अफ़ग़ानिस्तान: बगराम एयरबेस रातोरात छोड़ने पर बोला अमेरिका

इमेज स्रोत, Joe Raedle
अफ़ग़ानिस्तान के चर्चित और महत्वपूर्ण बगराम एयरबेस से रातोरात बिना बताए अपने सैनिकों के चले जाने की रिपोर्ट पर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है.
ये आरोप बगराम एयरबेस के नए कमांडर जनरल असदुल्लाह कोहिस्तानी ने लगाए थे.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जॉन एफ़ किर्बी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इन आरोपों से इनकार किया और कहा कि अमेरिका ने सब कुछ नेताओं और अधिकारियों को भरोसे में लेकर किया है और अमेरिका के इस क़दम के बारे में संबंधित अधिकारियों को जानकारी थी.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जॉन एफ़ किर्बी ने कहा, "मैं आपको ये बता सकता हूँ कि बगराम एयरबेस को सौंपे जाने के बारे में अफ़ग़ानिस्तान की सरकार और अफ़ग़ान सुरक्षा बलों के साथ हमारा समन्वय था. जैसा कि आप जानते हैं ये अफ़ग़ानिस्तान में हमारा सातवाँ और आख़िरी अड्डा था, जिसे हमने अफ़ग़ान सुरक्षा बलों को सौंप दिया. आप ये सब काम किसी ख़ालीपन में नहीं करते और न ही ऐसा किया गया है."
उन्होंने आगे बताया, "मैं आपको उस स्तर की जानकारी नहीं दे सकता, जो अफ़ग़ानिस्तान में नेताओं और अधिकारियों को दी गई थी. लेकिन मैं इतना ज़रूर कह सकता हूँ कि अफ़ग़ानिस्तान की सरकार, नागरिकों और सेना के साथ हमारा पर्याप्त समन्वय था. और उन्हें बगराम एयरबेस सौंपने के बारे में जानकारी दी गई थी. दरअसल, उस ब्रीफ़िंग में वरिष्ठ अफ़ग़ान अधिकारियों को एयरबेस का मुआयना भी कराना शामिल था."
दरअसल, बगराम एयरबेस के नए कमांडर जनरल असदुल्लाह कोहिस्तानी ने ये कहा था कि अमेरिकी सेना ने बगराम एयरबेस रात के अंधेरे में अफ़ग़ानिस्तान को बताए बिना छोड़ दिया.
उन्होंने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा कि अमेरिकी सैनिकों ने शुक्रवार तड़के तीन बजे बगराम एयरबेस छोड़ दिया. अफ़ग़ानिस्तान के सुरक्षा बलों को इसकी जानकारी कुछ घंटे बाद मिली.
बगराम में एक जेल भी है, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वहाँ 5,000 तालिबानी क़ैद हैं.
चिंता

इमेज स्रोत, Robert Nickelsberg
तालिबान के साथ समझौते के बाद अमेरिकी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान छोड़कर जा रहे हैं. लेकिन इसे लेकर चिंता इसलिए व्यक्त की जा रही है क्योंकि ऐसी रिपोर्टें हैं कि तालिबान बहुत तेज़ी से एक-एक करके इलाक़ों को अपने नियंत्रण में ले रहा है.
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस साल की शुरुआत में कह दिया था कि 11 सितंबर से पहले वो अमेरिकी सेनाओं को अफ़ग़ानिस्तान से वापस बुला लेंगे.
इस बीच तालिबान ने कहा है कि नेटो की सितंबर में वापसी की मियाद ख़त्म होने के बाद, अफ़ग़ानिस्तान में एक भी विदेशी सैनिक की मौजूदगी को 'क़ब्ज़ा' माना जाएगा.
ये बयान राजनयिक मिशनों और काबुल के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की सुरक्षा के लिए, क़रीब 1,000 अमेरिकी सैनिकों के अफ़ग़ानिस्तान में ही बने रहने की ख़बरों के बाद आया है.
तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा था कि काबुल पर सैन्य रूप से क़ब्ज़ा करना 'तालिबान की नीति नहीं' है.

इमेज स्रोत, Anadolu Agency
लेकिन क़तर में तालिबान के कार्यालय से बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि 'वापसी पूरी होने के बाद कोई भी विदेशी सेना, विदेशी फ़ौज के ठेकेदारों सहित शहर में नहीं रहनी चाहिए.'
शाहीन ने बीबीसी को बताया, "अगर वे दोहा समझौते के ख़िलाफ़ अपनी सेना को पीछे छोड़ देते हैं तो उस स्थिति में यह हमारे नेतृत्व का निर्णय होगा कि हम कैसे आगे बढ़ते हैं."
उन्होंने कहा, "हम ऐसी स्थिति में जवाब देंगे और इस पर अंतिम फ़ैसला हमारे नेताओं का होगा."
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि तालिबान राजनयिक, एनजीओ और दूसरे विदेश नागरिकों को निशाना नहीं बनाएगा और उनकी सुरक्षा में लगे सैनिकों की ज़रूरत नहीं होगी.
उन्होंने कहा, "हम विदेशी सुरक्षाबलों के ख़िलाफ़ हैं न कि राजनयिकों, एनजीओ और उनके कर्मचारियों के. एनजीओ, दूतावास चलते रहें- यह वो हैं, जिन्हें हमारे लोग चाहते हैं. हम उनके लिए कोई ख़तरा नहीं बनेंगे."
क्या है समझौता
समझौता ये हुआ है कि विदेशी फ़ौजों के जाने के बाद तालिबान, अल-क़ायदा या किसी अन्य चरमपंथी समूह को अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में ऑपरेट करने की अनुमति नहीं देगा.
राष्ट्रपति जो बाइडन ने अमेरिकी सैनिकों की वापसी के लिए 11 सितंबर की तारीख़ चुनी है.
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त
ये अमेरिका पर 9/11 के हमलों की 20वीं सालगिरह होगी. लेकिन ऐसी ख़बरें हैं कि ये 'वापसी' कुछ दिनों के अंदर पूरी हो सकती है.
जैसे-जैसे देश की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी अफ़ग़ान सेनाओं को सौंपने की तैयारी हो रही है, वैसे-वैसे अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं.
तालिबान का अभियान

इमेज स्रोत, NASEER SADEQ
पिछले दिनों अधिकारियों ने ये जानकारी दी थी कि तालिबान चरमपंथियों के साथ संघर्ष के बाद अफ़ग़ानिस्तान के एक हज़ार से अधिक अफ़ग़ान सैनिक पड़ोसी देश ताजिकिस्तान भाग गए हैं.
ताजिकिस्तान की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि अफ़ग़ान सैनिक "अपनी जान बचाने के लिए" सरहद पार भाग गए.
अफ़ग़ानिस्तान में हाल के दिनों में हिंसा अचानक से बढ़ गई है और तालिबान का ज़्यादा से ज़्यादा इलाक़ों पर नियंत्रण बढ़ाता जा रहा है.
तालिबान ने सीमावर्ती प्रांत बदाख्शान में कई क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया है.
दूसरी तरफ़ ताजिकिस्तान का प्रशासन अफ़ग़ान शरणार्थियों के आने की संभावना को ध्यान में रखते हुए तैयारी कर रहा है.
जिस रफ़्तार से तालिबान अपने कब्ज़े वाले इलाके का दायरा बढ़ा रहा है, उससे इस डर को हवा मिली है कि अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की पूर्ण वापसी के बाद अफ़ग़ान सुरक्षा बल उनके सामने टिक नहीं पाएंगे.
अफ़ग़ानिस्तान में पिछले 20 सालों से नेटो की अगुआई में सैन्य अभियान चल रहा है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)













