क़ासिम सुलेमानी की बेटी ने राष्ट्रपति हसन रूहानी से पूछा: 'बदला कौन लेगा?'

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- Author, टीम बीबीसी हिन्दी
- पदनाम, नई दिल्ली
शनिवार को एक तरफ़ जहाँ इराक़ में हज़ारों लोगों की भीड़ ईरानी सैन्य कमांडर जनरल क़ासिम सुलेमानी के जनाज़े में शामिल होने के लिए सड़कों पर थी, उसी समय ईरान में राष्ट्रपति हसन रूहानी कमांडर जनरल सुलेमानी के घर उनके परिवार से हिम्मत बनाए रखने के लिए कह रहे थे.
जब राष्ट्रपति रूहानी कमांडर सुलेमानी के घर पहुँचे तो उनकी बेटी ज़ैनब सुलेमानी ने पूछा: "मेरे पिता की हत्या का बदला कौन लेगा?" तो रूहानी ने जवाब दिया, "हम सब".
कमांडर सुलेमानी की बेटी और राष्ट्रपति रूहानी की यह बातचीत ईरान के सरकारी टीवी चैनल पर प्रसारित की गई है.
रूहानी ने ज़ैनब सुलेमानी को सांत्वना देते हुए कहा, "ख़ुदा आपको सब्र दे. इस दर्द और दुख की घड़ी में ख़ुदा आपके साथ है और इसका इंसाफ़ मिलेगा. हम सब बदला लेंगे, आप इसकी चिंता मत कीजिए."

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ईरान में क्या हो रहा है?
ईरान के प्रमुख शहरों में से एक अहवाज़ में रविवार सुबह हज़ारों लोगों की भीड़ सुलेमानी की शोक सभा में शिरकत करने के लिए जमा हुई.
ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी के अनुसार दक्षिण-पश्चिम में स्थित अहवाज़ शहर में ही इराक़ से कमांडर सुलेमानी के शव को लाया गया है. ईरानी झंडे में लिपटे सुलेमानी के शव को पूरे राष्ट्रीय सम्मान के साथ विमान से उतारा गया. उनके साथ ईरान के पाँच और सैनिकों के शव भी थे.
देखा गया कि अहवाज़ शहर में स्थित मौलवी स्कवायर पर जमा लोग अपना सीना पीटते हुए 'अमरीका मुर्दाबाद' के नारे लगा रहे हैं.

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ईरान की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार देश के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतोल्लाह अली ख़मेनेई ने कहा है कि 'सुलेमानी की हत्या का 'कठोर बदला' लिया जाए'. ख़मेनेई सोमवार को तेहरान यूनिवर्सिटी में सुलेमानी को अंतिम श्रद्धांजलि देंगे जिसके बाद जनरल क़ासिम सुलेमानी के शव को दफ़्न करने के लिए केरमान कस्बे में स्थित उनके घर ले जाया जाएगा.
ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा है कि 'अमरीका ने सुलेमानी की हत्या कर एक बड़ी ग़लती कर दी है'.
लेकिन ईरान की ओर से आ रहीं प्रतिक्रियाओं का जवाब अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने यह कहते हुए दिया है कि 'ईरान ने अगर अमरीका की किसी भी सम्पत्ति को छुआ तो अमरीका इसका बहुत कठोर और बहुत तीव्र जवाब देगा'.

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अमरीका ने कहा- 'हथियार तैयार हैं'
रविवार सुबह डोनल्ड ट्रंप ने ट्वीट किया, "अमरीका ने हाल ही में सैन्य उपकरणों पर दो ट्रिलियन डॉलर ख़र्च किए हैं. हम सबसे विशाल और दुनिया में अब तक सबसे सर्वोत्तम हैं. अगर ईरान ने किसी भी अमरीकी बेस या किसी भी अमरीकी नागरिक को छुआ तो हम इन नए हथियारों में कुछ को ईरान तक भेजने में ज़रा भी हिचकिचाएंगे नहीं."

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ट्रंप ने एक अन्य ट्वीट में यह दावा किया है कि 'अमरीका के पास ईरान के 52 निशानों की एक लिस्ट तैयार है'.
अमरीका के अनुसार 52 नंबर, साल 1979 में अमरीकी दूतावास में ईरान द्वारा एक वर्ष से अधिक समय तक बंधक बनाकर रखे गए लोगों की संख्या से मिलान करने के लिए चुना गया है.
सुलेमानी की मौत के बाद शुरू हुई इस ज़बानी जंग में ईरान राष्ट्रपति रूहानी ने भी कहा है कि 'सुलेमानी की हत्या के परिणाम अमरीकी लोगों को ना सिर्फ़ आज, बल्कि आने वाले वर्षों में भी भुगतने होंगे'.
स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार सुलेमानी की मौत पर ईरान ने तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है.

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ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने शनिवार शाम एक ट्वीट में लिखा कि 'सुलेमानी की मौत पश्चिमी एशिया में अमरीका की दुर्भावनापूर्ण मौजूदगी के अंत की शुरुआत है'.
माना जा रहा है कि ईरानी विदेश मंत्री ने अपने ट्वीट के ज़रिये यह जताने की कोशिश की है कि कमांडर सुलेमानी की हत्या के जवाब में ईरान किस हद तक जाने को तैयार है.
ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी आईआरएनए की रिपोर्ट के मुताबिक़ राष्ट्रपति हसन रूहानी ने फ़ोन पर तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन से बात की है और उनसे कहा है कि सभी पड़ोसी देशों को एकजुट होकर उनके क्षेत्र में अमरीका की मौजूदगी के ख़िलाफ़ काम करना चाहिए.

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ईरानी की बेचैनी
पश्चिम एशिया में ईरानी गतिविधियों को चलाने के प्रमुख रणनीतिकार रहे सुलेमानी की बग़दाद हवाई अड्डे के बाहर हुए अमरीकी हवाई हमले में शुक्रवार को मौत हो गई थी.
इस हमले में उनके साथ नौ अन्य लोग भी मारे गए थे जिनमें कताइब हिज़्बुल्लाह गुट के प्रमुख कमांडर अबु महदी अल-मुहांदिस का भी नाम है.
ईरान जनरल क़ासिम सुलेमानी की हत्या के बाद क़ुद्स फ़ोर्स के नए कमांडर के तौर पर ब्रिगेडियर जनरल इस्माइल क़ानी को नियुक्त कर चुका है.
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य-पूर्व में ईरान के सामने खड़े अमरीका और उसके सहयोगी देशों के बीच व्याप्त तनाव को एक नए स्तर पर पहुँचा दिया है.
सुलेमानी की हत्या के बाद अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने यह कार्रवाई एक बड़े युद्ध को टालने के लिए की क्योंकि सुलेमानी अमरीका के ख़िलाफ़ हमलों की साज़िश रच रहे थे.

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हाल ही में हुए कुछ हमलों के लिए भी अमरीका ने सुलेमानी को ज़िम्मेदार ठहराया था.
सुलेमानी ईरान की बहुचर्चित कुद्स फ़ोर्स के प्रमुख थे. यह फ़ोर्स ईरान द्वारा विदेशों में चल रहे सैन्य ऑपरेशनों को अंजाम देने के लिए जानी जाती है.
सुलेमानी एक सैन्य अधिकारी के तौर पर ईरान के लिए बहुत महत्वपूर्ण थे. वे एक महत्वपूर्ण ख़ुफ़िया अधिकारी थे. उन्हें ईरान का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक चेहरा कहना भी ग़लत नहीं होगा.
सुलेमानी ने वर्षों तक लेबनान, इराक़, सीरिया समेत अन्य खाड़ी देशों में योजनाबद्ध हमलों के ज़रिए मध्य-पूर्व में ईरान और उसके सहयोगियों की स्थिति को मज़बूत करने का काम किया था.
यही वजह है कि ईरान अपने सबसे लोकप्रिय कमांडर की हत्या पर बेचैन है.

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'ग़ैरक़ानूनी आपराधिक हरकत'
संयुक्त राष्ट्र को लिखे एक पत्र में ईरान ने अमरीका के हमले को 'आतंकवादी कार्रवाई' और एक 'ग़ैर-क़ानूनी आपराधिक हरकत' कहा है. वहीं संयुक्त राष्ट्र ने ईरान से संयम बरतने को कहा है.
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत माजिद तख़्त रवांची ने कहा है कि अमरीका ने सुलेमानी की हत्या कर दोनों देशों के बीच बनी युद्ध जैसी उस स्थिति को और आग दिखाई है जो वर्ष 2018 में अमरीका के परमाणु संधि से बाहर जाने से शुरू हुई थी.
अमरीका में भी एक राजनीतिक तबके ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सुलेमानी की हत्या के फ़ैसले की आलोचना की है.
डेमोक्रेट नेता क्रिस वेन हॉलेन ने कहा है कि 'ट्रंप ने अपने इस फ़ैसले के लिए जो तर्क दिए हैं, उन्हें सुनकर यह नहीं समझ आ रहा कि इसे इराक़ और ईरान के साथ अमरीका की स्थिति को अनावश्यक तौर पर और अधिक तनावपूर्ण बनाने वाली घटना क्यों ना कहा जाए'.
उन्होंने यह भी कहा कि इस हमले से अमरीका के हितों पर ख़तरा ज़रूर बढ़ेगा.

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इराक़: सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी भी नाराज़
इराक़ के बग़दाद शहर के एक अन्य हिस्से में, कुछ सरकार-विरोधी प्रदर्शनकारी, कुछ अन्य चीज़ों के बीच, इराक़ में भारी-भरकम ईरानी प्रभाव का अंत करने की माँग कर रहे हैं. लेकिन ये प्रदर्शनकारी अमरीका के हमले से भी नाख़ुश हैं.
इराक़ में भ्रष्टाचार विरोधी इन प्रदर्शनों की शुरुआत अक्टूबर में हुई थी. तभी से इराक़ी सुरक्षा बल हिंसक तरीक़ों से इन प्रदर्शनों को दबाने की कोशिश कर रहे हैं. सैकड़ों प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं और एक बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं.
फिर भी बग़दाद शहर में स्थित मुख्य प्रदर्शनस्थल 'तहरीर चौक' पर जमा इन आम इराक़ी प्रदर्शनकारी ने शनिवार को कहा कि अमरीका को उनकी ज़मीं पर इस तरह का हमला नहीं करना चाहिए था.
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