म्यांमार तख़्तापलट: सेना ने पूरी रात घेरे रखा फिर कैसे भागे प्रदर्शनकारी?

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म्यांमार के यंगून में सुरक्षाबलों से घिरे दर्जनों प्रदर्शनकारी भागने में सफल हुए हैं.
सनचोंग ज़िले के एक इलाक़े में पुलिस ने घेराव किया हुआ था जिसमें तक़रीबन 200 लोग फंसे हुए थे.
एक स्थानीय नागरिक ने बीबीसी न्यूज़ को बताया कि कम से कम 40 लोगों को गिरफ़्तार करके ले जाया गया था लेकिन जैसे ही पुलिस के संख्याबल में कमी आई तो बाक़ी लोग भागने में सफल हो गए.
मंगलवार को भी म्यांमार के सबसे बड़े शहर में विरोध प्रदर्शन प्रस्तावित हैं.
म्यांमार में एक फ़रवरी को सैन्य तख़्तापलट के बाद यहां पर लोगों का विरोध प्रदर्शन जारी है.
इन व्यापक विरोध प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 54 लोगों की मौत हो चुकी है. इनकी माँग है कि सैन्य शासन को समाप्त किया जाए और देश के चुने हुए सरकारी नेताओं को रिहा किया जाए.
इन नेताओं में आंग सान सू ची भी शामिल हैं जिन्हें तख़्तापलट के बाद हिरासत में ले लिया गया था.
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस के अनुसार, सोमवार को जो लोग फंसे थे, वे महिलाएं थीं जो अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर रैली निकाल रही थीं.
संयुक्त राष्ट्र ने सेना से उनकी 'सुरक्षित रिहाई' की अपील की है और गुटेरेस ने 'अधिकतम संयम' की अपील की है.
प्रदर्शनकारी ने भागने की बताई कहानी
मंगलवार की सुबह एक प्रदर्शनकारी ने बीबीसी से कहा कि वो सुबह स्थानीय समयानुसार 6.30 बजे तक बाहर निकल पाने में असमर्थ था. उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों ने सुबह को उस जगह को छोड़ा.
उन्होंने बताया कि बीती रात में 40 लोग गिरफ़्तार किए गए थे लेकिन बाक़ी के लोग सुबह तक छिपे रहने में सक्षम थे और उसके बाद वे वहां से गए.
एक अन्य महिला प्रदर्शनकारी ने बीबीसी से कहा कि जब सुरक्षाबलों ने इलाक़े को घेरना शुरू कर दिया था तो उन्हें और कुछ लोगों को एक स्थानीय नागरिक ने अपने यहां रखा था.
उन्होंने बताया, "हम सात लोग वहां पर फंसे थे जिनमें छह महिलाएं और एक पुरुष थे. हमें चिंता होने लगी थी कि अब हमें सुरक्षाबल छोड़कर जाने वाले नहीं हैं. इसके बाद हमने सोचा कि इस घर से बाहर निकलने के लिए कोई समाधान निकाला जाना चाहिए."
फिर उन्होंने बाक़ी प्रदर्शनकारियों के साथ उस घर से बाहर निकलने का फ़ैसला लिया और रात 'सुरक्षित' जगह पर बिताई. वे उस इलाक़े को मंगलवार सुबह छोड़ने में सफल हो पाए.
'छात्रों को रिहा करो'
म्यांमार पुलिस ने सोमवार की रात को घरों में छापा मारना शुरू किया था और वे उन लोगों को ढूंढ रही थी जो ज़िले में बाहर निकले थे.
बाद में ऐसी भी रिपोर्ट सामने आईं कि सुरक्षाबलों ने सनचोंग के क़रीब में युवा लोगों के एक समूह को घेर लिया है और इसके बाद उस इलाक़े से एक ज़ोरदार धमाके की आवाज़ सुनी गई.
सामाजिक कार्यकर्ता मॉन्ग सोंगखा ने सोमवार को ट्वीट किया था कि वो सनचोंग से 'भागने' में सफल हुए थे लेकिन उन्होंने बताया कि 'तक़रीबन 200 युवा प्रदर्शनकारियों को पुलिस और सैन्य बलों ने घेर रखा है.'
कर्फ़्यू का विरोध करते हुए यंगून में भारी संख्या में लोग सड़कों पर आए थे. उनको 'सनचोंग में छात्रों को रिहा करो' के नारे लगाते हुए सुना जा सकता था.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, उन्हें तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों ने गोलियां चलाई थीं और स्टन ग्रेनेड दागे थे.
ऐसा माना जा रहा है कि सोमवार को देश में हुए प्रदर्शनों में तीन लोगों की मौत हुई है.
पाँच समाचार संस्थानों के लाइसेंस रद्द
दूसरी ओर सैन्य सरकार ने सोमवार को पाँच स्थानीय समाचार संस्थानों के लाइसेंस को रद्द कर दिया. इनमें मिज़िमा, डीवीबी, खित थित मीडिया, म्यांमार नाउ और सेवेन डे न्यूज़ शामिल हैं. ये समाचार संस्थान लगातार विरोध प्रदर्शनों को कवर कर रहे थे.
फ़ेसबुक पर एक बयान जारी करके मिज़िमा ने कहा कि इस प्रतिबंध की अवहेलना होगी और 'सैन्य तख़्तापलट के ख़िलाफ़ विभिन्न मल्टीमिडिया प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए लड़ाई जारी रहेगी.'
सरकार की घोषणा के फ़ौरन बाद म्यांमार नाउ ने बताया कि सेंट्रल यंगून में उनके कार्यालय पर सेना और पुलिस ने छापेमारी की है.
उन्होंने बताया कि उनके कम्प्यूटर, प्रिंटर और न्यूज़रूम के डाटा सर्वर को ज़ब्त कर लिया गया है.
पिछले महीने यंगून में प्रदर्शनों की लाइव स्ट्रीमिंग करते समय एक समाचार एजेंसी के रिपोर्टर को गिरफ़्तार कर लिया गया था.
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