इमरान ख़ान के आगे कमज़ोर पड़ चुकी है विपक्षी नेताओं की एकता? -पाकिस्तान उर्दू प्रेस रिव्यू

इमरान ख़ान

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    • Author, इक़बाल अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते विपक्षी गठबंधन में दरार की ख़बरें सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियों में रहीं.

सबसे पहले बात पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों के गठबंधन में दरार पड़ने की.

इमरान ख़ान के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ आंदोलन शुरू करने के लिए विपक्ष की 11 पार्टियों ने पिछले साल एक साथ आने का फ़ैसला किया था.

विपक्षी पार्टियों ने इसका नाम पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) रखा था और जमीयत-उल-इस्लाम (जेयू-आई) के प्रमुख मौलाना फ़ज़लुर्रहमान से पीडीएम का नेतृत्व करने के लिए कहा गया था.

पीडीएम ने पाकिस्तान के कई शहरों में इमरान ख़ान की सरकार के ख़िलाफ़ कई ज़बर्दस्त रैलियां भी कीं जिनमें कोरोना महामारी के बावजूद हज़ारों की तादाद में लोग शरीक हुए थे.

लेकिन धीरे-धीरे पीडीएम में शामिल पार्टियों के आपसी मतभेद सामने आने लगे और अब तो ऐसा लगने लगा है कि पीडीएम का अस्तित्व ही ख़तरे में है.

विपक्षी नेता

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अब कहां से शुरू हुई फूट

पीडीएम में ताज़ा संकट का कारण है पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी का पाकिस्तानी संसद के ऊपरी सदन सीनेट में नेता प्रतिपक्ष बनना.

पीपीपी के इस फ़ैसले पर पीडीएम के एक और अहम घटक दल मुस्लिम लीग (नवाज़) ने सख़्त नाराज़गी जताई है.

अख़बार 'जंग' के अनुसार मामला इतना ज़्यादा बिगड़ गया है कि मुस्लिम लीग (नवाज़) और जेयू-आई ने यूसुफ़ रज़ा गिलानी को सीनेट का नेता प्रतिपक्ष मानने से इनकार कर दिया है.

इसके जवाब में पीपीपी ने संसद के निचले सदन नेशनल एसेंबली में नवाज़ शरीफ़ के छोटे भाई शहबाज़ शरीफ़ को नेता प्रतिपक्ष मानने से इनकार कर दिया है.

मुस्लिम लीग (नवाज़) के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी और जेयू-आई के सीनेटर अब्दुल ग़फ़ूर हैदरी ने कहा है कि पीपीपी का रवैया निराशाजनक रहा है और पीडीएम में शामिल पार्टियों को अपना नेता प्रतिपक्ष चुनने के लिए नई रणनीति बनानी होगी.

इसका जवाब देते हुए पीपीपी के सैय्यद नवेद क़मर ने कहा कि अगर मुस्लिम लीग (नवाज़) और जेयू-आई ने गिलानी को नेता प्रतिपक्ष नहीं माना तो उनकी पार्टी भी शहबाज़ शरीफ़ को निचले सदन में नेता प्रतिपक्ष स्वीकार नहीं करेगी.

अख़बार 'नवा-ए-वक़्त' के अनुसार सीनेट में मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेता आज़म नज़ीर ने कहा है कि मुस्लिम लीग (नवाज़) और जेयू-आई समेत पाँच विपक्षी पार्टियों ने सीनेट में 27 सांसदों का एक अलग ब्लॉक बना लिया है.

मरियम और बिलावल

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बलूचिस्तान अवामी पार्टी से समर्थन लेने पर विवाद

अख़बार 'एक्सप्रेस' के अनुसार पीडीएम में शामिल आठ पार्टियों ने बैठक कर पीडीएम के अध्यक्ष मौलाना फ़ज़लुर्रहमान से माँग की है कि वो पीपीपी और एएनपी को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछें कि उन्होंने पीडीएम के फ़ैसलों के ख़िलाफ़ जाकर काम क्यों किया और सीनेट में नेता प्रतिपक्ष के चुनाव के लिए उन्होंने बलूचिस्तान अवामी पार्टी (बीएपी) से मदद क्यों ली?

बलूचिस्तान में मुस्लिम लीग (नवाज़) से निकल कर कुछ लोगों ने साल 2018 में बलूचिस्तान अवामी पार्टी का गठन किया था.

साल 2018 के चुनाव में बीएपी बलूचिस्तान प्रांत की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. फ़िलहाल यह प्रांतीय सरकार का नेतृत्व करती है और केंद्र में सत्तारूढ़ तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी का समर्थन करती है.

अख़बार 'जंग' ने सुर्ख़ी लगाई है कि क्या मुस्लिम लीग (नवाज़) और पीपीपी में दूरियां और ज़्यादा बढ़ गईं हैं?

अख़बार के अनुसार पीपीपी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने मुस्लिम लीग (नवाज़) की उपाध्यक्ष मरियम नवाज़ का नाम लिए बग़ैर कहा कि हर वक़्त आर या पार की राजनीति नहीं चलती है.

गिलानी और बिलावल

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इमेज कैप्शन, गिलानी और बिलावल भुट्टो

उन्होंने मुस्लिम लीग (नवाज़) पर हमला करते हुए कहा कि शायद उन्हें गिलानी की जीत बर्दाश्त नहीं हो रही है.

बिलावल ने कहा कि जवाब देना उन्हें भी आता है लेकिन उन्हें लगता है कि विपक्षी पार्टियों के बीच मतभेद का फ़ायदा सरकार को होगा.

बिलावल ने कहा कि पीडीएम के प्रमुख मौलाना फ़ज़लुर्रहमान पूरी तरह तटस्थ हैं.

अख़बार 'दुनिया' के अनुसार बिलावल ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि मौलाना फ़ज़लुर्रहमान उनसे नाराज़ हो सकते हैं. बिलावल ने कहा कि मौलाना पीडीएम के अध्यक्ष हैं और उन्हें पूरी उम्मीद है कि वो एकतरफ़ा नहीं चलेंगे.

इस बीच अख़बार 'जंग' के अनुसार बिलावल भुट्टो के पिता और पीपीपी के सह-अध्यक्ष आसिफ़ अली ज़रदारी और मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ दोनों ने टेलीफ़ोन कर मौलाना फ़ज़लुर्रहमान के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की.

मौलाना फ़ज़लुर्रहमान इन दिनों बीमार हैं और डॉक्टर ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है.

स्टेट बैंक अध्यादेश को अदालत में चुनौती

स्टेट बैंक ऑफ़ पाकिस्तान

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पीपीपी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ने कहा है कि वो स्टेट बैंक ऑफ़ पाकिस्तान पर सरकार के अध्यादेश को अदालत में चुनौती देंगे.

अख़बार 'नवा-ए-वक़्त' के अनुसार बिलावल ने कहा कि इमरान ख़ान की सरकार राष्ट्र की संस्थाओं को दूसरों के हवाले कर रही है. बिलावल ने कहा कि इस अध्यादेश के बाद स्टेट बैंक ऑफ़ पाकिस्तान यहां की संसद और सुप्रीम कोर्ट को जवाबदेह होने के बजाए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) को जवाबदेह हो जाएगा.

बिलावल के अनुसार इस अध्यादेश के बाद स्टेट बैंक आईएमएफ़ के इशारे पर चलेगा और यह देश की संप्रभुता पर सीधे हमला है.

डस्का संसदीय सीट पर दोबारा मतदान का फ़ैसला बरक़रार

वीडियो कैप्शन, इमरान ख़ान और विपक्षी पार्टियों में तकरार से कैसे बिगड़ रहे हैं हालात?

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने डस्का संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव को रद्द करने और वहां दोबारा मतदान कराने के चुनाव आयोग के फ़ैसले को चुनौती देने वाली सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) की याचिका को ख़ारिज कर दिया है. सर्वोच्च अदालत ने वहां दोबारा चुनाव कराने के फ़ैसले को बरक़रार रखा है.

पंजाब प्रांत के सियालकोट ज़िले में स्थित डस्का संसदीय सीट पर 19 फ़रवरी को चुनाव हुए थे लेकिन विपक्षी पार्टियों ने चुनाव में धांधली के आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से चुनाव रद्द करने की माँग की थी. चुनाव के दिन हिंसा भी हुई थी जिसमें दो लोग मारे गए थे.

वीडियो कैप्शन, इमरान ख़ान ने चुनाव आयोग पर लगाए आरोप, क्या है मामला?

चुनाव आयोग ने विपक्षी पार्टियों की माँग को स्वीकारते हुए वहां दोबारा चुनाव कराने के आदेश दिए थे लेकिन इमरान ख़ान की पार्टी पीटीआई ने चुनाव आयोग के इस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

शुक्रवार को अपना फ़ैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के दोबारा चुनाव कराने के फ़ैसले को सही ठहरा दिया.

अदालत ने कहा कि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव करवाना चुनाव आयोग की ज़िम्मेदारी है और आयोग इसको सुनिश्चित करने के लिए उचित क़दम उठाने में नाकाम रहा है.

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद अब वहां 10 अप्रैल को दोबारा चुनाव होंगे.

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