कोरोना वायरस: नेपाल कैसे जूझ रहा है संक्रमण के मामलों से

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- Author, गुरप्रीत सैनी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत ने कोरोना महामारी के बीच नेपाल को 23 टन ज़रूरी दवाइयां भेजी हैं. नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस मदद के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शुक्रिया कहा है.
जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत-नेपाल के बीच ख़ास रिश्ता है और भारत कोविड-19 की लड़ाई में नेपाल के साथ खड़ा है.
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भारत ने जो दवाइयां भेजी उनमें 3.2 लाख पैरासिटामोल और 2.5 लाख हाइड्रोक्लोरोक्वीन की डोज शामिल है.
कोरोना वायरस नेपाल में भी पहुंच चुका है. नेपाली स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से गुरुवार रात जारी आँकड़ों के मुताबिक़ नेपाल में 48 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं.
नेपाल के लिए राहत की बात ये है कि वहां अभी तक कोरोना वायरस से किसी की मौत नहीं हुई है और 10 लोग इलाज के बाद ठीक होकर अपने घर लौट चुके हैं.
नेपाल में कोरोना का जो सबसे पहला मामला सामने आया था, वो 81 साल की एक महिला का था. ये संक्रमित महिला ब्रिटेन से लौटी थीं.
उनका 58 साल का बेटा भी कोरोना संक्रमित मिला था. हालांकि ये दोनों इलाज के बाद ठीक होकर गुरुवार को घर लौट गए.
बीबीसी नेपाली सेवा के केशव कोइराला ने वहाँ की स्थिति के बारे में ये जानकारी दी है

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कोरोना के सबसे ज़्यादा मामले पूर्वी नेपाल के उदयपुर ज़िले में सामने आए हैं.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी है कि उदयपुर में 28 कोरोना संक्रमित पाए गए हैं.
उदयपुर में संक्रमित मिले लोगों में से कई भारतीय नागरिक हैं. इनमें से कई लोग मस्जिद में रह रहे थे.
पिछले हफ्ते ही उदयपुर ज़िले में 12 से ज़्यादा भारतीय नागरिक कोरोना पॉज़िटिव मिले थे. इनके संपर्क में आए कुछ अन्य भारतीय और नेपाली लोग बाद में कोरोना से संक्रमित निकले.
इससे पहले परसा ज़िले के बीरगंज में भी तीन भारतीय नागरिक कोरोना से पॉज़िटिव पाए गए थे.

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ये लोग भी मस्जिद में रह रहे थे और धार्मिक आयोजन में हिस्सा लेने के लिए नेपाल आए थे.
नेपाल के सामने चुनौतियां
कई लोग भारत-नेपाल की सीमाओं से ऐसे ही घुस आए, वो लोग क्वारंटाइन में भी नहीं रहे.
उनके मुताबिक़ लॉकडाउन के बावजूद पिछले महीने नेपाल में कुछ ऐसे लोगों ने प्रवेश किया जो पहले से कोरोना से संक्रमित थे.

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उनमें से कई लोग ग्रामीण इलाक़ों में स्थित अपने घर चले गए थे. इसलिए उनकी ट्रैकिंग और ट्रेसिंग करना सरकार के लिए चुनौती बन गया है.
ग्रामीण नेपाल में कोरोना वायरस पहुंचा तो वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए ये एक बड़ी चुनौती होगी.
कोरोना से निपटने की कोशिशें

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नेपाल में साढ़े 12 हज़ार से ज़्यादा लोगों को क्वारंटाइन में रखा गया है. वहीं कोरोना के 89 संदिग्धों को आइसोलेशन में रखा गया है.
नेपाल सरकार उन सभी लोगों के टेस्ट कर रही है, जो भारत और दूसरे देशों से लौटे हैं. साथ ही इन लोगों के संपर्क में आए लोगों की भी टेस्टिंग की जा रही है.

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देश में अबतक 9 हज़ार से ज़्यादा पीसीआर टेस्ट किए गए हैं. जबकि 38 हज़ार से ज़्यादा रैपिड टेस्ट किए गए हैं.
नेपाल सरकार के मुताबिक़, सभी संक्रमित लोगों में हल्के या ना के बराबर लक्षण मिलें. किसी में भी गंभीर लक्षण नहीं थे. इसने नेपाल सरकार की चिंता और चुनौती दोनों को ही बढ़ा दिया है.
भारत से एक दिन पहले लॉकडाउन किया

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किसी भी अन्य देश की तरह ही नेपाल के सामने भी कोविड-19 एक चुनौती की तरह खड़ा है.
इस चुनौती से निपटने और मामलों को बढ़ने से रोकने के लिए पूरे नेपाल में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया है.
भारत में लॉकडाउन से एक दिन पहले ही नेपाल में लॉकडाउन घोषित किया गया था. प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने लॉकडाउन ख़त्म करने की कोई तारीख़ तय नहीं की है.
उनका कहना है कि नेपाल में अगले आदेश तक लॉकडाउन जारी रहेगा. पड़ोसी भारत में लगातार बढ़ते मामलों के देखते हुए नेपाल और चौकसी बरत रहा है.
सभी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को भी सील कर दिया गया है. हवाइअड्डे भी बंद हैं.
नेपाल के कई नागरिक ओमान, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, क़तर, साइप्रस, बहरीन जैसे देशों में भी रहते हैं.
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इन देशों के नेताओं से बात कर नेपाली नागरिकों का ध्यान रखने की अपील की है.
तैयारी

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नेपाल के विभिन्न प्रांतों में खास तौर पर कोरोना के इलाज के लिए अस्पताल तय कर दिए गए हैं, जहां कोरोना मरीज़ों और संदिग्ध मरीज़ों को रखा जा रहा है.
नेपाल की स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट के मुताबिक, 25 हब अस्पतालों को इसके लिए चिन्हित किया गया है.
कुछ अस्थायी अस्पताल भी बनाए गए हैं. साथ ही देश भर में 15 लैब पीसीआर टेस्ट कर रही हैं. सरकार के मुताबिक़ उनके पास पर्याप्त दवाइयां हैं.
नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र फ़ुयाल के मुताबिक़ नेपाल का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से बेहतर हुआ है. "नेपाल में कई अस्पताल हैं, हालांकि वेंटिलेटर्स सीमित संख्या में हैं."बीबीसी नेपाली के केशव कोइराला बताते हैं, "डॉक्टरों के लिए सुरक्षा उपकरण यानी पीपीई की कमी की बात भी सामने आई है. सुरक्षा उपकरणों के लिए नेपाल, चीन से भी संपर्क कर रहा है. नेपाल में पहले टेस्टिंग कम किए जाने को लेकर भी सवाल उठे थे. जिसके बाद सरकार के मुताबिक़,अब सभी प्रांतों में टेस्ट की संख्या बढ़ाई गई है और अब सभी संदिग्ध मरीज़ों (जिनकी ट्रेवल हिस्ट्री है और जो उनके संपर्क में आए हैं) के टेस्ट किए जा रहे हैं."नेपाल में कम मामलों की वजह कई डॉक्टर नेपालियों के मज़बूत इम्यून सिस्टम को भी मान रहे हैं. उनका मानना है कि इसलिए शायद पॉज़िटिव मामलों में भी किसी को गंभीर लक्षण नहीं है.इसके अलावा ये भी कहा जा रहा है कि दूसरे देशों की तरह नेपाल में मेट्रो या कोई दूसरा बड़ा ट्रांसपोर्ट सिस्टम नहीं है, इसलिए वायरस इतने बड़े पैमाने पर अबतक नहीं फैला है.

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