बैंक के ग़ैर ज़िम्मेदाराना बर्ताव पर आयरलैंड में गुस्सा

आयरलैंड में घाटे में चल रहे एक बैंक के गैरज़िम्मेदाराना बर्ताव को लेकर विवाद हो गया है.
साल 2008 में एंग्लो-आयरिश बैंक दिवालिया हो गया था और आयरलैंड की सरकार ने उसके कर्ज़े चुकाने की गारंटी ले ली थी.
इसकी वजह से आयरलैंड को यूरोपीय यूनियन और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से 66.26 खरब रुपये का कर्ज़ लेना पड़ा था.
इन सबके चलते पिछले पांच साल से आयरलैंड निवासियों को भारी टैक्स चुकाने पड़ रहे हैं और खर्चों में कटौती का <link type="page"><caption> ख़ामियाजा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/06/130611_germany_sleep_dp.shtml" platform="highweb"/></link> उठाना पड़ रहा है.
हाल ही में <link type="page"><caption> बैंक के सुरक्षा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/06/130618_swiss_banks_vr.shtml" platform="highweb"/></link> कैमरों के टेप जारी हुए हैं जिनमें बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को केंद्रीय <link type="page"><caption> बैंक से पैसे</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/03/130314_cobrapost_banks_ac.shtml" platform="highweb"/></link> लेने के बारे में मज़ाक करते सुना जा सकता है.
आयरलैंड के उप-प्रधानमंत्री ने कहा है कि वह इस जानकारी से बेहद गुस्से में हैं.
बस पैसा लाओ
एंग्लो-आयरिश बैंक के फ़ोन और सुरक्षा तंत्र द्वारा बैंक के पूर्व वरिष्ठ बैंकर जॉन बोवे और बैंक के वरिष्ठ अधिकारी पीटर फ़िट्जगेराल्ड की बातचीत रिकॉर्ड की गई है.
इसमें वह बात कर रहे हैं कि उन्होंने केंद्रीय बैंक से 5.47 खरब रुपये की राशि मांगी है.
बोवे कहते हैं, “हकीकत यह है कि हमें इससे कहीं ज़्यादा की ज़रूरत है.”
केंद्रीय बैंक के लिए उनकी रणनीति है, “आप उन्हें इसमें शामिल कर लो, उनसे एक बड़ा सा चेक लिखवा लो और उन्हें समर्थन करना पड़ेगा, यह उनका पैसा है.”
इस जानकारी के सामने आने के बाद दोनों अधिकारियों ने बयान जारी कर इसका खंडन किया है कि वह केंद्रीय बैंक को गुमराह करने की किसी साज़िश में शामिल थे.
एक दूसरी रिकॉर्डिंग में जब बोवे पीटर फ़िट्ज़गेराल्ड को कहते हैं कि यह 5.47 खरब रुपये <link type="page"><caption> कभी वापस नहीं</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/01/130104_swiss_bank_closed_aa.shtml" platform="highweb"/></link> किए जाएंगे तो दोनों हंसते हैं.
रेडियो के फ़ोन-इन शो में यह टेप सुन रहे श्रोता यह जानकर कतई ख़ुश नहीं हुए कि बैंक ने आयरिश करदाताओं को 23.46 खरब रुपये की चपत लगाई है.
इसके बाद के टेप में एंग्लो-आयरिश बैंक के मुख्य कार्यकारी, डेविड ड्रम, अपने कनिष्ठ अधिकारियों को सलाह देते हैं कि और कैश लाने की कोशिश में सरकार की बैंक गारंटी को खुलेआम गालियां न दें.
वह कहते हैं, “बस.... पैसा लाओ”
जब उनका एक सहयोगी 19वीं शताब्दी का जर्मन राष्ट्रगान गाता है तो वह हंसते हैं क्योंकि ज़्यादातर रकम जर्मनी से ही मिल रही है.
बोवे ने एक बयान में कहा है कि भाषा और लहजे को लेकर उन्हें बेहद अफ़सोस है जो कि “अनुचित और अनुपयुक्त दोनों थे.”
अब यह तय लग रहा है कि इस मामले में किसी न किसी तरह की जांच अवश्य होगी.
क्या था मामला
साल 2008 में अमरीका के निवेश बैंक लीमन ब्रदर्स के दिवालिया होने के साथ ही घबराहट फैल गई थी.
दुनिया भर में बैंक एक-दूसरे को उधार देने से कतरा रहे थे क्योंकि कोई नहीं जानता था कि दूसरे के पास उधार चुकाने की क्षमता कितनी है.
ऐसे में तत्कालीन आयरिश प्रधानमंत्री ब्रायन कोवेन और उनके वित्त मंत्री ब्रायन लेनिहेन को आयरिश बैंकरों ने कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों को 344.15 ख़रब रुपये की गारंटी देने के लिए मना लिया.

यह रकम देश के आर्थिक उत्पाद से कई गुना ज़्यादा थी.
बाज़ार के खुलने से पहले इस कदम पर सहमति बनाने के लिए कई मंत्रियों को नींद से जगाया गया .
ब्रितानी और जर्मन भी उन लोगों में शामिल थे जो इससे डरे हुए थे कि यह रकम आयरिश बैंकों को तात्कालिक सुरक्षा प्रदान करेगी.
इसने की भी, लेकिन सिर्फ़ कुछ समय के लिए.
अंत में आयरिश बैंकों की दिवालिएपन की प्रवृत्ति सामने आ ही गई.
हालांकि आयरिश करदाताओं को बचाने के लिए बहुत देर हो चुकी थी, जो पिछले पांच साल से भारी कर और खर्चों में कटौती से जूझ रहे थे.
और जिस वित्तीय संस्थान से लोगों को सबसे ज़्यादा चिढ़ हुई, वह था कभी प्रॉपर्टी डेवलपर्स का पसंदीद रहा, एंग्लो-आयरिश बैंक.
इन टेप रिकॉर्डिंग को सुन रहे लोगों को सबसे ज़्यादा धक्का इस बात से लगा है कि बैंक को इस बात की कोई चिंता नहीं थी कि वह करदाताओं को इतना बड़ा बिल थमा रहे हैं जिससे देश के दिवालिया होने का ख़तरा पैदा हो गया.
प्रधानमंत्री एंडा केनी का कहना है कि वह लोगों के गुस्से को समझते हैं और आने वाले कुछ महीनों में सरकार किसी तरह की जांच शुरू करने पर काम करेगी.
एंग्लो-आयरिश बैंक में गड़बड़ी करने वालों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला अगले साल शुरू हो सकता है.
लेकिन कई लोग यह पूछ रहे हैं, “जांच और सुनवाई दोनों के लिए इतना समय क्यों लग गया? और अमरीका के विपरीत अभी तक किसी को जेल क्यों नहीं भेजा गया.”
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