कोरोना वायरस: न्यूयॉर्क जानलेवा बीमारी की चपेट में कैसे आया?

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    • Author, अनंत प्रकाश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

न्यूयॉर्क सिटी. चमचमाती सड़कें, बहुमंज़िला इमारतें और चकाचौंध ने दुनिया को बताया कि एक शहर क्या होता है और कैसा दिखता है.

कहते हैं कि इस शहर की रफ़्तार कभी धीमी नहीं होती है. 24 घंटे, सातों दिन ये शहर घंटेघर में लगी घड़ी की तरह अनवरत चलता रहता है.

लेकिन कोरोना वायरस ने इस शहर की रफ़्तार को थाम दिया है.

सड़कें सूनी पड़ी हैं. गलियां खाली हैं. और लोग घरों में क़ैद हैं.

न्यूयॉर्क के मैनहट्टन इलाक़े में रहने वालीं इप्सिता दत्ता के लिए ये सब किसी बुरे सपने से कम नहीं है.

अब से लगभग पांच साल पहले कोलकाता से न्यूयॉर्क सिटी आने वालीं इप्सिता बताती हैं कि आज तक उन्होंने न्यूयॉर्क की सड़कों पर पसरा ऐसा सूनापन नहीं देखा.

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न्यूयॉर्क पर कोरोना का असर

कोरोना वायरस की वजह से न्यूयॉर्क में अब तक 131 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, 14000 से अधिक लोग इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं.

अगर उम्र वर्ग की बात की जाए तो इस शहर के युवाओं पर इसका सबसे ज़्यादा असर पड़ा है. अब तक कुल संक्रमित लोगों में लगभग पचास फ़ीसदी लोगों की उम्र 18 से 44 के बीच है.

ये सभी आंकड़े 24 मार्च के हैं. यहां तारीख़ का ज़िक्र करना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि न्यूयॉर्क में इस वायरस के संक्रमण की दर हर रोज़ दोगुनी होने की ओर है.

इसके चलते हुए न्यूयॉर्क सिटी के मेयर कुओमो ने शहर में हर तरह की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है. वहीं, न्यूयॉर्क के गवर्नर ने कोरोना वायरस को बुलेट ट्रेन की तरह बताया है.

गवर्नर एंड्र्यू कुआमो ने मंगलवार को कहा कि कोरोना का संक्रमण बुलेट ट्रेन की गति से भी ज़्यादा तेज़ी से फैल रहा है.

न्यूयॉर्क की आबादी ही बड़ा ख़तरा

न्यूयॉर्क अमरीका का सबसे ज़्यादा आबादी वाला शहर है. लेकिन अब इस शहर में रहने वाले लोग ही ख़ुद के लिए ख़तरा बनते हुए दिख रहे हैं.

स्टेनफ़ॉर्ड यूनिवर्सिटी में महामारियों का अध्ययन करने वाले डॉ. स्टीवन गुडमैन मानते हैं कि ऐसी परिस्थितियों में सघन आबादी ही एक दुश्मन का रूप ले लेती है.

अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स में छपे लेख में डॉ. गुडमेन कहते हैं, "इस तरह की स्थितियों में सघन आबादी ख़तरनाक साबित होती है. ज़्यादा आबादी वाले इलाक़े जहां बहुत सारे लोग एक ही समय में एक-दूसरे से मिल जुल रहे होते हैं. वहां, ये वायरस सबसे तेज़ी से फैलता है."

न्यूयॉर्क की मेट्रो ट्रेन, जिसे सबवे कहा जाता है, उसमें हर रोज़ पचास लाख लोग यात्रा करते हैं.

जबकि दिल्ली मेट्रो में पचास लाख लोग तीन दिन में भी यात्रा नहीं करते हैं.

ऐसे में समझा जा सकता है कि न्यूयॉर्क सिटी अमरीका में कोरोना वायरस का केंद्र क्यों बनकर उभर रहा है.

इस शहर में छोटी सी जगह में बने छोटे-छोटे फ़्लैट्स में कई हज़ार लोग रहते हैं.

वे एक ही खेल के मैदान में खेलने जाते हैं, स्विमिंग करने जाते हैं, और शॉपिंग करने एक ही जगह पर जाते हैं.

ऐसे में एक छोटी सी जगह पर इतने सारे लोगों का एक साथ आना वायरस के लिहाज़ से काफ़ी मुफ़ीद साबित होता है.

इटली जहां कोरोना वायरस की वजह से अब तक छह हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. वहां, न्यूयॉर्क में प्रति व्यक्ति कोरोना वायरस संक्रमण के मामले इटली से भी अधिक हैं.

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कैसे हैं न्यूयॉर्क में रहने वालों के हालात

बीबीसी ने न्यूयॉर्क सिटी और इसके नज़दीकी प्रांतों में रहने वाले लोगों से बात करके वहां के मौजूदा हालातों का ज़ायजा लेने की कोशिश की है.

कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ने वालीं इप्सिता बताती हैं, "इस समय न्यूयॉर्क सिटी किसी भुतहा शहर में तब्दील हो चुकी है. ब्रॉडवे थिएटर जो यहां की पहचान जैसे हैं, बंद हो चुके हैं. लोगों में डर इतना बैठा हुआ है कि एक-दूसरे से बात करना भी मुश्किल होता जा रहा है."

इप्सिता इस समय अपने कुछ सहयोगियों और साथियों के साथ यूनिवर्सिटी कैंपस में रह रही हैं.

वो कहती हैं, "जब हम कमरे से बाहर निकलते हैं तो हाथ में ग्लव्स होते हैं और मुंह पर मास्क होता है. टहलते समय भी लोग एक-दो मीटर की दूरी बनाकर चल रहे हैं. अगर ग़लती से भी कोई ज़रा पास आ जाएं तो लोग डर जाते हैं."

"यूनिवर्सिटी में क्लासेज़ बंद हो चुकी हैं. डर का आलम ये है कि हर किसी को लग रहा है कि कहीं वो पिछले दिनों किसी कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में तो नहीं आया था..."

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बेघर हुए स्टूडेंट

न्यूयॉर्क सिटी में तमाम ऐसे एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस हैं जहां इप्सिता जैसे लाखों छात्र हर साल पहुंचते हैं.

इप्सिता बताती हैं कि कई संस्थाओं ने अपनी डोरमेटरीज़ में बच्चों को रखने से इनकार कर दिया है.

वो कहती हैं, "संक्रमण के ख़तरे को देखते हुए कई जगहों पर छात्रों से डॉरमेटरीज़ (जहां एक ही कमरे में दर्जनों लोग रहते हैं) को खाली करा लिया गया है. ऐसे में उनके लिए रात गुज़ारना भी मुश्किल पड़ रहा है. लेकिन कुछ लोग अपने घरों के दरवाज़े ऐसे छात्रों के लिए खोल रहे हैं."

इसके साथ ही कोरोना वायरस की वजह से उन छात्रों की ज़िंदगी पर भी काफ़ी असर पड़ा है जो अपनी डिग्री पूरी करके नौकरी हासिल करने की कोशिश कर रहे थे.

किस हाल में हैं न्यूयॉर्क में रहने वाले भारतीय

न्यूयॉर्क में रहने वाले भारतीय छात्र और भारतीय मूल के लोगों की 65 फ़ीसदी आबादी क्वींस इलाक़े में रहती है. इसके बाद 12 फ़ीसदी मैनहट्टन, 6.5 फ़ीसदी ब्रुकलिन और 5 फ़ीसदी स्टेटन आइलैंड में रहती है.

संक्रमण के मामलों के लिहाज़ से न्यूयॉर्क के क्वींस इलाक़े में सबसे ज़्यादा तीस फ़ीसदी मामले, ब्रुकलिन में 29 फ़ीसदी और मैनहट्टन में 20 फ़ीसदी मामले नज़र आए हैं. अब तक न्यूयॉर्क शहर में रहने वाले भारतीय छात्र और भारतीय मूल के लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि नहीं हुई है.

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