भारतीय मूल का समलैंगिक बन सकता है आयरलैंड का पीएम

लीयो वरदाकर

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इमेज कैप्शन, लीयो वरादकर की जड़ें भारत में मुंबई से है.

आयरलैंड के स्वास्थ्य मंत्री लीयो वरादकर ने 2015 में स्वीकार किया था कि वह गे हैं.

लीयो की जड़ें भारत से हैं. वह मुंबई में जन्मे एक डॉक्टर के बेटा हैं. लीयो प्रधानमंत्री की रेस में चल रहे हैं और वह एंडा केनी की जगह ले सकते हैं.

लीयो समलैंगिक विवाह का समर्थन करते हैं. उन्होंने अपने गे होने की बात को कबूल करते हुए कहा था, ''यह कोई गोपनीय नहीं है.'' लीयो ने अपने 36वें जन्मदिन पर मंत्री बनने के बाद गे होने की बात कबूली थी.

आयरलैंड
इमेज कैप्शन, आयरलैंड की उपप्रधानमंत्री

यदि लीयो आयरलैंड के पीएम चुने जाते हैं तो भारतीय मूल के किसी देश के प्रधानमंत्री बनने वालों की फेहरिस्त में वह शामिल हो जाएंगे.

38 साल के वरादकर अपने पिता अशोक वरादकर के सबसे छोटे बेटे हैं. अशोक 1960 के दशक में इंग्लैंड के नेशनल हेल्थ सर्विस में काम करते थे. यहीं पर उनकी मुलाकात एक नर्स से हुई और दोनों ने बाद में शादी कर ली थी.

वरादकर राजनीति में आने से पहले एक डॉक्टर थे. 2007 में वह सांसद चुने गए. जब उन्होंने गे होने की बात कबूली तो उनके पिता को बड़ी हैरानी हुई थी. वरदाकर के अलावा आयरलैंड के हाउसिंग मंत्री सिमोन कोवनी भी प्रधानमंत्री की रेस में हैं. इस पर दो जून को फ़ैसला होना है.

सिमोन कोवनी

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इमेज कैप्शन, वरादकर के प्रतिद्वंद्वी हाउसिंग मंत्री सिमोन कोवनी

6 साल प्रधानमंत्री की कुर्सी पर रहने के बाद केनी ने इस हफ़्ते फाइन जेअल (लिबरल-कन्जर्वेटिव पार्टी ऐंड क्रिस्चन डेमोक्रेटिक पॉलिटिकल पार्टी इन आयरलैंड) के नेता से इस्तीफा दे दिया था. संसद जब तक नए नेता का चुनाव नहीं कर लेती है तब तक केनी पीएम की ज़िम्मेदारी संभालते रहेंगे.

केनी के इस्तीफे के बाद वरादकर ने कहा था कि पार्टी में उन्हें पर्याप्त समर्थन है. वरादकर ने कहा था कि उनके समर्थन में कई मंत्री हैं.

एंडा केनी

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इमेज कैप्शन, आयरलैंड के प्रधानमंत्री एंडा केनी

हालांकि वरादकर के प्रतिद्वंद्वी कोवनी का कहना है कि लीयो के समर्थन में लोग हैं लेकिन अभी काफी समय बाक़ी है. उन्होंने कहा, ''हम देखते हैं कि आने वाले दो हफ़्तों में क्या होता है.''

आयरलैंड की उपप्रधानमंत्री ने वरादकर का समर्थन किया है. वरादकर ने अपना कैंपेन भी शुरू कर दिया है. अभी उनके समर्थन में पार्टी के 45 संसदीय सदस्य हैं. वरादकर ने अपने समर्थकों से अभियान की शुरुआत करते हुए कहा था वह सभी सदस्यों को एकजुट देखना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि अगर वह पीएम चुने जाते हैं तो लोगों के लिए काम करेंगे.

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