ईरान से पाकिस्तानः कैसे होती है पेट्रोल की तस्करी और कितना है मुनाफ़ा

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- Author, अली क़दीमी
- पदनाम, बीबीसी फ़ारसी सेवा
आप सरहद पर रहते हों और पड़ोसी देश में एक लीटर पेट्रोल 5.5 रुपये (भारतीय मुद्रा) में मिले तो क्या-क्या हो सकता है.
रास्ते खुले हों तो आप गाड़ी लेकर सरहद पार कर सकते हैं. मुनाफाखोरी का लालच हो तो तस्करी का रास्ता आपको दावत देता हुआ लगेगा.
कुछ ऐसा ही आजकल ईरान के सीस्तान और पाकिस्तान के बलूचिस्तान सूबे के सरवान शहर में हो रहा है.
ईरान से तस्करी के रास्ते पाकिस्तान जाने वाला तेल इन दिनों सरवान से ही होकर गुजरता है.
सीस्तान और बलूचिस्तान सूबे के इस शहर में ईरान की बॉर्डर फोर्स अक्सर तस्करों को खदेड़ने के लिए गोलियां चलाती है.
लेकिन तस्करी का सिलसिला तेल की धार की तरह की बदस्तूर जारी है. इसकी एक वजह डॉलर की क़ीमत में उछाल भी है.
सरवान शहर के लोग कहते हैं कि बेरोज़गारी और ग़रीबी ने यहां रहने वाले लोगों के लिए तस्करी के अलावा और कोई रास्ता ही नहीं छोड़ा है.

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वेनेज़ुएला के बाद सबसे सस्ता तेल
आज कल ईरान वेनेज़ुएला के बाद सबसे अधिक सस्ता तेल बेच रहा है.
एक लीटर पेट्रोल या गैसोलिन की क़ीमत (खुले बाज़ार में डॉलर की क़ीमत के हिसाब से, जहां आज एक डॉलर ईरान के 14000 तुमान के बराबर है) 10 सेंट से भी कम है.
आंकडे बताते हैं कि ईरान में 1.5 डॉलर में खरीदा गया 20 लीटर पेट्रोल पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में 14 डॉलर, इराक़ में 11 डॉलर, और तुर्की में 21 डॉलर में बिक जाता है.

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आप मुनाफे का अंदाजा ही लगा सकते हैं. हालांकि इसमें चोरी-छुपे खरीदने में तस्करों को होने वाला खर्चा, दलालों का हिस्सा और लाने-ले जाने की लागत भी शामिल है.
अगर ईरान में एक डॉलर की अधिकारिक क़ीमत (4200 तुमान) से इसकी तुलना करें तब भी एक लीटर पेट्रोल की क़ीमत 20 सेंट के बराबर होती है जो विश्व में सबसे सस्ता है.
यही कारण है कि ईरान से पड़ोसी देशों को पेट्रोल की तस्करी बड़े मुनाफ़े का कारोबार बन गया है.

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तस्कर पाकिस्तान में बेचते हैं माल
आम तौर पर ईरान के तेल तस्कर पाकिस्तान ही में अधिक अपना माल बेचते हैं.
पिछले हफ़्ते ईरान के सीस्तान और बलूचिस्तान के अधिकारियों ने ये नोटिस किया था कि उनके सूबे में अचानक तेल की खपत बढ़ गई है और पेट्रोल के पंपों पर असाधारण भीड़ देखी गई.
इसी तरह कुछ रोज़ पहले सुरक्षा अधिकारियों को ज़ाहिदान के इलाके में कुछ ऐसे अंडरग्राउंड तेल के कुएं मिले जिससे तस्कर तेल निकाल रहे थे.
इन कुओं में लगभग 23 हज़ार लीटर तेल का ज़ख़ीरा है.
ऐसी ही ख़बरें इराक़ और तुर्की से लगे ईरान के पश्चमी सीमावर्ती क्षेत्रों से भी मिलीं जहां तेल की खपत अचानक बढ़ गई है.
पिछले दिनों ईरान के दक्षिणी क्षेत्रों में भी तेल से भरे कुछ टैंकर पकड़े गए हैं.

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मुनाफ़े का कारोबार
ईरान से तेल की तस्करी की ख़बर कोई नई बात नहीं है.
साल 1979 से ही जब ईरान में क्रांति शुरू भी नहीं हुई थी, तेल की तस्करी की ख़बरें आने लगीं थीं.
ईरान में तेल की क़ीमत बहुत ही कम रही है, क्यों यहां की सरकार अपने लोगों को रियायती दरों पर पेट्रोल मुहैया कराती है.
ऐसे में तस्करों को ईरानी तेल काफ़ी आकर्षित करता है जो मुनाफ़े का कारोबार भी है.
ईरान सरकार की नीतियों के कारण जब मुल्क की मुद्रा की क़ीमत घटने लगी तो इसने भी तेल तस्करी को बढ़ावा दिया.
ईरान की अर्थव्यवस्था
बीते सालों में सरकार ने तेल सब्सिडी कम करने की कोशिश भी की है ताकि तेल को उसकी वास्तविक क़ीमत पर ही बेचा जाए और उससे सरकार के ख़ज़ाने में भी कुछ आमदनी बढ़े.
सिलसिलेवार तरीके से तेल से सब्सिडी हटाना सरकार के अहम फ़ैसलों में शुमार किया जाता है.
लेकिन ईरानी करेंसी में गिरावट, घरेलू वजहों, अर्थव्यवस्था की चिंताएं और तेल की लगातार बढ़ती क़ीमतों ने आज ईरान को आज ऐसे हालात में लाकर खड़ा किया है कि आज ये अशांत देश वेनेज़ुएला के बाद सबसे अधिक सस्ता तेल बेचने वाला देश बन गया है.
और तेल सब्सिडी हटाने की ईरान की कोशिश पूरी तरह से नाकाम हो चुकी है.

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