रूस ने यूक्रेन पर दागी हाइपरसोनिक मिसाइल, क्या है दुनिया के लिए संदेश?

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    • Author, पॉल किर्बी
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

रूस के रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि रूस की सेना ने पश्चिमी यूक्रेन में हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल दागी है, जिसने यूक्रेन के बड़े भूमिगत हथियार डिपो को नष्ट कर दिया.

ये पहली बार है जब रूस किसी युद्ध में इन मिसाइलों का उपयोग कर रहा है, जिसे किंज़ल बैलेस्टिक मिसाइल के नाम से जाना जाता है. इन मिसाइलों को संभवतः मिग-31 की मदद से दागा गया है.

रूसी अधिकारियों का दावा है कि ये हाइपरसोनिक मिसाइल जिसे 'किंज़ल' के नाम से जाना जाता है, वह 6,000 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक की रफ़्तार से 2,000 किलोमीटर दूर तक लक्ष्य को मार सकने में सक्षम है.

कितना असरदार है हाइपरसोनिक मिसाइल

रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन बार-बार हाइपरसोनिक मिसाइलों पर रूस के दांव का ज़िक्र करते रहे हैं, जिनकी रफ़्तार ध्वनि की गति से भी पांच गुना तेज़ है. ये रॉकेट 8 मीटर लंबे हैं और उच्च गतिशीलता से लैस हैं.

लेकिन सवाल यह है कि क्या ये अन्य पारंपरिक मिसाइलों और तोपों से ज्यादा ख़तरनाक है?

कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के परमाणु नीति विशेषज्ञ जेम्स एक्टन कहते हैं, "मैं इसे उतना महत्वपूर्ण नहीं मानता. मुझे नहीं पता कि हाइपरसोनिक मिसाइलों के इस्तेमाल से रूस को कितना फायदा होगा."

राष्ट्रपति पुतिन ने पिछले दिसंबर में दावा किया था कि रूस हाइपरसोनिक मिसाइलों में वर्ल्ड लीडर है, उसके पास ऐसे मिसाइल हैं जिन्हें ट्रैक करना मुश्किल है, क्योंकि वे उड़ान के बीच में दिशा बदल सकते हैं.

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डॉक्टर लॉरा ग्रेगो मैसेचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में रिसर्च फैलो हैं.

वो कहती हैं कि सटीक निशाना लगाने और दुश्मन की नज़र से छिपने के लिए हवा में अपनी चाल नियंत्रित करना मिसाइल के लिए ज़रूरी है. आधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइल ऐसा करने में सक्षम होते हैं.

वो कहती हैं, "एरोडायनामिक फ़ोर्स का इस्तेमाल करते हुए ये अपना रास्ता बदल सकते हैं. इनका आकार ख़ास तरीक़े से डिज़ाइन किया जाता है ताकि ये वायुमंडल में बेहद तेज़ गति से जाते हुए भी नीचे-ऊपर या फिर दाएं-बाएं मुड़ सकें."

ये क़ाबिलियत उसे दुश्मन की नज़र से छिप कर हमला करने में मदद करती है. हालांकि लॉरा कहती है कि मिसाइल को ट्रैक करना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं.

लॉरा ग्रेगो कहती हैं, "ये मिसाइल केवल रोशनी रिफ्लेक्ट नहीं करते, बल्कि गर्मी भी पैदा करते हैं और सेन्सर्स इनका पता लगा सकते हैं. बैलिस्टिक मिसाइल का पता लगाने के लिए अमेरिका और रूस ने अंतरिक्ष में इंफ्रारेड सेन्सर वाला सैटेलाइट सिस्टम बनाया है.

गर्मी और रोशनी के कारण इंफ्रारेड सिस्टम इनके पूरे रास्ते का पता लगा सकता है. गिरने से पहले मिसाइल की गति धीमी हो जाती है. तब ये रडार पर भी दिख सकते हैं."

ज़्यूरिख में सेंटर फॉर सिक्योरिटी स्टडीज़ के डोमिनिका कुनेर्तोवा ने कहा, "यह एक सोचा समझा क़दम है. अगर हाइपरसोनिक मिसाइल उपयोग किया गया है, तो हमें उन्हें एक अलग संसाधन के रूप में देखना होगा, क्योंकि रूस के पास इन मिसाइलों की बड़ी संख्या नहीं है."

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यूक्रेन के बहाने पश्चिमी देशों को संदेश

चार साल पहले पुतिन ने किंज़ल को "अजेय" हथियारों की एक शृंखला के रूप में पेश किया था, उन्होंने कहा कि ये दुश्मन के रक्षा कवच को भेदने में सक्षम है. अन्य हाइपरसोनिक मिसाइलें ज़िरकोन और अवांगार्ड हैं, और ये भी तेज़ और बहुत अधिक रेंज के साथ आती हैं.

किंज़ल या तो एक पारंपरिक या परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. हाल की रिपोर्टों के अनुसार, मिग-31 लड़ाकू विमानों को कैलिनिनग्राद भेजा गया.

हालांकि ये साफ़ नहीं है कि किस जगह से यूक्रेन के हथियार डिपो पर हमला किया गया है.

कुनेर्तोवा कहते हैं, ''यह पश्चिम के लिए एक संकेत है, क्योंकि पुतिन इस बात से नाराज़ हैं कि पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को हथियार भेजने की हिम्मत की.''

जेम्स एक्टन के अनुसार, किंज़ल को लड़ाकू विमानों के लिए मॉडिफ़ाइड इस्कंदर मिसाइल माना जाता था. और रूस युद्ध की शुरुआत से ही इस्कंदर-एम मिसाइलों को ज़मीन से ही लॉन्चरों की मदद से दाग चुका है.

हालांकि इस्कंदर-एम की मारक क्षमता हवाई-लॉन्च की तुलना में बहुत कम है.

यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने इस सप्ताह कहा कि रूस ने युद्ध के पहले 20 दिनों के दौरान अपनी लगभग सभी इस्कंदर-एम मिसाइलों का इस्तेमाल कर दिया है.

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एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि रूसी बलों ने 24 फरवरी से अब तक 1,080 से अधिक मिसाइलें दागी हैं.

एक्टन ने बीबीसी से कहा, "यह एक चौंका देने वाली संख्या है और रूस के युद्ध को लेकर तैयार किए गए वॉर-स्टॉक का बड़ा हिस्सा है. रूसी हवाई हमलों में अनगाइडेड बमों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण ये काफ़ी हद तक संभव है कि उनके पास अब इसकी कमी हो रही हो.''

मारियुपोल पर ज़बरदस्त बमबारी

बीते तीन सप्ताह से यूक्रेन की सेना ने रूसी बलों को मारियुपोल शहर पर पूरी तरह क़ब्ज़ा करने से रोका हुआ है.

रूस ने मारियुपोल को तोपखानों, रॉकेट और मिसाइलों से भर दिया है. 90 फ़ीसदी शहर बर्बाद हो चुका है. इतना ही नहीं यहां बिजली, हीटिंग, ताज़ा पानी, खाना और स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरतों की आपूर्ति भी ठप कर दी गई है, जिसे मानवीय आपदा माना जा रहा है. रूस ने अब इसके लिए यूक्रेन पर आरोप लगाया है.

रूस का कहना था कि यूक्रेन ने सोमवार सुबह 5 बजे तक की समय-सीमा में समर्पण कर दे, लेकिन यूक्रेन ने ऐसा करने से इनकार कर दिया है.

अगर रूस मारियुपोल पर क़ब्ज़ा कर लेता है तो इसका युद्ध में शामिल दोनों देशों के मनोबल पर बड़ा असर पड़ेगा.

मारियुपोल में रूस की जीत के बाद क्रेमलिन अपनी जनता को सरकारी मीडिया के ज़रिए ये बता पाएगा कि रूस अपने लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

यूक्रेनियों के लिए, मारियुपोल का उनके हाथ से जाना बहुत बड़ा झटका होगा. इसका सैन्य और अर्थव्यवस्था से जुड़ा असर तो होगा ही, बल्कि उन पुरुषों और महिलाओं का भी हौसला टूटेगा, जो लंबे समय से इसकी रक्षा के लिए ज़मीन पर संघर्षरत हैं.

खेरसोन के बाद मारियुपोल पहला बड़ा यूक्रेनी शहर होगा, जिस पर रूस का क़ब्ज़ा होगा. मनोबल का यहां एक और पहलू है और वो ये कि यूक्रेन यहां किस हद तक रूस का सामना कर सकेगा.

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