हॉन्ग कॉन्ग: रोक के बावजूद हज़ारों लोग सड़कों पर उतरे

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हॉन्ग कॉन्ग में प्रदर्शन पर प्रतिबंध के बावजूद शनिवार को हज़ारों लोग सड़कों पर उतरे जिन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस, रबर की गोलियों और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया.
प्रदर्शनकारियों ने भी जवाब में आगजनी की, दंगारोधी पुलिस पर पेट्रोल बम फेंके और संसद की इमारत पर हमला किया.
दरअसल शनिवार को चीन के उस फैसले को पांच साल पूरे हो गए जब उसने हॉन्ग कॉन्ग में पूर्ण लोकतांत्रिक चुनावों पर रोक लगा दी थी. इसी मौके पर ये प्रदर्शन हुए.
शुक्रवार को कई लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं और सांसदों को गिरफ्तार कर लिया गया था.
हॉन्ग कॉन्ग में कई महीनों से प्रदर्शन हो रहे हैं. ये प्रदर्शन एक विवादित प्रत्यर्पण बिल के खिलाफ शुरू हुए थे, जिसके तहत अभियुक्तों को मुकदमे के लिए चीन ले जाने का प्रावधान था. इस बिल को फिलहाल वापस ले लिया गया है.
धीरे-धीरे इस विरोध ने लोकतंत्र समर्थन आंदोलन की शक्ल ले ली और इस दौरान हुए प्रदर्शनों में पुलिस और लोगों के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं.

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शनिवार को क्या हुआ?
प्रदर्शनकारी हॉन्ग कॉन्ग के अलग-अलग इलाकों में इकट्ठा हुए. इस दौरान बारिश भी हो रही थी. लोगों ने हाथ में छतरियां ली हुई थीं और चेहरे पर मास्क लगाए हुए थे.
प्रदर्शनों के 13वें हफ्ते में प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे थे - "हॉन्ग कॉन्ग के साथ खड़े हों" और "आज़ादी के लिए लड़ो". प्रदर्शनकारी सरकारी दफ्तरों, चीन की सेना के स्थानीय मुख्यालय और शहर की संसद के बाहर जमा हुए थे.
एक इलाक़े में कुछ प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों पर बम फेंके. इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने हॉन्ग कॉन्ग की नेता कैरी लैम के आधिकारिक आवास के नज़दीक भी मार्च किया.
पुलिस ने प्रमुख इमारतों के बाहर बैरिकेड लगा दिए थे और वहां जाने वाले रास्ते बंद कर दिए थे. प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और लोगों पर नीले रंग के पानी की बौछारें की.

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रंग वाला पानी इसलिए इस्तेमाल किया जाता है, ताकि पुलिस प्रदर्शनकारियों को आसानी से पहचान सके.
22 साल के एक छात्र एरिक ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "ये कहना कि हम प्रदर्शन ना करें, ये कहने जैसे है कि हम सांस ना लें. मुझे लगता है कि लोकतंत्र के लिए लड़ना मेरा कर्तव्य है. शायद हम जीत जाएं, शायद हम हार जाएं, लेकिन हम लड़ेंगे."
कहा जा रहा है कि कई दिनों से जारी इन प्रदर्शनों का कोई नेता नहीं है.
शुक्रवार को पुलिस ने आम लोगों से अपील की थी कि वो "हिंसक प्रदर्शनकारियों" से दूर रहें और पुलिस ने चेतावनी भी दी कि लोग प्रतिबंधित मार्च में शामिल ना हों.
पुलिस ने शनिवार को कई लोगों को गिरफ्तार भी किया.

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आंसू गैस, रबर की गोलियां और ईंटों के ठेले
हॉन्ग कॉन्ग में मौजूद बीबीसी संवाददाता डैनी विन्सेंट ने बताया कि युवा लोगों का एक हुजूम सड़कों पर उतर आया और सरकार के मुख्यालयों को घेर लिया. ज़्यादातर सप्ताहंत जैसे लोग तैयारी से आए थे.
प्रदर्शनकारी ठेले लेकर आए, जिनपर टूटी हुई ईंटे भरी थीं. इन ठेलों को सबसे आगे खड़ा कर दिया गया. लोगों ने फिर ये ईंटे बरसाईं.
पुलिस ने आंसू गैस के गोले लोगों पर दागे और इसके बाद रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया. पहले गोलियां ज़मीन की ओर चलाईं और कुछ बार सीधे लोगों की तरफ.
फिर पुलिस को जवाब में मिले पेट्रोल बम. लोगों ने बैरिकेड पर पेट्रोल बम फेकें और कई बार खाली जगह पर.
करीब तीन महीने से प्रदर्शन करते-करते कई युवा प्रदर्शनकारी माहिर हो गए हैं. वो रणनीति के साथ, सुनियोजित होकर आते हैं और हिंसा के लिए तैयार रहते हैं.

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किन लोगों को गिरफ्तार किया गया था?
24 घंटे की छापेमार कार्रवाई के दौरान कम से कम तीन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था. इनमें 23 साल के जानेमाने कार्यकर्ता जोशुआ वोंग और तीन सासंद शामिल हैं.
वोंग 2014 में हुए आंदोलन के पोस्टर बॉय बनकर उभरे थे. तबसे वो काफी लोकप्रिय हो गए थे. उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया गया है.
बीबीसी से बातचीत में जोशुआ वोंग कहा, "प्रदर्शन करना और सड़कों पर इकट्ठा होना हॉन्ग कॉन्ग के लोगों का मौलिक अधिकार है. लोग आगे भी सड़कों पर उतरेंगे और राष्ट्रपति शी जिनपिंग और बिजिंग से कहेंगे कि अब लोगों की आवाज़ सुनने का वक्त है."

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हॉन्ग कॉन्ग चीन का हिस्सा है, लेकिन उसे "विशेष स्वायत्तता" मिली हुई है. लेकिन ये स्वायत्तता 2047 में खत्म हो जाएगी और हॉन्ग कॉन्ग में रहने वाले कई लोग नहीं चाहते कि हॉन्ग कॉन्ग "किसी अन्य चीनी शहर" जैसा बन जाए.
चीन इन प्रदर्शनों की निंदा करता है और इसे "चरमपंथ जैसा" मानता है. इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें भी हुई हैं. जिसमें दोनों पक्षों को चोटें आई हैं.
कार्यकर्ताओं में चिंता बढ़ रही है कि चीन हस्तक्षेप करने के लिए सेना का इस्तेमाल कर सकता है. गुरुवार को चीन ने हॉन्ग कॉन्ग में सेना की एक नई टुकड़ी भेजी. हालांकि चीन के सरकारी मीडिया में इस कदम को सालाना रूटीन रोटेशन बताया गया.
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