छात्रों को आधार कार्ड से जोड़ेगा बिहार बोर्ड

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- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिन्दी के लिए
गौरी उरांव 35 साल के हैं. 1994 में उन्होंने बिहार बोर्ड से दसवीं की परीक्षा पास की थी, लेकिन 22 साल गुजर गए उन्हें मूल प्रमाण पत्र नहीं मिला.
अब जब उन्हें रांची सिविल कोर्ट से एक साक्षात्कार का बुलावा आया है तो उन्होंने प्रमाण पत्र के लिए दौड़-भाग शुरू की. अपने स्कूल में काम नहीं बना तो भागकर पटना स्थित बोर्ड ऑफिस आना पड़ा.
गौरी अपने परिवार में पहले ऐसे शख़्स हैं जिन्हें सरकारी नौकरी के इंटरव्यू के लिए बुलावा आया है. इंतज़ार में पसीने से लथपथ गौरी कहते हैं, "प्रमाण पत्र वक़्त पर नहीं मिला तो समय ख़त्म हो जाएगा और मेरी ज़िंदगी भी."
भविष्य में गौरी जैसी परेशानी किसी दूसरे छात्र को ना झेलनी पड़े, इसके लिए बिहार बोर्ड नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है. बोर्ड परीक्षा के समय ही परीक्षार्थियों से उनके आधार नंबर, ईमेल और फोन नंबर दर्ज करेगा. आधार नंबर के जरिए छात्र का डिजिटल लॉकर तैयार होगा. इस लॉकर में छात्र से जुड़े सभी तरह के सर्टिफिकेट होंगे.
बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर बताते हैं, "जो भी छात्र इस व्यवस्था से जुड़ेगा, उसे किसी भी सर्टिफिकेट या एडमिट कार्ड के लिए बोर्ड ऑफिस के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी. वो जहां हैं, वहीं अपने डिजिटल लॉकर से उसे डाउनलोड कर सकेंगे.”

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जहां बोर्ड छात्रों की सहूलियत के लिए ये कदम उठा रहा है, वहीं उसका दूसरा मकसद धोखाधड़ी रोकना भी है.
आनंद किशोर बताते हैं, "कई बार एक ही छात्र एक ही कक्षा में उम्र घटा-घटाकर कई बार परीक्षा देते हैं, ऐसे में ये व्यवस्था उस धोखाधड़ी और डुप्लीकेशन से भी निपटने में मदद करेगी. साथ ही बोर्ड के छात्रों को नौकरी देने वाली कंपनियों को किसी भी तरह के सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन के लिए बोर्ड ऑफिस से पत्राचार की जरूरत भी नहीं पड़ेगी. वो उनके सर्टिफिकेट को अपने स्तर पर भी सत्यापित कर सकती है."
बक्सर के छात्र राम प्रताप सिंह भी इस व्यवस्था के प्रति उम्मीद से भरे दिखते हैं.
वो कहते हैं, "जब कभी तकनीक का हस्तक्षेप व्यवस्था में होगा तो हमें फ़ायदा होगा. मुझे लगता है कि इससे हम छात्रों का भला होगा और ये जो हमें हर काम के लिए पटना भागना पड़ता है, उससे राहत मिलेगी.”

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हालांकि आधार नंबर को अपने रजिस्ट्रेशन फार्म में दर्ज करना बोर्ड ने आवश्यक नहीं बनाया है. लेकिन ये इस साल होने वाली कंपार्टमेंटल परीक्षा से ही लागू हो जाएगा. बोर्ड ने अपने छात्रों खासकर उन छात्रों से जो कंपार्टमेंटल की परीक्षा देने जा रहे हैं, ऐसे तकरीबन 6 लाख छात्रों से अपील की है कि वो अपना आधार कार्ड बनवा लें.
इंटर टॉपर घोटाले के बाद बिहार बोर्ड के छात्रों के प्रमाण पत्र को बहुत संशय की नज़रों से देखा जा रहा है. आलम ये है कि कई टॉपर्स ने अपने बायोडाटा से टॉपर शब्द ही हटा लिया. इस बार भी जो बच्चे दूसरे राज्यों के संस्थानों में दाखिला लेने गए, उनके सर्टिफिकेट को शंका की नज़रों से देखा गया.
पत्रकार लक्ष्मीकांत सजल कहते हैं, "बिहार बोर्ड की जो छवि बनी है घोटाले के बाद, उसे देखते हुए आधार नंबर से जोड़ने का ये कदम छात्रों के लिए फायदेमंद होगा. साथ ही आप जानते हैं कि बिहार बोर्ड से तकरीबन 26 लाख छात्र जुड़े हैं. ऐसे में ग्रामीण इलाकों से आने वाले छात्रों के लिए तो ये वरदान ही होगा."
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