किम जोंग उन के शासन के 10 साल, कहां खड़ा है उत्तर कोरिया?

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- Author, श्रेयस रेड्डी
- पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन 17 दिसंबर को सत्ता में एक दशक पूरा कर रहे हैं. इसी दिन उनके पिता किम जोंग इल का निधन भी हुआ था.
किम जोंग उन उत्तर कोरिया के पवित्र 'पाएक्तू पर्वत रक्तवंश' के सदस्य हैं. कोरियाई प्रायद्वीप के सबसे ऊंचे पर्वत के नाम पर रखे गए इस पद का इस्तेमाल उत्तर कोरिया के सत्ताधारी वंश के लिए किया जाता है. उत्तर कोरिया इस समय किम जोंग उन के मज़बूत नियंत्रण में है.
हालांकि किम जोंग उन अपने पिता किम जोंग इल और दादा किम इल सुंग के साये में रहे हैं.जब वो सत्ता में आए थे तो कई विश्लेषकों ने आशंका ज़ाहिर की थी कि ये किम वंश का अंत भी हो सकता है क्योंकि उन्हें अनुभव नहीं था.
लेकिन अब एक दशक बाद किम जोंग उन ने आशंकाओं को ख़ारिज कर दिया है और अपना ऐसा व्यक्तित्व गढ़ लिया है जिसकी तुलना उनके पूर्ववर्ती शासकों से की जा सकती है.
सत्ता और देश पर उनकी पकड़ मज़बूत हो रही है. हालांकि उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां भी हैं. अपनी विरासत को और मज़बूत करने के लिए किम जोंग उन को इन चुनौतियों से निबटना होगा.
किम जोंग उन का उत्कर्ष

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अपने पिता की मौत के बाद जब किम जोंग उन देश के नेता बने थे तब उनके पास बहुत अधिक राजनीतिक अनुभव नहीं था. अंतरराष्ट्रीय जगत में आशंकाएं ज़ाहिर की जा रही थीं कि किम का शासन जल्द ही समाप्त हो सकता है.
किम जोंग इल की मौत से एक महीने पहले रूस के एक थिंक टैंक इंस्टीट्यूट ऑफ़ वर्ल्ड इकोनॉमी एंड रिलेसंश ने आशंका ज़ाहिर की थी कि सत्ता हस्तांतरण से उत्तर कोरिया की व्यवस्था ढह सकती है और प्रशासनिक अधिकारियों और सैन्य अधिकारियों के बीच सत्ता संघर्ष हो सकता है. इस थिंक टैंक ने यहां तक कह दिया था कि राजनीतिक पतन के बाद उत्तर कोरिया अंततः दक्षिण कोरिया के नियंत्रण में आ सकता है.
वहीं विश्लेषकों ने राय ज़ाहिर की थी कि स्विट्ज़रलैंड में शिक्षा हासिल करने वाले और अमेरिकी बास्केटबॉल के प्रशंसक किम जोंग उन उत्तर कोरिया में उदारवादी सुधार लाएंगे और देश को दुनिया के लिए खोल देंगे.
दिसंबर 2011 में सोल स्थित इंडस्ट्रियल बैंक ऑफ़ कोरिया के शोधकर्ता चो बोंग-ह्यून ने दक्षिण कोरिया की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी योनहैप से कहा था, "जब वो विदेश में पढ़ रहे थे तब उन्होंने उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में रूचि ज़रूर विकसित की होगी."
शुरुआत में ऐसा लगा कि किम अपने पिता के नक़्शे-क़दम पर चल रहे हैं. वो सैन्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करने जाते थे. नागरिकों से संवाद उनकी प्राथमिकता में रहता है. उनके इर्द-गिर्द रहने वाले अहम लोगों का प्रभाव भी दिखाई देता था.
हालांकि समय के साथ इस युवा नेता ने सत्ता को अपने हाथ में लेना शुरू किया, उनके गिर्द-गिर्द के लोग बदलते गए और उनका ध्यान भी दूसरे मुद्दों पर जाने लगा.

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ये 2013 में तब और अधिक स्पष्ट हो गया जब उन्होंने अपने चाचा जांग सोंग थाएक को मरवा दिया. वो उनके पिता के क़रीबी सलाहकार थे और उन्हें उत्तर कोरिया की आर्थिक नीतियों का शिल्पकार भी माना जाता था.
इसके बाद किम जोंग उन ने आर्थिक क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाओं का निरीक्षण करने पर अधिक समय ख़र्च किया और उत्तर कोरिया के परमाणु मिसाइल कार्यक्रम को बढ़ावा दिया.
उन्होंने आर्थिक विकास और परमाणु हथियारों के विकास पर जोर दिया और अपनी नई नीति 'ब्योंगजिन' दुनिया के सामने पेश की जिसके अंतर्गत उत्तर कोरिया ने दोनों गतिविधियों को साथ-साथ आगे बढ़ाया.
उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था ने साल 201-16 के दौरान प्रगति देखी. यही नहीं 'ब्योंगजिंग' के तहत उत्तर कोरिया ने साल 2016-17 में कई मिसाइल और परमाणु परीक्षण भी किए.
इन परीक्षणों के बाद अंतरराष्ट्रीय जगत ने उत्तर कोरिया की आलोचना की, कई तरह के सख़्त प्रतिबंध लगा दिए गए जिससे उसकी अर्थव्यवस्था की प्रगति रुक गई.
इन नई परिस्थितियों में सभी को चौंकाते हुए किम-जोंग उन ने कूटनीति पर ध्यान केंद्रित किया. किम जोंग उन ने 2018-19 में अमेरिका, दक्षिण कोरिया, चीन और रूस के अलावा कई देशों के नेताओं से वार्ता की.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से मुलाक़ात और वार्ता करके किम जोंग उन ने अपने आप को अपने पिता और दादा से अलग भी कर लिया. उन्होंने कभी भी अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाक़ात नहीं की थी.
उत्तर कोरिया को उम्मीद थी कि इन सम्मेलनों से उसे प्रतिबंधों से कुछ राहत मिलेगी, लेकिन ऐसा हो नहीं सका और साल 2019 में उत्तर कोरिया ने फिर से हथियारों के परीक्षण शुरू कर दिए.
हालांकि इसके बाद से फिर से वार्ता की उम्मीदों को झटका लगा है क्योंकि उत्तर कोरिया फिर से अपने सख़्त रवैये पर लौट चुका है. कोविड महामारी ने भी समीकरणों और हालात को प्रभावित किया है. जनवरी 2020 के बाद से देश की सीमाएं बंद हैं.
अपने पिता और दादा के साये से निकलना

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अपने कार्यकाल के अधिकतर समय किम जोंग उन ने ऐसी व्यवस्था में काम किया जिसका निर्माण उनके पूर्ववर्ती नेताओं ने किया था.
शुरुआती सालों में इसके कारण भी समझ में आते हैं क्योंकि उन्हें उत्तर कोरिया के सत्ता के गलियारों का बहुत अनुभव भी नहीं था. उनके पिता किम जोंग इल को दशकों तक सत्ता के क़रीब रहने के बाद पद मिला था. लेकिन किम जोंग उन ने तो 2009 से ही अनुभव लेना शुरू किया था.
किम जोंग उन ने धीरे-धीरे अपना नेतृत्व मज़बूत किया. उन्होंने कोरिया की सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी में पद लिया, फिर सेना और प्रशासनिक संस्थानों में अपनी जगह बनाई और फिर वो 2019 में देश के आधिकारिक नेता बन गए.
वो अब भले ही उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता हों लेकिन वो अब भी अपने पिता और दादा से पीछे ही हैं. उनके पिता और दादा काेजन्मदिवस और पुण्यतिथि पर उत्तर कोरिया में अवकाश होता है, लेकिन उनके जन्मदिन पर छुट्टी नहीं होती है. माना जाता है कि उनका जन्म 8 जनवरी को हुआ था. उत्तर कोरिया के लोगों को अभी उनके जन्मदिन के बारे में पता भी नहीं है.
दक्षिण कोरिया के सार्वजनिक प्रसारक केबीएस को प्राप्त उत्तर कोरिया के अधिकारिक कैलेंडर के मुताबिक ये ट्रेंड 2022 में भी जारी रहेगा क्योंकि इस कैलेंडर में भी उनका जन्मदिन अंकित नहीं है.

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लेकिन इस साल ऐसे कई बदलाव हुए हैं जिनसे प्रतीत हो रहा है कि किम जोंग उन के ताक़त और प्रोफ़ाइल को बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं.
जनवरी में हुए आठवें पार्टी अधिवेशन में किम जोंग उन को वर्कर्स पार्टी का महासचिव घोषित किया गया है. ये पद इससे पहले उनके पिता के पास था जो अब 'शास्वत महासचिव' हैं.
राष्ट्र के मामलों के प्रमुख के तौर पर उनके पद का अंग्रेज़ी अनुवाद है 'स्टेट अफ़ेयर्स कमीशन- एसएसी' के प्रमुख. ये उत्तर कोरिया का शीर्ष प्रशासनिक पद है. पहले इसे चैयरमैन ऑफ़ द एसएसी कहा जाता था, अब इसके अनुवाद को 'प्रेसिडेंट ऑफ़ स्टेट अफ़ेयर्स' कर दिया गया है
हालांकि ये पदोन्नति नहीं है बल्कि सिर्फ़ अनुवाद का बदलाव ही है. देश के संस्थापक और देश के 'शास्वत राष्ट्रपति' किम इल सुंग अभी तक उत्तर कोरिया के इकलौते राष्ट्रपति हैं.
हालांकि इस बदलाव से ये तो स्पष्ट हो ही रहा है कि किम जोंग उन को पारंपरिक उत्तर कोरियाई राष्ट्र के नेता के तौर पर पेश किया जा रहा है.
वहीं दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय इंटेलिजेंस सेवा के मुताबिक किम जोंग उन अपनी विचारधारा और दर्शन का प्रचार किम इल सुंग और किम जोंग इल की तरह ही कर रहे हैं.

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अक्तूबर में संसद को दी गई ब्रीफ़िंग में ख़ुफ़िया एजेंसी ने बताया था कि अब उत्तर कोरिया में 'किम जोंग उन वाद' वाक्यांश का इस्तेमाल इसी तरह हो रहा है जिस तरह 'किम इल सुंग वाद' और 'किम जोंग इल वाद' का होता रहा है.
दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय के मुताबिक इससे पता चलता है कि किम जोंग उन ने अपना राजनीतिक क़द इतना बड़ा कर लिया है कि उनकी तुलना उनके पूर्ववर्ती नेताओं से की जा सकती है.
जिस तरह से उनके पिता और दादा का एक चमत्कारिक व्यक्तित्व था, हो सकता है कि किम जोंग उन का इतना बड़ा क़द बनने में अभी समय लगे क्योंकि अभी तक उनके जन्मदिन पर छुट्टी घोषित नहीं की गई है, लेकिन इतना तो स्पष्ट ही है कि किम जोंग उन ने अपनी क्षमता पर शक़ करने वालों को ग़लत साबित कर दिया है और वो अपनी ख़ुद की विरासत मज़बूत करते हुए आगे बढ़ रहे हैं.
एक दशक बाद कहां खड़ा है उत्तर कोरिया?

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किम जोंग सत्ता पर अपनी पकड़ मज़बूत कर रहे हैं और उत्तर कोरिया एक अहम पड़ाव पर खड़ा है.
अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, कोविड महामारी से जुड़ी जटिलताओं और प्राकृतिक आपदाओं ने उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया है.
जनवरी में हुए आठवें अधिवेशन के बाद से उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया में भी इस पर ज़ोर दिया जा रहा है.
सत्ताधारी पार्टी के अधिवेशन में किम जोंग उन ने स्वीकार किया कि देश साल 2016-20 के लिए निर्धारित आर्थिक लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सका है. उत्तर कोरिया में इस तरह की स्वीकारोक्ति दुर्लभ है. तब से ही सरकारी मीडिया अगली पंचवर्षीय जोयना 2021-26 के लक्ष्यों को हासिल करने के प्रयासों का प्रचार कर रहा है.
इन संकटों से उबरने के लिए अप्रैल में किम जोंग उन ने देश में हर स्तर के अधिकारियों से कहा कि इस मुश्किल समय से निकलने के लिए देश को एक साहसिक मार्च पर आगे बढ़ना है. ये उत्तर कोरिया में 1990 के दशक में आए सबसे गंभीर आर्थिक संकट को प्रतिबिंबित कर रहा था.
हो सकता है कि वो ख़तरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हों, लेकिन महामारी के दौरान कारोबार में आई गिरावट और खाद्य पदार्थों की उपलब्धता को लेकर बढ़ रही अनिश्चितता ने चिंता को बढ़ा दिया है. इस संकट के गंभीर होने से पहले इसका समाधान ज़रूरी है.
किम जोंग उन सत्ता में एक दशक पूरा कर रहे हैं. ये आंतरिक चुनौतियां उनकी सबसे बड़ी चिंता हैं, लेकिन सुरक्षा और कूटनीति अभी भी अहम बनी हुई हैं.
आर्थिक चुनौतियओं के बावजूद उत्तर कोरिया हथियार बना रहा है और आठवें अधिवेशन के दौरान किम जोंग उन ने कहा था कि अन्य हथियारों के निर्माण के साथ-साथ उत्तर कोरिया परमाणु हथियार भी बनाएगा.
आकांक्षाएं

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नज़दीकी भविष्य में किसी अंतरराष्ट्रीय मदद की संभावनाएं कम ही दिखती हैं क्योंकि उत्तर कोरिया की सीमाएं अभी भी बंद हैं, लेकिन हो सकता है कि आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने के लिए उत्तर कोरिया अपने सहयोगी देशों चीन और रूस से मदद मांगे.
दक्षिण कोरिया की मौजूदा सरकार को उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच फिर से वार्ता शुरू होगी. हालांकि दक्षिण कोरिया में अगले साल राष्ट्रपति चुनाव होने हैं और इससे इन उम्मीदों को झटका लग सकता है.
अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरह मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन हो सकता है कि उत्तर कोरिया से परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर मज़बूत भरोसा मिले बिना कोई वार्ता ना करें, हालांकि उनके प्रशासन ने ये स्पष्ट किया है कि वह उत्तर कोरिया के साथ बातचीत आगे बढ़ाने के लिए तैयार है.

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दिसंबर के अंत में उत्तर कोरिया की वर्कर्स पार्टी की बैठक होनी है. इसमें ये स्पष्ट हो जाएगा कि इस समय किम जोंग उन का ध्यान किन मुद्दों पर है. माना जा रहा है कि इस बैठक के दौरान वो नीतिगत प्राथमिकताओं को स्पष्ट करेंगे.
किम जोंग उन के सत्ता में दस साल पूरे करने के बाद ये पहली पार्टी बैठक होगी. उत्तर कोरिया पर नज़र रखने वालों की निगाहें इस बैठक पर टिकी रहेंगी.
ये भी स्पष्ट हो जाएगा कि क्या किम जोंग उन सत्ता पर अपनी पकड़ मज़बूत करते हुए अपने व्यक्तित्व में कुछ नए बदलावों का संकेत भी देंगे.
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