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चीनी साइट वीबो पर दलाई लामा के बारे में बहस पर बैन?
- Author, जेफ़ ली
- पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा का अरुणाचल प्रदेश दौरा चीन को 'नागवार' गुज़रा है.
उसका 'गुस्सा' सरकारी मीडिया में स्पष्ट देखने को मिला है.
चीन अरुणाचल प्रदेश पर दावा करता है और उसे 'दक्षिणी तिब्बत' कहता है. भारत ये लगातार कहता रहा है कि अरुणाचल भारत का अभिन्न हिस्सा है.
चाइना डेली और ग्लोबल टाइम्स जैसे अखबारों ने अरुणाचल में दलाई लामा के स्वागत को भारत के 'गैरजिम्मेदार रवैये' के तौर पर पेश किया है.
ऐसा प्रतीत होता है कि चीन में लोकप्रिय माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट 'वीबो' पर दलाई लामा के दौरे पर किसी भी तरह की बहस बैन कर दी गई है.
'दलाई लामा' कीवर्ड से वीबो पर सर्च करने पर मैसेज कुछ इस तरह से आता है, "मौजूदा कानूनों के मद्देनज़र नतीजे नहीं दिखाए जा रहे हैं."
चीन का स्टैंड
चीन में ट्विटर जैसे दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर दलाई की अरुणाचल यात्रा को लेकर सुगबुगाहट जरूर महसूस की जा रही है.
हालांकि चीन में ट्विटर पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध है लेकिन चीनी लोग खास सॉफ्टवेयर के ज़रिए इस पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराते रहते हैं.
कुछ ट्वीट्स चीन के स्टैंड का समर्थन करते हुए दिखते हैं.
@AuditoreBP हैंडल से एक यूजर ने लिखा, "चीन के सामने चरमपंथ की कोई समस्या नहीं है बल्कि उसके सामने भारत है जो दलाई लामा के जरिए तिब्बत को चीन से अलग करना चाहता है."
एक और यूजर @qwertysctj ने लिखा, "दलाई लामा अपने धर्म के प्रतिनिधि नहीं हैं. दलाई लामा चीन के तिब्बत में भारत के लिए काम करने वाले व्यक्ति से ज्यादा कुछ नहीं हैं."
'खराब बर्ताव'
'चाइना डेली' ने अपने संपादकीय में भारत को 'गैरजिम्मेदार' बताते हुए लिखा है, "अगर नई दिल्ली चीन के साथ गंदा खेल खेलता है तो बीजिंग को भी करारा जवाब देने से नहीं हिचकना चाहिए."
एक और अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' ने भारत के 'खराब बर्ताव' का मुद्दा उठाते हुए लिखा है कि मसूद अज़हर और न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप को लेकर मिली नाकामी की वजह से भारत का दिल टूटा हुआ लगता है, मुमकिन है कि वो पश्चिम की शह पर काम कर रहा हो.
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