पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अफरा-तफरी: कब, कैसे क्या हुआ?

तहरीक-ए-लब्बैक के प्रदर्शनकारी

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    • Author, शुमाइला ज़ाफरी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद से

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के पास फ़ैज़ाबाद इंटरचेंज के पास ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन कर रहे तहरीक-ए-लब्बैक के प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए शनिवार की सुबह सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की.

कार्रवाई के दौरान सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं. दरअसल यह विरोध प्रदर्शन पिछले 20 दिनों से चल रहा था.

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जानते हैं कि इन 20 दिनों के दौरान अब तक क्या क्या हुआ

  • पाकिस्तान में इस्लामाबाद के पास तहरीक-ए-लब्बैक (टीएलपी) के धरने में "ईशनिंदकों को मौत" की मांग की जा रही है.
  • टीएलपी पार्टी का गठन उस विरोध आंदोलन से हुआ था जिसे पंजाब के पूर्व गवर्नर के हत्यारे मुमताज़ क़ादरी के सम्मान में आयोजित किया गया था. क़ादरी गवर्नर के बॉडीगार्ड भी थे.
  • मुमताज़ क़ादरी ने 2011 में सख्त ईश निंदा क़ानूनों में बदलाव के आह्वान पर गवर्नर की हत्या कर दी थी.
  • तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान पार्टी का गठन कराची में अगस्त 2015 में हुआ था, लेकिन तब चुनाव आयोग में इसे रजिस्टर नहीं किया गया था.
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  • सितंबर 2017 में आयोजित लाहौर की एनए-120 सीट पर हुए उप चुनाव में इसने निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन किया.
  • कुछ हफ़्ते बाद ही चुनाव आयोग में इसका रजिस्ट्रेशन हो गया और इसे चुनाव चिह्न भी मिल गया.
  • 26 अक्तूबर को टीएलपी के उम्मीदवार ने पेशावर उप-चुनाव में आश्चर्यजनक रूप से 7.6 फ़ीसदी वोट हासिल किए.
  • पार्टी इस्लामी शरीयत कानून के सख्त नियमों की वकालत करती है, और पैगम्बर मुहम्मद की सर्वोच्चता का मजबूत रक्षक होने का दावा करती है.
  • टीएलपी के नेता अल्लामा खादिम हुसैन रिज़वी इस्लाम के बरेलवी विचारधारा के एक तेज़तर्रार मौलवी हैं.
  • 2 अक्तूबर को पाकिस्तान की संसद ने चुनाव सुधार विधेयक 2017 को पारित किया, इसमें निर्वाचित प्रतिनिधियों के शपथ से खात्मे नबूवत या पैगम्बर मोहम्मद वाले खंड को हटा दिया गया था.
  • दो दिन बाद, धार्मिक समूहों/ पार्टियों के विरोध ने सरकार को इस खंड को वापस जोड़ने के लिए मजबूर किया, नेशनल असेंबली में बताया गया यह एक "क्लेरिकल ग़लती" थी.
तहरीक-ए-लब्बैक के प्रदर्शनकारी

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  • तहरीक-ए-लब्बैक ने कानून मंत्री, ज़ाहिद हमीद को चुनावी शपथ में बदलाव का दोषी ठहराया और कहा कि यह ईशनिंदा के समान है जिसके लिए उन्होंने कानून मंत्री के इस्तीफ़े की मांग की.
  • 5 नवंबर को टीएलपी कार्यकर्ताओं और एक और धार्मिक पार्टी सुन्नी तहरीक ने फ़ैजाबाद इंटरचेंज पर अपना धरना शुरू किया, यह रावलपिंडी और इस्लामाबाद के बीच यातायात का मुख्य रास्ता है. उनकी मुख्य मांग कानून मंत्री ज़ाहिद हमीद को हटाने की थी.
  • इसके बाद के हफ़्ते में सरकार ने बातचीत कर इस मुद्दे को हल करने की कोशिश की, लेकिन यह सफ़ल नहीं हुआ.
  • प्रदर्शनकारियों को किसी और जगह पर जाने को कहा गया था लेकिन उन्होंने मना कर दिया. सरकार ने समयसीमा तय की लेकिन उन्हें हटाने में कामयाबी नहीं मिली.
  • 20 नवंबर को इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि वो तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) प्रदर्शनकारियों को फ़ैजाबाद इंटरचेंज से क्यों नहीं हटा पा रहे हैं.
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  • 21 नवंबर को पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक पार्टियों के धरने पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इस्लामाबाद पुलिस आईजी, पंजाब आईजी, अटॉर्नी जनरल को नोटिस जारी किया और आंतरिक और रक्षा सचिवों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी.
  • 23 नवंबर को पाकिस्तान की प्रमुख ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की जिसमें कहा गया कि फ़ैजाबाद इंटरचेंज को ब्लॉक करने वाले प्रदर्शकारियों एक राजनीतिक एजेंडे के तहत ऐसा कर रहे हैं.
  • 24 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रदर्शनकारियों को लोगों के जीवन में बाधा डालने और उन्हें नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. इसके साथ ही सरकार ने प्रदर्शनकारियों को इंटरचेंज खाली करने के लिए अंतिम समयसीमा जारी कर दी.
  • 25 नवंबर को अंतिम समयसीमा के ख़त्म होने पर पुलिस कार्रवाई शुरू की गई.

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