चीन की कम्युनिस्ट पार्टी 100 साल के जश्न पर दुनिया को क्या संदेश देना चाहती है?

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- Author, प्रतीक जाखड़
- पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
चीन की सरकार एक जुलाई, 2021 को सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के शताब्दी समारोह के जश्न को कामायाबी भरे सफ़र के तौर पर पेश कर रही है.
कम्युनिस्ट पार्टी की दृढ़ता के साथ चीन में इन दिनों इन्हीं मुद्दों पर चर्चा है- इतने लंबे सफ़र में कैसे पार्टी ने अपनी मज़बूती को बनाए रखा और इस सफ़र के दौरान लोकतांत्रिक व्यवस्था के आने की संभावना और साम्यवाद के पूरी तरह से पतन की आशंकाओं को पीछे छोड़ दिया है.
हाल ही में चीन का अंतरिक्ष यात्री वाला स्पेस मिशन पूरा हुआ, इसे भी देशभक्ति से जोड़कर देखा गया है, एक अंतरिक्ष यात्री ने तो यहाँ तक कहा कि इसने 100 सालों के पार्टी के संघर्ष में एक सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है.
लचीले रुख़ के बावजूद चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का पूरा ध्यान अपने अस्तित्व पर है, यही वजह है कि पार्टी आम लोगों के विश्वास को बनाए रखने के लिए बहुत संवेदनशील है.

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इसके लिए शासन की वैधता को लगातार मज़बूत किए जाने की ज़रूरत होती है. कम्युनिस्ट पार्टी के शताब्दी समारोह का इस्तेमाल भी चीन में इसके लिए किया जा रहा है, जिसमें अतीत के गौरव, वर्तमान की कामयाबी और भविष्य की महानता को पेश किया जा रहा है.
चीन की सत्ता पर कम्युनिस्ट पार्टी के निरंतर एकाधिकार के लिए प्रचार तंत्र, शिक्षाविदों, पार्टी के सदस्यों और यहाँ तक कि विदेशियों को भी लामबंद किया गया है.
ऐसे में चीन सौ साल पुरानी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ी किन बातों को पेश कर रहा है?
लोगों की सेवा
इस संदेश के ज़रिए यह बताने की कोशिश है कि सीसीपी लोगों पर शासन करने का जनादेश लोगों की सेवा से हासिल करती है और लोगों का अटूट समर्थन पार्टी को हासिल है.
लोगों की सेवा का पहली बार इस्तेमाल माओत्से तुंग ने 1944 में किया और इसके बाद से ही इसे सीसीपी का अनाधिकारिक सिद्धांत वाक्य कहा जाता है. वैसे इस सिद्धांत वाक्य का ज़ोर शी जिनपिंग के शासनकाल में बढ़ा है.
अपने भाषणों और निर्देशों में शी जिनपिंग लगातार दोहराते रहे हैं कि पार्टी को सुविधा संपन्न लोगों की नहीं बल्कि आम लोगों की सेवा करने के अपने वास्तविक उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए.
हाल ही में उन्होंने कहा है कि सीसीपी चीन के लोगों की ख़ुशी के लिए प्रयास करती है और इसे दिखाने के लिए प्रचार तंत्र मज़बूती से काम भी कर रहा है.

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सरकारी मीडिया और आधिकारिक वेबसाइट हाल ही में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन को प्रमुखता से प्रकाशित कर रही है, जिसमें दावा किया गया है कि सरकार से चीन के नागरिकों की संतुष्टि बढ़ी है. यह एक तरह से सीसीपी के शासन को सही ठहराने की कोशिश है.
विभिन्न मीडिया आउटलेट्स भावुक करने वाली कहानियाँ प्रसारित कर रहे हैं. चाइना ग्लोबल टेलीविज़न नेटवर्क इन दिनों लोगों का आदमी नाम से एक सिरीज़ प्रसारित कर रहा है, जिसमें पार्टी के उन सदस्यों की व्यक्तिगत स्टोरी दिखाई जा रही है, जो लोगों के लिए काम कर रहे हैं.
चीन के विदेश मामलों के उप मंत्री झी फेंग ने 14 जून को विदेशी प्रतिनिधियों से कहा, "सीसीपी के पास कोई जादू की छड़ी नहीं है, लेकिन पार्टी लोगों की इच्छाओं और उसमें हो रहे बदलावों को जानती है. इसलिए लोगों की ज़रूरतो के मुताबिक़ नीतियाँ लागू करती हैं. पार्टी और आम लोगों के बीच पानी और मछली जैसा रिश्ता है."
आम लोगों को लेकर प्रतिबद्धता दिखने की कोशिश के साथ पार्टी इससे जुड़े एक और मुद्दे पर ध्यान फ़ोकस कर रही है, यह मुद्दा पार्टी और युवाओं के बीच विशेष जुड़ाव का है. युवा ऐतिहासिक तौर पर चीनी समाज का प्रभावशाली तबका रहा है, जिसके साथ पार्टी का जटिल रिश्ता रहा है.
हालाँकि युवाओं से जुड़ाव वाली रणनीति उतनी कामयाब नहीं हुई है, क्योंकि कई युवाओं को लगता है कि समाज में आगे बढ़ने के मौक़े कम हैं, इसे युवाओं ने कम से कम काम करने के अपने सोशल अभियान के ज़रिए ज़ाहिर किया है. इसके अलावा समाज में आर्थिक असमानता भी बढ़ रही है
इतिहास का सहारा
कम्युनिस्ट शासन में लगातार लोगों का भरोसा क़ायम रखने के लिए पार्टी की कोशिश अपने क्रांतिकारी विरासत को भुनाने की रही है. पार्टी के गौरवशाली अतीत और बलिदान को चीन की सरकारी मीडिया में हर जगह देखा जा सकता है.
इस मुद्दे पर बड़े-बड़े बैनर, पोस्टर, फ़िल्म और टीवी सिरीज़ नज़र आते हैं. इसका ज़िक्र आधिकारिक संबोधनों में किया जा रहा है.

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सरकारी मीडिया अतीत से जुड़े मिथकों के बारे में भी लोगों को जानकारी दे रहा है. सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ 'क्रांतिकारियों के पदचिन्हों का पता' के तौर पर विशेष कवरेज कर रही है.
इतिहास का दोहन करने के लिए वामपंथ से जुड़े पर्यटन को भी बढ़ावा दिया गया है, जिनमें ऐतिहासिक जगहों की यात्रा, पार्टी संग्रहालयों और क्रांतिकारियों के स्मारकों की यात्राएँ शामिल हैं.
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने फरवरी महीने में पार्टी का इतिहास जानने के लिए अभियान शुरू किया था, उन्होंने सभी स्तर पर मौजूद पार्टी कार्यकर्तों से कहा है कि उन्हें पार्टी के अतीत से ज्ञान लेने को कहा गया था.
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के आधिकारिक जर्नल छ्यूशी के ताज़ा अंक में शी जिनपिंग ने फिर से कहा है कि इतिहास पार्टी के अडिग संघर्ष की सबसे बेहतर पाठ्यपुस्तक है और उसकी समझ से पार्टी और देश के प्रति अनुराग उत्पन्न होगा.
शी जिनपिंग के सलाहकार दल में शामिल वैंग हूनिंग ने पिछले दिनों कहा है कि हाल में खुले संग्रहालय से पार्टी सदस्य, अधिकारी और लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि पार्टी इतनी सक्षम क्यों हैं, क्यों मार्क्सवादी नीतियाँ कारगर हैं और क्यों समाजवाद के साथ चीनी साम्यवाद बेहतर कर रहा है.
हालाँकि पार्टी के इतिहास पर फ़ोकस तो किया जा रहा है, लेकिन यह पूरा इतिहास नहीं है, बल्कि उसका संपादित रूप है.
आधिकारिक इतिहास को चुनौती देने वाली किसी भी बात के इस्तेमाल को लेकर शी जिनपिंग ने लगातार चेतावनी जारी की है. पिछले ही महीने अधिकारियों ने पार्टी के इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश करने के आरोप में 20 लाख ऑनलाइन पोस्टों को डिलीट कराया है.

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जनादेश
पार्टी ने लंबे समय से अपने शासन को वैध ठहराने के लिए मज़बूती से आर्थिक विकास और सामाजिक स्थिरता पर भरोसा किया है. पार्टी ने उस नीति को अपनाया है, जिसके मुताबिक़ शासन को नतीजे देने के आधार पर आंका जाता है.
चीन के जाने माने विद्वान जैंग वेईवेई ने हाल ही में संदेश देने की प्रक्रिया को लेकर चीन के पोलित ब्यूरो को संबोधित किया है, उन्होंने इसे स्वर्ग के लिए जनादेश कहा है. यह एक प्राचीन चीनी अवधारणा है, जिसमें कहा जाता है कि राजा के राज करने के अधिकार उसके शासन करने के तरीक़े पर निर्भर है.
एक अन्य लेख में उन्होंने शासन की एक नई शैली जिसमें लोकतंत्र बनाम अधिनायकवाद से अलग हटकर सुशासन बनाम कुशासन के संदर्भ में देखने का प्रस्ताव रखा है.
सीसीपी के सौ साल के मौक़े पर सरकारी मीडिया लगातार यह बता रहा है कि पार्टी के नेतृत्व में आर्थिक चमत्कार के साथ-साथ उल्लेखनीय सफलताएँ हासिल हुई हैं.
पार्टी के अख़बार पीपुल्स डेली के ऑपएड पेज पर दो उपलब्धियों का बखान किया गया है, जिसमें ग़रीबी और कोविड-19 पर जीत को रेखांकित किया गया है.
इन कामयाबियों के साथ साथ विदेशी प्रतिनिधियों की राय को पेश किया जा रहा है, जिसमें जापान के पूर्व प्रधानमंत्री से लेकर रूस के विद्धान तक शामिल हैं. कोविड-19 को लेकर चीन की बेहतर तस्वीर बताने के लिए अमेरिका और भारत की स्थितियों को भी पेश किया जा रहा है.
हालाँकि काम के आधार पर शासन की चुनौती, समय के साथ उस रफ़्तार को बनाए रखने की होती है क्योंकि लोगों की अपेक्षाएँ बढ़ती जाती हैं. चीन में बुर्जुगों की बढ़ती आबादी, व्यवस्थागत कमी, सुधार को लेकर कमी और पर्यावरण संबंधी मुश्किलें जैसी चुनौतियाँ बढ़ रही हैं.
यही वजह है कि सरकारी संदेशों में लक्ष्य को पूरा करने के बजाए सर्वांगीण विकास और नागरिकों को बेहतर जीवन देने पर ज़ोर ज़्यादा है.

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आत्म सुधार की क्षमता
सीसीपी इस बात को भी प्रचारित करने में दिलचस्पी दिखा रही है कि उसमें मुश्किल चुनौतियों से उबरने, बदली हुई परिस्थितियों के अनुकूल होने और आत्म सुधार करने की प्रवृति है.
पार्टी की ओर से यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि लोकतांत्रिक पार्टियाँ छोटी अवधि के फ़ायदे के लिए काम करती हैं जबकि सीसीपी दीर्घकालीन नज़रिए से काम करती है और समय के साथ सुधार करती चलती है.
इस नैरेटिव के तहत किसी भी ग़लती की ज़िम्मेदारी निचले स्तर पर थोपी जाती है और शीर्ष नेतृत्व पर सवाल नहीं उठते. कोविड-19 के शुरुआती दिनों की चूक की ज़िम्मेदारी निचले स्तर के अधिकारियों पर थोपी गई.
चीन के अधिकारी जू यूशेंग ने देश की राजनीतिक व्यवस्था के गुणों पर श्वेत पत्र जारी करते हुए एक समारोह में कहा था कि चीन की व्यवस्था में बहुदलीय पार्टी व्यवस्था की शातिर प्रतिस्पर्धा वाली कमज़ोरियाँ नहीं हो सकतीं.
चीन के उप विदेश मंत्री शी फेंग ज़ोर देते हुए कहते हैं, "पार्टी अपनी ग़लतियों को सही करती है, आत्म सुधार करती है, चाहे वह कितना ही दुख देने वाला क्यों नहीं हो. सीसीपी सोवियत संघ वाली कम्युनिस्ट पार्टी नहीं है."
सोवियत संघ का पतन सीसीपी के लिए सबक साबित हुआ और शी जिनपिंग ने हमेशा उस स्थिति के दोहराव से बचने की बात कही है. जब शी जिनपिंग ने 2012 में कमान संभाली तब पार्टी एक गंभीर संकट के दौर से गुजर रही थी.
पार्टी गुटबाज़ी, अक्षमता और भ्रष्टाचार से त्रस्त थी. शी जिनपिंग ने पार्टी में व्यापक सुधार के लिए कड़े क़दम उठाए, उन्होंने अनुशासनात्मक अभियान चलाए, बैठकों में सामूहिक अध्ययन पर ज़ोर दिया और आत्म आलोचना की शुरुआत की.
चीन की जनता के बीच भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने वाला आत्म सुधारात्मक क़दम बेहद लोकप्रिय हुआ, इसे स्थानीय मीडिया में काफ़ी कवरेज भी मिली.
'चीन को महान बनाना है'
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी राष्ट्रीय गौरव को अपने पक्ष में ढालने की कोशिश करती रही है. पार्टी को लगता है कि राष्ट्रप्रेम बढ़ने से लोगों में सीसीपी के प्रति निष्ठा बढ़ेगी.
इसी सोच के तहत पार्टी चीन के महान राष्ट्र के तौर पर कायाकल्प को लक्ष्य बना चुकी है, शी जिनपिंग ने इसे 2049 तक पूरा करने का लक्ष्य बनाया है, इस बहाने नागरिकों को सामूहिक उद्देश्य भी मिल गया है.
इसका संदेश भी स्पष्ट है- पार्टी चीन को दुनिया में बेहतर ढंग से स्थापित कर रही है, इस कोशिश में वह यह दिखा रही है कि विदेशी शक्तियों के हाथों चीन के शोषण और अपमान की सदी को ठीक किया जा रहा है. इसके बिना देश में अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी और फिर से पश्चिमी देश शोषण करने लगेंगे.

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ग्लोबल टाइम्स ने हाल के अपने संपादकीय में लिखा है, "सीसीपी के दृढ़ नेतृत्व के बिना चीन का कोई भविष्य नहीं होगा. अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ चीन को दबाएगा, धमकाएगा और चीन अलग-थलग पड़ जाएगा."
राष्ट्रवादी उत्साह को बढ़ाते हुए शी जिनपिंग और उनके सहयोगियों ने चीन को वैश्विक केंद्र के तौर पर पेश करना शुरू कर दिया है. इसी सिलसिले में पूर्व का उदय हो रहा है और पश्चिम का अस्त हो रहा है या चीन का प्रभुत्व बढ़ रहा है और अमेरिका का कम हो रहा है, जैसे नैरेटिव गढ़े जा रहे हैं. इस बात को भी प्रचारित किया जा रहा है कि विदेशी दुश्मन ताक़तें चीन पर नियंत्रण की कोशिश कर रही हैं.
हाल ही में फ़्रांस में चीन के राजदूत लू शाहेय ने कहा है, "हम ऐसे लड़ाके हैं जो अपनी जन्मभूमि के लिए खड़े हैं और लड़ रहे हैं. हम चीन पर हमला करने वाले पागल कुत्तों के रास्ते में खड़े हैं."
ऐसे उत्साही बयानों से देश के नागरिक तो ख़ुश हो सकते हैं, लेकिन इसका असर चीन की विदेश नीति पर पड़ सकता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन की नाकारात्मक छवि बन सकती है.
हालाँकि चीन का सरकारी मीडिया देश में तेज़ी से बढ़ रहे है कट्टर देशभक्ति वाले माहौल को लेकर चिंतित नहीं दिखता.
चाइना डेली ने हाल ही में अपने एक लेख में लिखा है, "20वीं सदी की शुरुआत में, सीसीपी ने चीन में एक अस्पष्ट, तितर-बितर और समन्वय के अभाव में कम्युनिस्ट आंदोलन के रूप में अपनी शुरुआत की थी, एक शताब्दी बाद पार्टी एक संभावित महाशक्ति पर शासन करने वाली वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी अगली शुरुआत कर रही है."
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