यूक्रेनी सैनिकों ने जब रूसियों से कहा- ज़िंदा रहते अपने वतन लौट जाओ!

यूक्रेनी सैनिक
इमेज कैप्शन, यूक्रेनी सैनिक व्लैड
    • Author, क्वेंटिन सोमरविले
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, खारकीएव से

एक महीने पहले जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आदेश पर क़रीब 2 लाख रूसी सैनिकों ने यूक्रेन पर आक्रमण किया, तो इस आक्रमण की पूरी ताक़त को महसूस करने वाले पहले शहरों में से एक था उत्तर-पूर्व का शहर ख़ारकीएव.

बीबीसी संवाददाता क्वेंटिन सोमरविले और कैमरामैन डैरेन कॉनवे ने रिपोर्टिंग के दौरान यूक्रेन के दो सैनिकों के साथ समय बिताया, जो शुरू से फ्रंटलाइन पर खड़े होकर युद्ध लड़ रहे थे.

ख़ारकीएव की कहानी दो सेनाओं की वो कहानी है, जिसमें एक सेना ने हार नहीं मानी और दूसरी सेना जीत पाने में नाकाम हो गई.

दो सैनिक: दोस्त की शादी और युद्ध की आहट

व्यापक उम्मीदों को धता बताते हुए कि यूक्रेन दृढ़ता से रूस के ख़िलाफ़ लड़ता रहा. माना जा रहा था कि रूस के हमले के आगे यूक्रेन लड़खड़ा जाएगा, लेकिन इसके इतर ख़ारकीएव में यूक्रेनी सेना के सुरक्षा कवच को तोड़ते हुए रूस लड़खड़ा गया और शहर को घेरने में कामयाब नहीं हो सका.

24 फ़रवरी की सुबह 5 बजे रूस ने यूक्रेन पर हमला किया. इससे एक रात पहले 22 साल के व्लैड और उनके दोस्त मार्क जिनकी उम्र भी 22 साल थी, दोनों अपने एक साथी की शादी में शामिल होने गए थे.

उसी वक़्त रूस के टैंक, तोप, बख़्तरबंद वाहन और सेना की गाड़ियां सीमा से केवल 40 किलोमीटर दूर आ चुकी थीं. रूसी सेना के सीमा पर लंबे वक़्त से तैनात होने के बाद भी जब रूस ने हमला किया तो ख़ारकीएव के लोगों के लिए ये हैरान करने वाला क़दम था. यूक्रेनी सैनिकों को तुरंत ख़ारकीएव की रक्षा के लिए तैनात कर दिया गया.

जब व्लैड और मार्क को हमले के बारे में पता चला, तो दोनों अपनी बटालियन- 22 मोटराइज़्ड इन्फ़ैंट्री- में वापस आ गए और सीमा की ओर चल दिए.

वे तब से सीमा पर तैनात हैं. मैं दो बार शहर के उत्तरी किनारे पर तैनात इन दोनों से मिलने गया हूं. कभी ख़ुशनुमा-सा दिखने वाला यह इलाक़ा अब लाशों और जले हुए रूसी टैंकों, वाहनों और कीचड़ से लदी रणभूमि बन चुका है.

वीडियो कैप्शन, रूस-यूक्रेन युद्ध: मलबे के नीचे से ज़िंदा निकला यूक्रेनी सैनिक

सामान्य जहां असामान्य हो गया है

यहां के नज़ारों से ज़्यादा डरावनी यहां से आने वाली आवाज़ें हैं, जो आपको भीतर तक झकझोर देती है. यहां लागातार हर तरह की रूसी तोपें और मिसाइलें दागी जा रही हैं.

यहां बमबारी जब थोड़ी देर के लिए रुकती है, तो सामान्य तौर पर जो शांति होती है वो अब असामान्य और परेशान करने वाली लगती है. यूक्रनी सेना अब इसी तरह के आतंक में जी रही है.

वहीं पास के एक कमांड पोस्ट की सभी खिड़कियाँ टूट चुकी है. टूटा हुआ फर्नीचर चारों ओर बिखरा हुआ है. एक मकान में बेल्ट वाली मशीनगन पड़ी हुई है. उसके पास में बच्चों की एक गाड़ी पड़ी हुई है. इन दोनों चीज़ों को एक साथ देखना बड़ी अजीब लगता है.

पास में एक और घर है जो खाली पड़ा है और उसके सामने 'घर बिक्री के लिए उपलब्ध है' वाला एक साइनबोर्ड लगा हुआ है. हाड़ कंपाने वाली सर्द हवा से वो अब पलट चुका है.

यूक्रेन सेना

'यूक्रेन में शांति के लिए लड़ रहे हैं'

यहां मैं जब व्लैड और मार्क से मिला तो उनसे पूछा कि वो आख़िर किस चीज़ के लिए लड़ रहे हैं?

व्लैड का उत्तर बेहद संक्षिप्त और सीधा था, "यूक्रेन में शांति के लिए."

मार्क ने व्लैड पर एक नज़र डाली और हंसते हुए कहा, "मेरा दोस्त कह रहा है यूक्रेन में शांति के लिए." इसके बाद उन्होंने कहा, "कौन जानता है? ये लोग हमारे देश में आए थे. यहां कोई उनका इंतज़ार नहीं कर रहा था, कोई उन्हें बुला नहीं रहा था."

हमले के पहले दिन रूसी सेना का एक समूह शहर के केंद्र में जा पहुंचा था. लेकिन तीन दिनों की ख़ूनी लड़ाई और दोनों पक्षों में बड़ी संख्या में सैनिकों के हताहत होने के बाद यूक्रेन की सेना ने रूसी सेना को ख़ारकीएव से केंद्र से हर की सीमा पर खदेड़ दिया.

एक महीने बाद अब भी रूसी मिसाइलें अभी भी शहर के केंद्र पर लगातार हमला कर रही हैं और शहर की 14 लाख आबादी का कम से कम आधा हिस्सा पलायन कर गया है.

शहर के पूर्वी और उत्तरी रिहायशी इलाक़े आज पहचानने लायक नहीं हैं. तीन हफ़्ते पहले जब मैं यहां पहुंचा था, उस वक्त ये काफी अलग दिखत थे.

यहां एक पेड़ की जड़ों के पास एक रूसी शेल पड़ा हुआ है, जो कभी भी फट सकता है. एक अपार्टमेंट की छत पर 500 किलो के बम रखे हुए हैं. यदि एक बम फटा तो ये पूरा अपार्टमेंट ढह जाएगा.

यूक्रेन सेना
इमेज कैप्शन, व्लैड

युद्ध के सैनिक परिवार से क्या बातें करते हैं?

मार्क और व्लैड युद्ध की इस स्याह भयावहता को परिवार से दूर रखते हैं. ये दोनों कुछ मिनट के लिए अपनी मां और गर्लफ़्रेंड को फोन करते हैं. इस कॉल में कितने लोग मरे, कितनी शेलिंग हुई, कितने साथी मारे गए तो इसका कोई ज़िक्र नहीं होता.

व्लैड कहते हैं, "मुख्य रूप से हम परिवार के साथ चर्चा करते हैं कि यह सब कब ख़त्म होगा, कब हम सामान्य जीवन दोबारा जीएंगे, कब सब अच्छा हो जाएगा और कब बाहर घूमना ख़तरनाक नहीं रह जाएगा."

जिस इमारत में व्लैड और मार्क रहते हैं, वहां जनरेटर से एक फ़ोन चार्ज करने वाला पावरबैंक चार्ज किया जा रहा है. जिस कमरे में वे सोते हैं वो गर्म और सुव्यवस्थित है.

एक बूढ़ा जर्मन शेफ़र्ड कुत्ता उनके साथ रहता है, जो आसपास के शोर और धमाकों से सदमे में है. वो मार्क, व्लैद या अन्य सैनिकों के साथ ही रहता है.

ये दोनों दोस्त ऐसी जगह रहते हैं, जो शायद हर दिन रूस की सेना के निशाने पर होता है. बीते कुछ सप्ताह से इन जैसे यूक्रेनी सैनिकों की यही ज़िंदगी है.

एक तरफ लगता है कि यूक्रेन के सैनिकों के लिए हालात भले ही मुश्किल भरे हैं, लेकिन वो जंग के लिए उत्साह से भरे हैं. वहीं दूसरी तरफ रूसी सैनिकों को देखकर ऐसा लगता है कि मानो वो कम समय के युद्ध के लिए ही तैयार थे.

यूक्रेन सेना

'जीते जी रूस वापस चले जाओ'

बर्फ़ में मैंने जिन रूसी सैनिकों की लाशें देखी, उन्हें देखकर ऐसा लगा कि वो सर्द मौसम के लिए तैयार नहीं थे. उनके शरीर पर बेहद मामूली कपड़े थे. यूक्रेन के सैनिकों का कहना है कि उनके पास राशन भी बेहद कम था.

व्लैड कहते हैं कि उनके पास रूसी सैनिकों के लिए एक संदेश है, "भागो जाओ! यहां या तो मैदान में रह जाओ या अपने घर लौट जाओ."

वो थोड़ा ठहरकर कहते हैं, "बच्चों को मत मारो, घरों और परिवारों को बर्बाद मत करो."

रूसी सेना के बारे में मार्क ने कहा, "ज़िंदा रहते हुए ही अपने घर वापस चले जाओ."

यूक्रेन की तुलना में रूस के पास अधिक आधुनिक हथियार हैं, जिनसे बच पाना बेहद मुश्किल है. यूक्रेनी सेना संख्या, प्रौद्योगिकी और वायुशक्ति के लिहाज़ से अभी भी काफ़ी पीछे है.

लेकिन सवाल यही है कि आख़िर यूक्रेन की सेना रूसी सेना को सफलतापूर्वक रोकने में कैसे सफल हो पा रही है?

वीडियो कैप्शन, COVER STORY: रूसी अल्टीमेटम के आगे डटा यूक्रेन

रूसी सेना की कश्मकश

लड़ाई के शुरूआत में यूक्रेन की सेना ने क्राइमिया पर 2014 में रूस के हमले से सीखे गए सबक़ का इस्तेमाल किया.

लवीव के माइकोलाइव में तैनात एक रूसी कमांडर का कथित इंटरसेप्टेड फ़ोन यूक्रेन के अधिकारियों ने जारी किया है. उन्होंने 11 मार्च को अपने वरिष्ठ अधिकारियों को ये कॉल किया था. हालांकि बीबीसी इसकी पुष्टि नहीं सर सकता.

लेकिन इस कॉल के ज़रिए आप रूस की कश्मकश और परेशानियों का अंदाज़ा लगा सकते हैं. रूसी सैनिकों के पास टेंट और बॉडी आर्मर जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी कमी है और वो सोने के लिए बर्फ़वाली जमीन में गड्ढे खोद रहे हैं.

दो हफ्त़े पहले, शहर के एक अग्रिम मोर्चे पर मैंने यूक्रेन के एक युवा कमांडर से पूछा कि क्या उनके लोग भी गड्ढों में सो रहे हैं?

वो एक घर की ओर इशारा करते हैं जो गर्म है और लोगों से भरा हुआ है और कहते हैं, "हमारे लोग गड्ढों में क्यों सोएंगे, जब हमारे पास घर है. इन गड्ढों में रूस के सैनिक सो रहे है."

उन्होंने बताया कि मारे गए रूसी सैनिकों के पास केवल बॉडी आर्मर (कवच) था, लेकिन कई के पास बख़्तरबंद प्लेटों की कमी थी जो जैकेट को प्रभावी बनाती है.

मार्क और व्लैड के पास साजोसमान पर्याप्त हैं. जैसे-जैसे हम अग्रिम मोर्चे की ओर बढ़ते गए, हमने पाया कि यूक्रेनी सैनिकों के पास चारों ओर गोलाबारूद और हथियार हैं. उनके पास राशन का ढेर लगा है और रसोई में काली केतली में चाय और कॉफ़ी बन रही है. उनकी ​गाड़ियों में सिगरेट भी बहुत से बिखरे मिले.

रेडियो पर जब ख़बर आई कि उनका एक साथी घायल हो गया है, तो वहां चंद मिनटों में एंबुलेंस पहुंच गई. घायल व्यक्ति को गर्म कंबल में लपेटा गया. उनके शरीर से ख़ून निकल रहा था, लेकिन वो तुरंत स्थिर हो गए.

उन्हें रूसी सेना का एक गोला लगा था, जिससे उनके एक हाथ की ज़्यादातर उंगलियां बर्बाद हो गई थी. कुछ घंटों बाद रेडियो पर ख़बर आई कि उनकी दशा ठीक थी और वे जख़्मों से उबर जाएंगे.

यूक्रेन सेना
इमेज कैप्शन, यूक्रेनी सेना का राशन

यूक्रेनी विद्रोहियों को घरेलू माहौल का लाभ मिल रहा है. वे हमें बिस्कुट और ताज़ा बने केक पेश करते हैं. लेकिव उनके दुश्मनों का नसीब ऐसा नहीं है. ऐसी रिपोर्टें मिली हैं कि रूसी सैनिक ख़ारकीएव के निकट ग्रामीणों से खाने-पीने का सामान लूट रहे हैं.

यूट्यूब पर एक वीडियो डाला गया है, जिसमें यूक्रेन के सैनिकों ने रूसी सेना का एक ट्रक पकड़ा है जिसमें रूसी सैनिकों के खाने-पीने के पैकेट दिख रहे हैं. इन पैकेटों में तैयार खाद्य सामग्रियां हैं.

वहीं जब मैं मार्क और व्लैड से पहली बार मिला, तो उनके कमांडर ने मुझे हरे रंग का एक पैकेट दिया, जिसमें यूक्रेनी सैनिकों के रोज़ का खाना था. उसमें 17 तरह के विभिन्न आइटम थे. जैसे गेहूं का दलिया, चावल, मीट का सूप, चिकन और सब्ज़ी, बीफ़, पोर्क, बिस्कुट, टी बैग, कॉफ़ी, शहद, चीनी, काली मिर्च, च्यूइंग गम, डार्क चॉकलेट, प्लास्टिक के चम्मच आदि.

यूक्रेन की दृढ़ता की एक वजह व्लादिमीर पुतिन खुद हैं. 2014 में, यूक्रेन की सेना बहुत बुरी दशा में थी. रूस की सेना से लड़कर भी वे क्राइमिया को बचा नहीं सके.

उस हार के कई कारण थे. जैसे उसके सैनिक भूखे थे, उसवक्त भ्रष्टाचार अधिक था, सेना के लिए प्रशिक्षण और हथियार दोनों अपर्याप्त थे.

उसी साल व्लैड और मार्क की ​बटालियन को दोबारा गठन किया गया. यूक्रेन की लगभग पूरी सेना का कायापलट किया गया, ताकि रूस के साथ आगे होने वाली लड़ाई के लिए सेना तैयार रह सके.

यूक्रेनी सेना

व्लैड और मार्क के अलावा पिछले तीन हफ़्तों के दौरान सीमा पर लड़ रहे जिस भी इंसान से मैं मिला, उन सब में एक बात आम थी. उन सभी ने पूर्वी डोनबास इलाक़े में लड़ाई में शिरकत की थी.

बताया जाता है पिछले 8 सालों से अलगाववादियों के प्रभुत्व वाले डोनबास इलाक़े के दोनेत्स्क और लुहान्स्क में यूक्रेनी सेना की परीक्षा हो रही है. 2014 से अब तक 2.5 लाख से 4 लाख यूक्रेनी सैनिक वहां अपनी ड्यूटी दे चुके हैं.

सीमा पर तैनात एक कमांडर ने मुझे बताया, "यूक्रेन 2014 में जैसा था अब वैसा नहीं रह गया है." ख़ारकीएव में लोगों ने यही बात मुझसे बार-बार कही.

कुछ साल पहले के मुक़ाबले यूक्रेन की सेना अब कहीं अधिक पेशेवर बन गई है और उनका एक साझा उद्देश्य है. यह सेना जानती थी कि रूस डोनबास या क्राइमिया तक ही नहीं रूकने वाली. इसलिए बीते सालों में उसने अपने आपको तैयार किया. कुल मिलाकर कहें तो यूक्रेनी सेना अब पहले की तरह कमज़ोर नहीं है.

यूक्रेन में रूस के 1.9 लाख सैनिकों को तैनात किया गया है. उनके अलावा चेचनिया और सीरिया में लड़ चुके लड़ाकों को भी यहां तैनात किए गया हैं. यूक्रेन की सेना की तादाद क़रीब एक लाख है, लेकिन कीएव का दावा है कि वो तेज़ी से अपनी क्षमता बढ़ा रहा है.

युद्ध शुरू होने के एक महीने बाद भी ख़ारकीएव और दूसरे मोर्चों पर तैनात यूक्रेनी सैनिकों का मनोबल मज़बूत है. मार्क ने मुझसे कहा, "हम अपने देश के लिए लड़ रहे हैं. लेकिन रूस के कथित स्वतंत्रता सेनानी आख़िर किस चीज़ के लिए लड़ रहे हैं?"

ख़ारकीएव के चारों ओर कई जगहों पर रूसी सैनिकों के शव पड़े हैं. वहीं यूक्रेन के सैनिकों के मरने पर उनके शव को तुरंत हटा लिया जाता है. हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है.

मारे गए रूसी सैनिकों के शवों को देखने से लगता है कि कई सैनिक मूलत: रूसी नहीं बल्कि वहां के दूसरे अल्पसंख्यक हैं. यूक्रेन के लोगों के लिए यह अच्छी चीज़ है. उनका दावा है कि इन रूसी सैनिकों का रूस से उतना लगाव नहीं होगा.

यूक्रेनी सैनिक
इमेज कैप्शन, अमेरिकी एंटी-टैंक मिसाइल थामे यूक्रेनी सैनिक

अमेरिका के विल्सन सेंटर नामक थिंकटैंक के कामिल गालीव ने रूसी सेना की हालत के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि सैनिकों को कम वेतन मिलता है और वे ज़्यादा उत्साहित नहीं होते. निश्चित तौर पर रूस की घटती प्रजनन दर को देखते हुए सैनिकों की भर्ती बहुत बड़ी समस्या है.

ख़ारकीएव में अब बर्फ़ पिघलने लगी है और ठंड कम होने लगी है. उत्तर में युद्ध के मोर्च पर चारों ओर कीचड़ ही कीचड़ हैं. इससे जूते और बूट तो कीचड़ से सन ही गए हैं, गाड़ियां भी उसमं फंस रही हैं. ऐसे में लड़ाई करना आसान नहीं रह गया है.

बदला हुआ ये मौसम रूस के लिए बड़ी परेशानी खड़ा रहा है. दो हफ़्ते पहले यहां का तापमान -13 डिग्री सेल्सियस था, जबकि अब यहां का तापमान 8 डिग्री सेल्सियस है. अपने देश के लिए लड़ने वाले यूक्रेनियों के लिए ये मौसम किसी वरदान से कम नहीं है.

वहीं एक सैनिक को पास के जंगलों में हलचल मालूम हुई तो उसने फायरिंग शुरू कर दी. उसके बदले में उधर से भी फायरिंग हुई. मार्क ने कहा, "हमें चलना होगा, क्योंकि हमारे पास पर्याप्त सुरक्षा नहीं है. वे 100 फ़ीसदी इसका जवाब देंगे."

और वैसा हुआ भी. कुछ ही मीटर दूर गोले गिरने लगे, जिससे धूएं का गुबार फैल गया. गोले हमारे इतने निकट गिर रहे थे कि हमारी टीम को पास की एक गाड़ी में छिपना पड़ा.

लेकिन मार्क और व्लैड को कोई फ़र्क नहीं पड़ा. वहां हर किसी ने मुझे बताया कि पहले तीन दिन सबसे बुरे थे. टीम के कमांडर ने बताया कि अब उनके लिए युध थोड़ा आसान हो गया है. जब गोलीबारी हो रही थी तब उन्होंने तनिक भी ब्रेक नहीं लिया.

यूक्रेन के राष्ट्र गान में ये पंक्तियां शामिल हैं:

हमारे दुश्मन ख़त्म हों,

वैसे जैसे धूप में ओस.

हम भी राज करेंगे

अपने प्यारे देश में.

रूह और देह को सौंप देंगे

अपनी आज़ादी के लिए.

पहले से ख़बर है कि कीएव के उत्तर में, रूसी सेना शायद अपने डिफ़ेंसिव पोज़िशन बना रही हैं. कुछ जानकार मानते हैं कि रूस आगे युद्ध में परमाणु और रासायनिक हथियारों और उन्नत पारंपरिक हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है. वे पहले ग्रोज़नी और सीरिया में ऐसा कर भी चुके हैं.

लड़ाई शुरू होने के एक महीने बाद यूक्रेन की सेना इस बात से ख़ुश हैं कि उन्होंने लोगों की उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया है. जैसे जैसे एक हफ़्ता बीत रहा है, उनका भरोसा बढ़ रहा है कि वे आज़ाद रह पाएंगे.

रूस कहीं नहीं जा रहा है और न ही मार्क और व्लैड, और न ही वे दर्जनों यूक्रेनी सैनिक जिनसे मैं मिला. इन सबका कहना है कि वे इस लड़ाई को आख़िर तक लड़ेंगे.

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