फ़ेसबुक ने माना- फ़ेशियल रिकोग्निशन अनुचित, बंद किया फ़ीचर

महिला

इमेज स्रोत, Getty Images

फ़ेसबुक ने घोषणा की है कि वो अब तस्वीरों और वीडियो में लोगों के चेहरों को पहचानने वाले फ़ेशियल रिकोग्निशन सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल नहीं करेगा.

इस तकनीक के सही या ग़लत होने को लेकर लगातार चिंताएं जताई जा रही थी और प्राइवेसी, नस्लभेदी पक्षपात और इसके सटीक होने को लेकर सवाल पूछे जा रहे थे.

हालाँकि, कंपनी का कहना है कि इस तकनीक की निगरानी करनेवाले नियामकों ने इसके इस्तेमाल को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट नियम नहीं बनाए हैं.

मगर इस तकनीक की वजह से इसके यूज़र्स पर पड़नेवाले असर को लेकर फ़ेसबुक की जमकर आलोचना हो रही थी.

अभी तक, इस ऐप पर यूज़र इस फ़ीचर को चुन सकते थे जिससे उनका चेहरा पहचाना जा सकता था और यदि कोई और फ़ेसबुक पर उनकी तस्वीरें पोस्ट करता तो उनके पास इसकी जानकारी पहुँच सकती थी.

कंपनी की आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस यूनिट में उपाध्यक्ष जेरोमी पेसेंटी ने एक ब्लॉग में लिखा है- "अभी जो अनिश्चितता का माहौल है, उसमें हमारा मानना है कि फ़ेशियल रिकोग्निशन का इस्तेमान अनुचित है."

वीडियो कैप्शन, COVER STORY: फ़ेसबुक पर लगे आरोप

लगातार विवादों में फ़ेसबुक

2019 में, अमेरिका सरकार के एक अध्ययन से ऐसा लगा कि ये तकनीक कॉकेशियन चेहरों की तुलना में अफ़्रीकी-अमेरिकी और एशियाई लोगों के चेहरों की वैसी सटीक पहचान नहीं हो पाती.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्टैंडर्ड्स एंड टेक्नोलॉजी संस्था की स्टडी में ये भी पाया गया कि अफ़्रीकी-अमेरिकी महिलाओं की स्थिति और बुरी थी.

पिछले वर्ष, फ़ेसबुक ने तस्वीरों की स्कैनिंग और टैगिंग को लेकर लंबे समय तक चले एक क़ानूनी विवाद का निपटारा किया था.

2015 से चल रहे इस मुक़दमे में ये सहमति हुई कि कंपनी इलिनॉय के कुछ यूज़र्स को 55 करोड़ डॉलर की राशि देगी जिन्होंने ये शिकायत की थी कि फ़ेशियल रिकोग्निशन फ़ीचर राज्य के प्राइवेसी क़ानूनों का उल्लंघन करते हैं.

उधर, अमेज़ॉन और माइक्रोसॉफ़्ट जैसी दूसरी टेक कंपनियाँ पुलिस को ये टेक्नोलॉजी बेचा करती थीं, मगर विवाद बढ़ता देख उन्होंने इसे स्थगित कर दिया है.

कैमरे

इमेज स्रोत, Getty Images

बदला नाम

दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया नेटवर्क कंपनी, जो इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप की भी मालिक है, उसे लगातार नियामकों और राजनेताओं के दबाव का सामना करना पड़ रहा है.

अमेरिका में फ़ेडरल ट्रेड कमीशन ने उसपर अपने प्रतियोगियों को लेकर ग़लत नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए मामला दायर किया है.

वीडियो कैप्शन, फ़ेसबुक: कंपनी का नाम बदलकर 'मेटा' रखने के मायने

पिछले महीने, कंपनी की एक पूर्व कर्मचारी ने भी कंपनी पर अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया था. फ़्रांसिस हॉगन ने कुछ दस्तावेज़ जारी किए थे और उनका कहना था कि इनसे पता चलता है कि कंपननी ने अपने फ़ायदे को यूज़र्स की सुरक्षा से ऊपर रखा.

कंपनी के मुख्य अधिकारी मार्क ज़करबर्ग ने इस आरोप पर कहा कि ये दावे कंपनी को लेकर एक ग़लत तस्वीर दिखाने के सुनियोजित प्रयासों का हिस्सा हैं.

फ़ेसबुक ने अपने ब्रांड को लेकर लगातार आ रही नकारात्मक रिपोर्टों के बाद हाल ही में अपनी पेरेंट कंपनी का नाम मेटा कर दिया है.

ज़करबर्ग ने कहा कि फ़ेसबुक नाम से "संभवतः वो सब नहीं दर्शाया जा पा रहा है जो वो आज करते हैं, और भविष्य की तो बात ही अलग है", इसलिए बदलाव ज़रूरी था.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)