशद्रोहियों' के लिए बनी जेल, एक महिला की आपबीती

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- Author, लॉरा बिकर
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, सोल
जेल में बंद ली यंग जू रेंग कर अपने सेल में पहुंचतीं थीं, जहां उन्हें क्रास बनाते हुए बैठने को कहा जाता और इस दौरान अपने हाथ घुटने पर रखने होते थे. अगले 12 घंटे तक उन्हें हिलने-डुलने की अनुमति नहीं होती थी.
थोड़ा भी हिलने-डुलने या सेल के दूसरे साथियों से कानाफूसी करने पर उन्हें कड़ी सजा मिलती. उन्हें खाने के लिए मक्के के कुछ दाने और पीने के लिए सीमित पानी मिलता था.
ली यंग जू ने बीबीसी को बताया, "मैं खुद को इंसान नहीं, जानवर महसूस करने लगी थी."
ली यंग जू ने बीबीसी को बताया कि उनके साथ घंटों पूछताछ की जाती थी. यह पूछताछ इसलिए होती थी क्योंकि वे अपना देश छोड़ने की कोशिश कर रही थीं. देश छोड़ने को हमलोगों से बहुत लोग बहुत बड़ी बात नहीं समझते. लेकिन जू के लिए यह बहुत बड़ी बात थी.
उन्होंने 2007 में उत्तर कोरिया से बाहर निकलने की कोशिश की थी. चीन में उन्हें पकड़ लिया और वापस उत्तर कोरिया भेजा गया.
अपनी सज़ा का इंतज़ार करते हुए उन्हें चीन की सीमा से उत्तर कोरियाई ओनसोंग डिटेंशन सेंटर में तीन महीने गुज़ारना पड़ा. जब वह अपनी कोठरी में बैठती थीं तो उन्हें बाहर निगरानी करने वाले सैनिकों के जूतों में लगे धातु की चिप की आवाज़ 'क्लाक-क्लाक' सुनाई देती.
जब आवाज़ दूर जाने लगती तो वह सेल में मौजूद दूसरे कैदियों से फुस-फुसाकर बात करने की कोशिश करतीं. जू बताती हैं कि दूसरे कैदियों के साथ वह फिर से बाहर निकलने की योजना बनातीं.
उन्होंने बताया, "हम दूसरी बार बाहर निकलने की योजना बनाते, हम दलालों से मिलने की योजना बनाया करते थे, ये सब गुप्त बातें होती थीं."
वैसे तो इस डिटेंशन सेंटर का उद्देश्य लोगों को उत्तर कोरिया से भागने से रोकना था, लेकिन इसका असर जू और उनके सेल के साथियों पर नहीं हो रहा था. ज़्यादा लोग देश छोड़ने के लिए मिलने वाली सजा का इंतज़ार कर रहे थे.
एक दिन किसी सुरक्षा गार्ड ने जू की योज़ना के बारे में सुन लिया.
जू बताती हैं, "गार्ड ने मुझे जेल की सलाखों से हाथ बाहर निकालने के लिए कहा. चाबी की एक रिंग से उसने मेरे हाथों पर पीटना शुरू किया और तब तक पीटा जब तक मेरा हाथ सूज नहीं गया. मेरा हाथ पूरी तरह नीला पड़ गया. मैं सम्मान के भाव के चलते रोना नहीं चाहती थी. ये गार्ड देश छोड़ने की कोशिशों के चलते हमें देशद्रोही समझते थे. सेल का कॉरिडोर एक ही था, लिहाजा दूसरे सेल के कैदी की पिटाई की आवाज़ भी सुनाई देती थी. मैं सेल नंबर तीन में थी लेकिन दसवें नंबर की सेल के कैदी की पिटाई भी सुनाई देती थी."

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जांच में क्या मिला ?
उत्तर कोरिया की जेलों में अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के उल्लंघन के मामलों की विस्तृत जांच कोरिया फ्यूचर नाम के गैर सरकारी संगठन ने की है. इस समूह ने 200 से ज़्यादा लोगों के अनुभवों को एकत्रित किया है, जिसमें योंग-जू भी एक हैं.
इस गैर सरकारी संगठन ने 148 दंडात्मक केंद्रों पर 785 बंदियों के ख़िलाफ़ मानवाधिकार उल्लंघन के 5,181 मामलों को दर्ज किया है और 597 दोषियों की पहचान की है.
इन मामलों में सबूत जमा किए गए हैं. आंकड़े ये सोचकर जुटाए गए हैं कि एक दिन इन मामलों में न्याय मिलेगा. उत्तर कोरिया हमेशा से मानवाधिकार उत्पीड़न के मामलों से इनकार करता आया है. इस नई जांच के बाद लगे आरोपों पर बीबीसी ने उत्तर कोरिया के प्रतिनिधियों से संपर्क कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.
कोरिया फ्यूचर ने ओनसोंग डिटेंशन सेंटर का थ्री डी मॉडल भी तैयार किया है, जिसे देख कर लोग वहां की स्थिति का अंदाज़ा लगा सकते हैं.
कोरिया फ्यूचर, सियोल के को-डायरेक्टर सोयून यू ने बीबीसी को बताया उत्तर कोरिया की जेलों में सज़ा और हिंसा के ज़रिए 2.5 करोड़ लोगों का उत्पीड़न हुआ.
यू ने बताया, "हमने जिस भी शख़्स का इंटरव्यू किया, उनकी बताई बातों से इंसानों के साथ हुए भयावह उत्पीड़न का पता चला. एक महिला के सामने एक नवजात बच्चे की हत्या की गई थी, वह तो बताते हुए ही रोने लगी थीं."

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उत्पीड़न के ढेरों आरोप
उत्तर कोरिया इन दिनों दुनिया से पूरी तरह अलग थलग पड़ा हुआ है. ये देश पहली बार दुनिया से इतना कट चुका है. उत्तर कोरिया में किम परिवार का तीन पीढ़ियों से शासन चला आ रहा है. यहां के नागरिकों को किम परिवार और मौजूदा नेता किम जोंग उन के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करनी होती है.
कोविड महामारी के संकट के चलते देश के अंदर और सीमा पर किम परिवार का नियंत्रण बहुत मज़बूत हुआ है. बाहरी दुनिया की झलक लेने की कोशिश करने वालों, यहां तक कि विदेशी नाटक और सिनेमा देखने वालों के लिए कठिन सजा का प्रावधान है. जेल की अंदर हिंसा की व्यवस्था के बारे में हर केंद्र और हर गवाह से एकसमान अनुभव सुनने को मिले हैं. जेल के अंदर बलात्कार और दूसरे यौन उत्पीड़न के कई आरोप भी हैं. पीड़िताओं ने कोरिया फ्यूचर को बताया है कि उन लोगों को कैद के दौरान जबरन गर्भपात कराना पड़ा.
उत्तर कोरिया के एक ऐसे ही डिटेंशन सेंटर, नार्थ हेमग्यांग प्रोविंसल होल्डिंग सेंटर के बारे में एक प्रत्यक्षदर्शी गवाह ने बताया कि वहां आठ महीने की गर्भवती महिला का जबर्दस्ती गर्भपात कराया गया. प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक बेबी बच गया था तो उसे नाले से बहा दिया गया. इसके अलावा प्रत्यक्षदर्शियों ने पांच लोगों को फांसी दिए जाने के बारे में भी बताया है.

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न्याय की उम्मीद
योंग जू को साढ़े तीन साल कैद की सज़ा मिली थी. उन्होंने बताया, "मैं तब चिंतित थी कि सजा पूरी होने तक जीवित भी रहूंगी या नहीं. जब आप ऐसी जगहों पर जाते हैं तो तकलीफ़ सहने और ज़िंदा रहने के लिए मानवीय गुणों को छोड़ना पड़ता है."
ओनसोंग डिटेंशन सेंटर में, 2007 में ही, सेरोम भी कैद में थीं. उनके मुताबिक पुलिस की पिटाई बेहद ही तकलीफ़ देने वाली होती थी.
उन्होंने बताया, "वे अपकी जांघों पर लकड़ी के डंडे से पीटते थे. आप चल कर जाते थे लेकिन रेंगते हुए निकलते थे. मैं दूसरे लोगों की पिटाई नहीं देखना चाहती थी, तो अपना सिर मोड़ लेती थी, वे मुझे जबर्दस्ती दिखाते थे, वे इस तरह से स्प्रिट को ख़त्म करते थे."
सेरोम ने कैद में बिताए दिनों को याद करते हुए हमें बताया, "अगर कोई रास्ता हो तो वह उन लोगों को सज़ा दिलाना चाहती हैं."
उनके मुताबिक अब वह दक्षिण कोरिया में हंसी खुशी से जीवन यापन कर रही हैं.
इन मामलों में क़ानूनी प्रक्रिया का शुरु होना बेहद मुश्किल है लेकिन इस जांच में इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के विशेषज्ञ भी शामिल हैं. इस मामले में जुटाए गए सबूत भी अदालत में पेश किए जा सकते हैं. मदद की सुविधा मुफ़्त उपलब्ध कराई जा रही है.
सेरोम और यंग-जू, दोनों ने हमें बताया कि उन्हें जिस न्याय की उम्मीद है, ये रिपोर्ट उसके करीब ले जाने वाली है.
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