उत्तर कोरिया को जानना है तो इन आंकड़ों पर नज़र डालिए

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अमरीका और उत्तर कोरिया के बीच तनाव बना हुआ है और युद्ध का ख़तरा भी मंडरा रहा है.
बाहर के लोग आसानी से उत्तर कोरिया में प्रवेश नहीं कर सकते. वो इकलौता ऐसा देश है जो बाक़ी दुनिया से कटा हुआ है.
उत्तर कोरिया अपने बारे में कभी किसी तरह के आंकड़े जारी नहीं करता. ऐसे में उसके बारे में जो भी आंकड़े उपलब्ध हैं, वे अनुमानित हैं. बावजूद इसके इन आंकड़ों से उत्तर कोरिया के बारे में बहुत कुछ पता चलता है. डालते हैं एक नज़र:
सत्ता पर नियंत्रण
किम इल सुंग ने 1948 में उत्तर कोरिया में हुकूमत की स्थापना की थी. तब से लेकर आज तक उत्तर कोरिया की सत्ता किम परिवार के पास ही रही.
इन दिनों इस देश की कमान किम परिवार की तीसरी पीढ़ी के हाथ में हैं.
दूसरी तरफ़ दक्षिण कोरिया ने इस दौरान तीन संविधान संशोधन पारित किए और सैन्य सत्ता को लोकतांत्रिक सरकार में बदल दिया. यहां अब तक कुल 12 राष्ट्रपति सत्ता में रहे.

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मोबाइल फ़ोन ग्राहक
उत्तर कोरिया में सेल फ़ोन इस्तेमाल करने वालों की संख्या 30 लाख से कुछ ही ऊपर है. वहां की दो करोड़ 50 लाख की आबादी के हिसाब से 10 में से एक ही आदमी के पास मोबाइल है.
मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने वाले ज़्यादातर लोग राजधानी प्योंगयांग में ही रहते हैं.
दूसरी तरफ दक्षिण कोरिया में मोबाइल ग्राहकों की संख्या पांच करोड़ 10 लाख से ज़्यादा है.

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उत्तर कोरिया का इकलौता मोबाइल कम्युनिकेशन नेटवर्क 'कोरियो लिंक' है. उत्तर कोरिया में मोबाइल मार्केट सीमित है, मगर धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है.
कोरियो लिंक को मिस्र की टेलिकॉम कंपनी 'ओ रासकॉम' चलाती है. हालांकि 2015 में जब उत्तर कोरिया ने नई सरकारी न्यूज़ एजेंसी लॉन्च की थी, उसके बाद से कोरियो लिंक का बिज़नेस प्रभावित हुआ है.
उत्तर कोरिया के सेलफ़ोन ग्राहकों के आंकड़ों के साथ एक दिक़्क़त है. जॉन्स हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी के कोरिया-अमरीका इंस्टिट्यूट की तरफ़ से जारी डेटा के मुताबिक उत्तर कोरिया में नई मोबाइल सर्विस लेने का खर्च कॉल करने पर होने वाले खर्च से कम है.
इसमें यह भी बताया गया है कि उत्तर कोरिया में मोबाइल फ़ोन ग्राहकों की संख्या और वास्तव में फ़ोन इस्तेमाल करने वालों की संख्या में बहुत फ़र्क़ है.

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उत्तर कोरिया में इंटरनेट का इस्तेमाल भी बहुत सीमित होता है. उत्तर कोरिया में 2016 में सिर्फ़ 28 डोमेन रजिस्टर हुए हैं.
उत्तर कोरिया 'चाइना यूनिकॉम' की तरफ़ से दिया जाने वाला इकलौता इंटरनेट कनेक्शन इस्तेमाल करता है. हालांकि ऐसी भी ख़बरें हैं कि रूस की सरकारी टेलिकॉम कंपनी ने 'ट्रांस टेलिकॉम' ने भी उत्तर कोरिया में एंट्री की है.
लोगों का कद
ऐसे भी आंकड़े हैं कि उत्तर कोरिया के लोग दक्षिण कोरिया के लोगों से लंबे होते हैं.
साउथ-ईस्ट एशियन एकेमडी ऑफ़ सुंगक्युनक्वॉन यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर डेनियल स्वेकेनडिक ने दक्षिण कोरिया में रह रहे शरणार्थियों का कद मापा. इसमें उत्तर कोरिया के लोग दक्षिण कोरिया के लोगों के मुक़ाबले तीन से आठ सेंटीमीटर लंबे पाए गए.

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प्रोफ़ेसर सुवेकेनडिक कहते हैं कि ऐसा जीन्स की वजह से नहीं हो सकता, क्योंकि उत्तर और दक्षिण कोरिया के लोग एक जैसे ही हैं.
वे इस बात से को सही नहीं मानते कि उत्तर कोरियाई शरणार्थी कुपोषित हैं और उनका कद कम है.
सड़कों की स्थिति
तस्वीरों में प्योंगयांग में बहुत चौड़ी और शानदार सड़के नज़र आती हैं. मगर प्योंगयांग से निकलते ही हालात जुदा हो जाते हैं.
2006 के डेटा के मुताबिक उत्तर कोरिया में कुल 22,554 किलोमीटर सड़कें हैं. इनमें केवल 724 किलोमीटर (3 फ़ीसदी) ही पक्की हैं, बाकी सड़कें कच्ची है.
प्योंगयांग में बस पकड़ने के लिए खड़े लोगों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं.

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कोयले का निर्यात
कोयले के निर्यात की उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ी हिस्सेदारी है. हालांकि वह कितना कोयला निर्यात करता है, इसकी सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है.
सिर्फ़ आयात करने वाले देशों के आंकड़ों से ही उत्तर कोरिया के निर्यात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है.
उत्तर कोरिया कोयले का सबसे ज्यादा निर्यात चीन को करता है. फ़रवरी में संयुक्त राष्ट्र ने उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगाए थे, जिनमें उत्तर कोरिया से खनिजों के आयात पर रोक लगाई गई थी. मगर जानकार इन प्रतिबंधों की कामयाबी को लेकर संदेह करते हैं.
पीटरसन इंस्टिट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स के विशेषज्ञ केंट बॉयडस्टोन बताते हैं, "प्रतिबंधों के बाद चीन और कोरिया के बीच कोयले का व्यापार प्रभावित तो हुआ है, मगर पूरी तरह बंद नहीं हुआ है."

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1973 तक उत्तर कोरिया का आर्थिक स्तर दक्षिण कोरिया जैसा ही था, मगर इसके बाद दक्षिण कोरिया ने तेज़ी से ग्रोथ की और आज वैश्विक आर्थिक शक्ति बन गया है.
दूसरी तरफ़ उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था सरकारी की नीतियों की नाकामी की वजह 1980 के बाद गिरी है.
सैन्य शक्ति
उत्तर कोरिया दुनिया का 52वां सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश है, मगर मिलिटरी पावर के मामले में यह दुनिया में चौथे नंबर पर है.
उत्तर कोरिया अपनी जीडीपी का बड़ा हिस्सा सेना पर खर्च करता है. यह जीडीपी के 25 फ़ीसदी को सैन्य शक्ति बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करता है. सभी उत्तर कोरियाई लोग मिलिटरी ट्रेनिंग भी लेते हैं.

1990 में बाढ़ और सूखे की वजह से उत्तर कोरिया को खाने की कमी का सामना करना पड़ा. इससे उत्तर कोरिया में औसत जीवन प्रत्याशा भी प्रभावित हुई है.
दक्षिण कोरिया के मुकाबले उत्तर कोरिया में लोगों की उम्र 10 साल कम है. खाने की कमी का इसमें बड़ी भूमिका है.
दूसरी तरफ़ दक्षिण कोरिया में प्रजनन दर बहुत कम है. 2017 में यहां की प्रजनन दर 1.17 है, जो पिछले साल से 0.07 कम है.
इसीलिए कोरियाई सरकार ने अपने नागरिकों को बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए 70 बिलियन डॉलर का बजट रखा है.
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