पाकिस्तान में लोग ईरान से 'चोरी- छिपे' आए खाने का तेल क्यों इस्तेमाल करते हैं

- Author, सहर बलोच
- पदनाम, बीबीसी उर्दू डॉट कॉम, ग्वादर
"यह ग़रीब तबक़े का कुकिंग ऑयल है. ईरान इस कुकिंग ऑयल (खाद्य तेल) की अपने देश से बाहर तस्करी होने से रोकता रहा है, लेकिन यह अवैध रास्तों से पाकिस्तान पहुंच जाता है. इस समय इस तेल की काफ़ी मांग है, क्योंकि पाकिस्तान में खाना बनाने के तेल के दाम बढ़ गए हैं, तो इससे बहुत से लोगों को फ़ायदा हो जाता है."
यह कहना है ग्वादर के रहने वाले नासिर रहीम सोहराबी का, जो ख़ुद भी ईरानी सामान का इस्तेमाल करते रहे हैं और उसकी ख़रीद और बिक्री पर भी नज़र रखते हैं.
ग्वादर के तटों पर अक्सर बड़ी संख्या में मछुआरे मछली पकड़ने के लिए जाते हैं. लेकिन इस बार इन नावों के अलावा यहां कुछ ऐसी नावें भी खड़ी थीं जिनमें पीले रंग के डिब्बे अलग से दिखाई दे रहे थे. और कई लोग इन्हें उतारते हुए नज़र आए.
स्थानीय निर्माता भी सरकार को इस कुकिंग ऑयल के बारे में चेताते हुए यह कह चुके हैं कि यह निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करता है और इसका उपयोग जनता के लिए ख़तरनाक साबित हो सकता है.
हालांकि, इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने तक सरकार की ओर से इस संबंध में कोई ख़ास प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है.

ईरान वाला तेल सस्ता
पूछताछ करने पर पता चला कि यह कुकिंग ऑयल यानी खाना पकाने का तेल है जिसकी तस्करी ईरानी सीमा और पाकिस्तान के समुद्र के रास्ते अवैध रूप से की जा रही है.
और फिर इसे सड़क मार्ग से पाकिस्तान के दूसरे शहरों, ख़ास तौर से कराची पहुंचाया जाता है. मछुआरों का कहना है कि एक कैन में 20 लीटर खाना पकाने का तेल होता है. उनका दावा है कि हर दिन 2 हज़ार लीटर कुकिंग ऑयल ग्वादर से बलूचिस्तान के शहरों और कराची के लिए जाता है.
ईरानी सीमा से पाकिस्तान में खाद्य पदार्थों का आना कोई नई बात नहीं है. लेकिन, इस साल डॉलर के मुक़ाबले रुपये की क़ीमत में तेज़ी से आने वाली गिरावट की वजह से देश में खाना पकाने के तेल की क़ीमत बढ़ी हैं और इसी वजह से तस्करी होने वाले कुकिंग ऑयल की मांग में वृद्धि हुई है.
इसका एक कारण देश में उपलब्ध कुकिंग ऑयल की तुलना में इसकी क़ीमतों में भारी कमी होना भी है.
कराची में फ़ेडरेशन ऑफ़ पाकिस्तान चैंबर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के उपाध्यक्ष नासिर ख़ान के मुताबिक़ 'कराची में फ़िलहाल कुकिंग ऑयल की क़ीमत 300 रुपये प्रति लीटर है, जो दुकानों में 350-450 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है.
लेकिन ईरान से ग्वादर के रास्ते आने वाले कुकिंग ऑयल की क़ीमत 191 रुपये प्रति लीटर है. जिसके कारण बाज़ार में इसकी काफ़ी मांग है.
ये भी पढ़ें -

ईरानी कुकिंग ऑयल पाकिस्तान कैसे पहुंचता है?
इस बारे में एफ़पीसीसीआई के नासिर ख़ान बताते हैं कि यह सिलसिला पिछले 40 साल से चल रहा है, जिसकी शुरुआत ईरान से हुई है.
'ईरान अपने लोगों को रियायती दर पर खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराता है. वहां से यह ईरान के रास्ते पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान पहुंचते हैं. इन पदार्थों का अवैध तरीक़े से आने का मुख्य कारण वैश्विक बाज़ार में क़ीमतों में होने वाली वृद्धि है. और जब तक क़ीमतें बढ़ती रहती हैं, ये सामान पाकिस्तान में आते रहते हैं.'
उन्होंने कहा कि फ़िलहाल यह तेल ईरान की सीमा से नाव और ज़मीनी रास्तों से पाकिस्तान आता है. जबकि ग्वादर के एक व्यापारी ने दावा किया है कि 'ईरान से पाकिस्तान लाते समय सीमा पर इस कुकिंग ऑयल की एक कैन पर एक हज़ार रुपये वसूल किये जाते हैं. इससे आप अंदाज़ा लगा लें कि विभिन्न चेक पोस्टों पर एफ़सी, सेना, कोस्ट गार्ड और कस्टम वाले मौजूद होते हैं. एक हज़ार रुपए प्रति चेक पोस्ट के हिसाब से मामला कहां तक पहुंचता है?'
ये भी पढ़ें -

ईरान से आती है बिजली
बलूचिस्तान के केच, पंजगुर और ग्वादर जिलों को इस समय 75 प्रतिशत बिजली भी ईरान से मिलती है. लेकिन 40 साल से चल रहे इस पूरे सिलसिले को सरकार आधिकारिक स्तर पर क्यों स्वीकार नहीं कर रही है?
बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता के अनुसार, इस समय पाकिस्तान-ईरान सीमा पर विभिन्न स्तरों पर व्यापार को आधिकारिक स्तर पर एक बाज़ार के रूप में मान्यता दी जा रही है.
इस बारे में बलूचिस्तान सरकार के उद्योग और वाणिज्य सचिव हाफ़िज़ अब्दुल माजिद के अनुसार, 'इस समय हमारी कोशिश ये है कि वाशुक, चाघी, नोशकी, पंजगुर, तुर्बत और ग्वादर में बाड़ लगाने की वजह से जो मुश्किल पेश आई है उसमें किसी तरह से राहत दी जाए. इस साल अप्रैल में, दोनों देशों, ईरान और पाकिस्तान ने सीमा के दोनों ओर के लोगों को राहत उपलब्ध कराने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.'
लेकिन इन इलाक़ों में रहने वालों का कहना है कि जब तक बाक़ायदा तौर पर सीमा पर एक औपचारिक बाज़ार शुरू नहीं हो जाता, तब तक अवैध रास्तों से लोगों तक सामान पहुंचाने का सिलसिला चलता रहेगा.

ईरानी सीमा से आने वाले कुकिंग ऑयल को समुद्र के रस्ते ग्वादर तक पहुंचाने वाले एक स्थानीय निवासी ने बताया कि 'हमारी कमाई का ज़रिया यही है. यहां मछली पकड़ने और ईरानी समुद्री सीमा से सामान लाने के अलावा कोई दूसरा काम नहीं है.'
उन्होंने आगे कहा, कि 'सीमा पर बाज़ार बनाने की बात, मैं पिछले 40 साल से सुन रहा हूं. हमें इस बाज़ार से जो सामान अभी सस्ता मिलता है वह टैक्स के साथ महंगा मिलेगा. इसमें मेरे जैसे लोगों को क्या फ़ायदा होगा?'
एक समय में ईरान से आने वाले कुकिंग ऑयल ब्रांड्स में लादेन ऑयल और गुलनाज़ मशहूर थे. गुलनाज़ अभी भी बाज़ारों में आसानी से मिल जाता है, जबकि ग्वादर बाज़ार में इस कुकिंग ऑयल के एक लीटर से लेकर तीन लीटर तक के पैकेट उपलब्ध हैं.
अपनी बात को ख़त्म करते हुए, नासिर रहीम ने कहा, कि 'इस समय समस्या यह है कि एक तरफ़ इस कुकिंग ऑयल को बेचने से ग्वादर और बलूचिस्तान के सीमावर्ती इलाक़ों में घर चल जाते हैं. लेकिन आधिकारिक स्तर पर इसको स्वीकार करने से इस कारोबार का और विस्तार हो सकता है.
ये भी पढ़ें -

ईरानी कुकिंग ऑयल की मांग कहां है?
फ़िलहाल ईरानी कुकिंग ऑयल की सबसे ज़्यादा डिमांड कराची में है, जहां नासिर रहीम के मुताबिक़ इसका इस्तेमाल दो तरह से किया जाता है. 'यानी किराना स्टोर पर भी जा रहा है और होटलों में भी इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है. यह बलूचिस्तान के शहरों से होता हुआ हब तक पहुंचता है जहां से इसे बसों और सुज़ुकी वैन द्वारा कराची भेजा जाता है.'
कराची पहुंचते ही इस कुकिंग ऑयल को विभिन्न दुकानों पर बेचा जाता है. नासिर रहीम ने बताया कि 'इससे पहले इस कुकिंग ऑयल को सिर्फ़ कराची के ल्यारी और ग़रीब इलाक़ों की दुकानों पर ही भेजा जाता था. लेकिन इस बार यह फ़ैक्ट्रियों में भी जा रहा है जहां इसे प्लास्टिक के पैक में सील कर के कराची के सदर मार्केट में कम क़ीमत पर बेचा जाता है.
हाल ही में, देश में कुकिंग ऑयल बनाने वाले स्थानीय उत्पादकों ने सरकार को चेताया है कि सस्ते ईरानी खाद्य तेल की वजह से पाकिस्तान के कुकिंग ऑयल उद्योग को नुक़सान पहुंच रहा है.
पाकिस्तान वनस्पति मैन्युफ़ैक्चरर्स एसोसिएशन ने 17 दिसंबर को वित्त सलाहकार शौक़त तरेन को एक पत्र लिखा है जिसमें कहा गया है कि स्थानीय तेल पर टैक्स बढ़ने के कारण ईरानी कुकिंग तेल का बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है.
ध्यान रहे कि इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने तक सरकार की ओर से इस संबंध में कोई ख़ास प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है. और न ही पाकिस्तानी बाज़ार में ईरानी तेल की प्रचुरता पर कोई ख़ास प्रभाव पड़ा है.
स्थानीय उत्पादकों का दावा है कि ईरानी तेल पाकिस्तान स्टैंडर्ड क्वालिटी कंट्रोल अथॉरिटी द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करता है, इसलिए इसका उपयोग लोगों के लिए ख़तरनाक साबित हो सकता है.
ये भी पढ़ें -
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

















