पाकिस्तान के पीएम इमरान ख़ान क्या मौजूदा संकट से उबर पाएंगे?

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- Author, प्रवीण शर्मा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
पाकिस्तान में राजनीतिक संकट गहराता नज़र आ रहा है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने गुरुवार को कहा है कि वे नेशनल असेंबली में विश्वास मत साबित करेंगे. सीनेट चुनाव में उनकी पार्टी के एक अहम उम्मीदवार की हार से पैदा हुए हालात के चलते उन्होंने विश्वास मत हासिल करने का फ़ैसला किया है. यह विश्वास मत शनिवार यानी छह मार्च को होगा.
दरअसल, इमरान ख़ान सरकार के वित्त मंत्री अब्दुल हफ़ीज़ शेख़ सीनेट चुनावों में इस्लामाबाद की कड़े मुक़ाबले वाली सीट पर पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी से हार गए थे.
इसके बाद इमरान ख़ान ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी तहरीके इंसाफ़ पार्टी के कुछ सांसदों को विपक्ष ने रिश्वत देकर पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी को वोट देने के लिए राज़ी कर लिया था और इस वजह से उनके वित्त मंत्री अब्दुल हफ़ीज़ शेख़ की हार हुई है.
सीनेट के चुनावों में संसद के निचले सदन, नेशनल असेंबली के सदस्य और चार प्रांतीय असेंबलियों के सदस्य वोट देते हैं. ये वोटिंग बुधवार को हुई थी. इस हार के बाद ये सवाल पैदा होने लगे थे कि क्या इमरान ख़ान के पास सदन में बहुमत है या नहीं? सीनेट संसद का ऊपरी सदन होता है. इस चुनाव में गिलानी को 169 वोट मिले, जबकि हफ़ीज़ शेख़ को 164 वोट हासिल हुए.
क़रीब आधे घंटे के अपने संबोधन में इमरान ख़ान ने विपक्षी दलों पर जमकर हमला बोला. उन्होंने उनकी नीयत पर सवाल उठाए.

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उन्होंने कहा कि सीनेट की सबसे चर्चित इस्लामाबाद सीट हारने के बाद उन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा है, ताकि वो पद छोड़ दें. लेकिन इमरान ख़ान ने इससे साफ़ इनकार किया.
उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के सदस्यों को करोड़ों रुपये की रिश्वत पेश की गई. साथ ही उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी के कुछ लोगों ने ख़ुद को बेच भी दिया.
हालांकि, 100 सदस्यों वाली सीनेट में इमरान ख़ान की पार्टी की स्थिति में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन शेख़ की हार सरकार और उनकी पार्टी के लिए एक करारा झटका है.
इमरान ख़ान ने कहा, "मैं शनिवार को विश्वास मत कराने की माँग कर रहा हूं. मैं नेशनल एसेंबली जाऊंगा और कहूंगा कि आप तय कीजिए. ये एक ओपन वोट होगा और मैं सभी सदस्यों से कहूंगा कि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करें और आप कह सकते हैं कि आप इमरान ख़ान के साथ नहीं हैं. मैं इस बात की इज्ज़त करूंगा. और अगर आप जीत गए तो मैं विपक्ष में बैठूंगा."
उन्होंने कहा, "अगर मैं सत्ता खो दूंगा तो इसका मुझ पर कोई असर नहीं होगा"
पाकिस्तान में मौजूदा राजनीतिक संकट पर इस्लामाबाद स्थित इंडिपेंडेंट उर्दू के मैनेजिंग एडिटर हारून रशीद कहते हैं, "इमरान ख़ान की छवि एक एंग्री ओल्ड मैन की सी है. उन्होंने जिस तरह से आरोप लगाए हैं उससे उनकी बेबसी झलक रही है कि सरकार में होते हुए और बतौर पीएम भी वे इन धांधलियों को रोक नहीं पाए हैं. उन्होंने रिश्वत के आरोप लगाए हैं और शक जताया है कि उनकी ही पार्टी के कुछ मेंबर्स ने उन्हें वोट नहीं दिया है. इस वजह से उनकी हार हुई है."
हारून कहते हैं कि इमरान ख़ान पहले से विपक्ष पर कड़े हमले करते रहे हैं, लेकिन पहली मर्तबा उन्होंने चुनाव आयोग पर भी आरोप लगाया है कि उनकी वजह से ये सारी धांधली हुई है. उन्होंने कहा है कि चुनाव आयोग को वोटों के ग़लत इस्तेमाल को रोकना चाहिए था.
हालांकि, ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि चुनाव आयोग की आज मीटिंग चल रही है. इसके बाद प्रधानमंत्री के आरोपों के जवाब में इलेक्शन कमीशन अपना पक्ष रख सकता है.
पीएम के विश्वास मत हारने का ज्यादा ख़तरा नहीं
विश्वास मत लाने के पीछे एक वजह यह हो सकती है कि पाकिस्तानी पीएम अपने आप को नैतिक रूप से मज़बूत दिखाना चाहते हैं.
हारून कहते हैं, "मुझे नहीं लगता कि विश्वास मत में प्रधानमंत्री को कोई ज्यादा ख़तरा है. वे एक नैतिक आधार पर विश्वास मत के लिए जा रहे हैं. उनके लिए अभी कोई बड़ा राजनीतिक संकट नहीं है. मुझे लगता है कि वे आसानी से इसमें जीत जाएंगे."
लेकिन, देखने वाली बात ये होगी कि उन्हें कितने वोट मिलते हैं.
हारून मानते हैं कि इमरान ख़ान इस संकट के बाद और ज्यादा मज़बूत होकर उभर सकते हैं. वे नैतिक रूप से मज़बूत स्टैंड लेने के लिए ऐसा कर रहे हैं.
विपक्ष ने कड़ा किया हमला
पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों ने सरकार और इमरान ख़ान पर हमलों को तेज़ किया है.
पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने सीनेट के चुनाव में पीटीआई के अब्दुल हफ़ीज़ शेख़ के हारने के बाद गुरुवार को कहा है कि अब कोई भी इस सरकार को बचा नहीं सकता है.
बिलावल ने ये भी कहा कि ख़ुद पीएम के सहयोगियों ने उन्हें सीनेट के चुनावों में ख़ारिज कर दिया है. उन्होंने इमरान ख़ान की सरकार को निकम्मी और अवैध क़रार दिया है.
बिलावल ने पीएम इमरान ख़ान पर आरोप लगाया, "वे एक कायर हैं और चुनावों से डरते हैं."
दूसरी ओर, पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) की उपाध्यक्ष मरियम नवाज़ ने भी पिछले कुछ दिनों में इमरान ख़ान पर जमकर हमले किए हैं.

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सोमवार को मरियम नवाज़ ने इमरान ख़ान पर हमला करते हुए कहा, "आप वोट की ताक़त से डरते क्यों हैं?"
हालांकि, पीएम ने अपने संबोधन में कहा है कि विपक्ष उन्हें ब्लैकमेल करना चाहता है.
उन्होंने कहा, "विपक्ष मेरे सिर पर विश्वास मत के ज़रिए मुझे ब्लैकमेल करना चाहता था ताकि मैं उन्हें एनआरओ दे दूं. जिन लोगों ने इस देश को लूटा है मैं उन्हें ये रियायत नहीं दूंगा."
एनआरओ का मतलब नेशनल रीकॉन्सिलिएशन ऑर्डर है जिसके तहत विदेश में निर्वासित जीवन बिता रहे नेताओं को देश लौटने की राहत मिली थी. एनआरओ के तहत ऐसे नेताओं के ख़िलाफ़ लगे सारे आरोप हटा लिए गए थे.
हालांकि, हारून कहते हैं कि पीएम भले ही कुछ भी दावे करें, लेकिन, हक़ीक़त में वे इन आरोपों को साबित नहीं कर पा रहे हैं. वे कहते हैं, "भ्रष्टाचार के ज्यादातर मामलों में आरोप कमज़ोर होते हैं. ऐसे में सरकार को ज्यादा मज़बूत केस बनाने पर फ़ोकस करना चाहिए."

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