सऊदी अरब: G20 की अध्यक्षता और मानवाधिकार उल्लंघन के मामले

बर्लिन में सऊदी दूतावास के समने विरोध प्रदर्शन

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    • Author, केरोलाइन हाउली
    • पदनाम, अंतरराष्ट्रीय मामलों की संवाददाता

वर्चुअल तौर पर ही सही, इस साल सऊदी अरब दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के विशेष सम्मेलन का आयोजन कर रहा है और ये उसके लिए राष्ट्रीय सम्मान की बात है.

लेकिन दुनिया भर के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि ये ख़बर बेचैन करने वाली है.

कार्यकर्ताओं ने जी20 देशों के नेताओं से अपील की थी कि वो ऑनलाइन होने वाले इस सम्मेलन का बहिष्कार करें. लेकिन अब उनकी मांग है कि ये देश इस मौक़े का इस्तेमाल सऊदी सरकार पर दबाव बनाने के लिए करें.

सऊदी अरब सरकार को लेकर मानवाधिकार समूहों की कई चिंताएं हैं. इनमें से तीन अहम चिंताओं के बारे में बात करते हैं.

सऊदी महिला

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पहला - महिला कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी

अब तक सऊदी अरब में जिन महिला अधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी की गई है उनमें साल लुजैन अल हथलोल सबसे अहम नाम है. उन्हें साल 2018 में गिरफ़्तार किया गया था.

उनके परिवार का कहना है कि उन्हें पीटा गया है, बिजली के झटके दिए गए हैं और गिरफ़्तारी के बाद उन्हें बलात्कार की धमकी भी दी गई है.

31 साल की लुजैन सऊदी अरब के 'मेल गार्डियनशिप सिस्टम' यानी 'पुरुष अभिभावक व्यवस्था' के ख़िलाफ़ बोलती रही हैं.

इसके अनुसार किसी महिला के लिए बड़े फ़ैसले लेने का अधिकार केवल उसके पिता, भाई, पति या बेटे के पास ही होता है.

लुजैन ने महिलाओं के गाड़ी ड्राइव करने के अधिकार के लिए भी अपनी आवाज़ उठाई. सऊदी सरकार ने जून 2018 को महिलाओं को ये अधिकार दिया लेकिन इस अधिकार की लड़ाई लड़ने वाली लुजैन को इससे ठीक पहले गिरफ़्तार कर लिया गया.

सऊदी अरब सरकार ने लुजैन को प्रताड़ित करने के आरोपों से इनकार किया है. सरकार का कहना है कि जी20 देशों के सम्मेलन की अध्यक्षता दुनिया भर में महिलाओं और बच्चियों के सशक्तिकरण की दिशा में बढ़ने के लिए सरकार की "प्रतिबद्धता को दर्शाता है."

लेकिन एक तरफ़ सम्मेलन की शुरुआत हुई तो दूसरी तरफ़ टाइम पत्रिका द्वारा सबसे शक्तिशाली अरब महिला बताई गई लुजैन अल हथलोल की सेहत गिरती जा रही है. जेल में परिवार से मिलने की मांग को लेकर वो बीते महीने से भूख हड़ताल पर हैं.

सालों पहले उन्होंने एक बार संयुक्त राष्ट्र में नौकरी के लिए आवेदन किया था, इस आवेदन का इस्तेमाल अब उनके ख़िलाफ़ सबूत के तौर पर किया जा रहा है.

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मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली ब्रितानी वकील बैरोनेस हेलेना केनेडी ने उन महिला अधिकार कार्यकर्ताओं की एक लिस्ट तैयार की है जो जेल में बंद हैं, इनमें लुजैन अल हथलोल का नाम भी शामिल है.

वो कहती हैं कि "जेल में उन्हें यातना दी जाती है. उन्हें बहेद मुश्किल और तनाव की स्थिति में रखा जाता है, उनके साथ यौन शोषण होता है."

एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, उन्होंने इस सप्ताह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन से अपील की है कि वो जी20 देशों के सम्मेलन के दौरान महिला अधिकार कार्यकर्ताओं की रिहाई का मुद्दा उठाएं.

ब्रिटेन के लिए एमनेस्टी इंटरनेशनल की निदेशक केट ऐलेन कहती हैं, "इस मामले में प्रधानमंत्री को सऊदी अरब के साथ बात करनी चाहिए. अगर आप कहते हैं कि आप महिलाओं के हक़ के लिए प्रतिबद्ध हैं, तो आपको ये कर के दिखाना होगा और महिला कार्यकर्ताओं को रिहा करना होगा."

ब्रितानी सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा, "हम नियमित रूप से मानवाधिकार के लिए काम करने वालों की हिरासत को लेकर सऊदी अधिकारियों के साथ बात करते रहे हैं और चिंता जताते रहे हैं. इसमें ये मामला भी शामिल है. हाल में संयुक्त राष्ट्र में अपने साथी देशों के साथ मिलकर हमने सऊदी अरब में गिरफ़्तार सभी राजनीतिक क़ैदियों की रिहाई की भी मांग की है."

सऊदी अरब के विदेश मंत्री आदिल अल-ज़ुबैर

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लेकिन सऊदी अधिकारियों का कहना है कि वो उनकी अदालतों के फ़ैसले पर किसी बाहरी को टिप्पणी करने नहीं देंगे.

सऊदी अरब के विदेश मंत्री आदिल अल-ज़ुबैर ने बीबीसी से कहा था, "हमारी न्याय व्यवस्था निष्पक्ष है. जिस तरह हम ब्रिटेन, अमेरिका या फिर किसी और मुल्क के लोगों को नहीं बताते कि क्या करना है और क्या नहीं, हम किसी को इस बात की इजाज़त नहीं देते कि वो हमें बताएं कि क्या करना है और क्या नहीं."

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दूसरा - एक भयानक हत्या

साल 2018 में तुर्की के इस्तांबुल में मौजूद सऊदी वाणिज्यिक दूतावास के भीतर एक सऊदी पत्रकार की हत्या हुई. इस हत्या की पूरे विश्व में निंदा हुई और इसके बाद कुछ वक़्त तक सऊदी अरब को कूटनीतिक संकट से भी गुज़रना पड़ा.

सऊदी अरब के एक विशेष दस्ते ने पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी का गला घोंटकर उन्हें मार दिया गया, फिर उनके शव के टुकड़े कर दिए.

इस मामले में सुनवाई हुई जिसके बाद आठ लोगों को सज़ा सुनाई गई. हालांकि घटना को अंजाम देने वाले हत्या के मास्टरमाइंड को सज़ा न देने की दुनिया भर में कड़ी आलोचना भी हुई.

लेकिन इस मामले में सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बेहद क़रीबी माने जाने वाले दो लोगों डिप्टी इंटेलिजेंस प्रमुख मेजर जनरल अहमद असीरी और शाही दरबार के मीडिया सलाहकार सऊद अल-क़हतानी को किंग सलमान ने इसी मामले की वजह से बर्ख़ास्त किया.

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लुजैन अल हथलोल के परिवार के अनुसार जब उन्हें जेल में यातना दी जा रही थी उस दौरान सऊद अल-क़हतानी वहीं मौजूद थे. लुजैन के परिवार का कहना है कि उन्होंने बताया था कि अल-क़हतानी ने उन्हें बलात्कार की धमकी दी और मार कर शव को गटर में फेंकने की बात की.

मानवाधिकारों के लिए काम कर रहे संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने सऊदी अधिकारियों पर ख़ुद पर लगे आरोपों के मामले में लीपापोती करने का आरोप लगाया है.

संगठन का कहना है, "साल 2018 में सऊदी एजेंटों ने जमाल ख़ाशोज्जी की बर्बर हत्या कर दी थी. इस बात को दो साल हो गए हैं लेकिन अब तक वरिष्ठ अधिकारियों को इस हत्या के लिए ज़िम्मेदार नहीं बनाया गया है."

"तब से लेकर अब तक सऊदी अरब ने मानवाधिकारों का हनन करने वाले देश के रूप में अपनी छवि को बदलने के लिए जानबूझ कर मनोरंजन के कार्यक्रम, सांस्कृतिक कार्यकम और खेल स्पर्धाओं के आयोजन में अरबों डॉलर ख़र्च किए हैं."

शाही दरबार के मीडिया सलाहकार सऊद अल-क़हतानी

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जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या की जांच करने वाली संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत एग्ने कालामार्ड ने जी20 में शामिल देशों से अपील की है कि वो इस मामले में नैतिक रुख़ आपनाएं. एग्ने का कहना है कि क्राउन प्रिंस सलमान को इस क़त्ल के लिए ज़िम्मेदार माना जाना चाहिए.

वो कहती हैं, "सच बात तो ये है कि किसी भी देश को अपनी ज़िम्मेदारियों से बचना नहीं चाहिए."

ख़ाशोज्जी की मंगेतर हतीजे जेंग्गिज़ ने बीबीसी को बताया कि अगर सामान्य दिनों की तरह जी20 देश सऊदी अरब के साथ अपने संबंध बढ़ाते हैं तो इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता.

वो कहती हैं, "उन्हें कुछ करना चाहिए, मुझे न्याय चाहिए. और ये केवल मेरी बात नहीं है, मैं उन औरतों के लिए भी न्याय की मांग कर रही हूं जो वहां की जेलों में बंद हैं. मैं उनके लिए रिहाई की मांग कर रही हूं."

ख़ाशोज्जी की मंगेतर हतीजे जेंग्गिज़

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ब्रितानी सरकार का कहना है कि उन्होंने इस 'जघन्य हत्या' को लेकर बार-बार न्याय की मांग की है.

ब्रिटेन ने जिन 20 सऊदी नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए हैं उनमें से एक सऊद अल-क़हतानी भी हैं. सरकार का कहना है, "उन पर यात्रा प्रतिबंध के साथ-साथ उनकी संपत्ति पर भी प्रतिबंध लगाया गया है. वो वरिष्ठ अधिकारी हैं जिन्होंने इस हत्या की योजना बनाई और इसे अंजाम देने वाले 15 लोगों के दस्ते को संचालित किया."

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तीसरा - कभी न ख़त्म होने वाला युद्ध

बीते पांच साल से सऊदी अरब यमन में विद्रोहियों के साथ युद्ध कर रहा है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इस युद्ध ने अब तक की सबसे भयंकर मानवीय त्रासदी को जन्म दिया है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार इस युद्ध में शामिल दोनों पक्ष युद्ध अपराध कर रहे हैं.

सऊदी अरब के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता वाली यमन सरकार का समर्थन कर रही है. लेकिन गठबंधन सेना के हवाई हमलों में बड़ी संख्या में आम नागरिकों की मौत हो रही है जिसकी व्यापक आलोचना हो रही है.

सितंबर में संयुक्त राष्ट्र के एक्सपर्ट्स की एक टीम ने कहा था कि खेतों और बाज़ारों में हो रहे हमलों में 'बड़ी संख्या में आम नागरिक मर रहे हैं.' हालांकि सऊदी अरब ने इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज किया है और कहा है कि उन्होंने हमलों में कभी आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाया.

ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि जी20 देशों को सऊदी अरब पर इस बात का दबाव बनाना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र की टीम को वो यमन और रियाद में मौजूद गठबंधन सेना के मुख्यालय में जाने दें.

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मानवाधिकार समूहों और सहायता एजेंसियों ने अपील की है कि सऊदी अरब को हथियार बेचना बंद करने की ज़रूरत है.

यमन में सेव द चिल्ड्रेन के निदेशक ज़ेवियर जूबर्ट कहते हैं, "एक तरफ़ सऊदी अरब के नेतृत्व में हो रहे जी20 देशों के सम्मेलन में विश्व के नेता शिरकत करने वाले हैं तो दूसरी तरफ़ यमन में बच्चे अपने ही घरों में डर के साये में जी रहे हैं. वहां युद्ध जारी है जो उनके अपने लोगों को मौत दे रहा है."

ज़ेवियर जूबर्ट ने जी20 देशों से अपील की है कि वो सऊदी अरब के साथ किए गए हथियारों के सौदों को रद्द करें.

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ऑक्सफै़म के एक आकलन के अनुसार, जी20 देशों द्वारा सऊदी को सामूहिक रूप से बेचे जाने वाले हथियारों की क़ीमत उस राशि का तीन गुना है जो उन्होंने सहायता में दी है.

ज़ेवियर कहते हैं, "इस युद्ध में हथियारों की बिक्री आग में घी का काम कर रही है. पहले के महीनों की तुलना में जून में हवाई हमलों में हताहत होने वाले बच्चों की संख्या में पांच गुना इज़ाफ़ा हुआ है."

इसी सप्ताह जर्मनी ने सऊदी अरब को हथियार बेचने पर पाबंदी लगा दी थी. सऊदी अरब के विदेश मंत्री आदिल अल-ज़ुबैर ने जर्मनी के इस क़दम की आलोचना की है और यमन में जारी युद्ध को वैध बताया है.

उन्होंने जर्मन समाचार एजेंसी डीपीए को बताया, "हम कई देशों से हथियार ख़रीद सकते हैं और हम ऐसा ही कर रहे हैं. यह कहना कि हम सऊदी अरब को हथियार नहीं बेचेंगे, इससे हमें कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता."

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