पटना को डूबने से बचाया इस गांव ने

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    • Author, मनीष शांडिल्य
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए

20 अगस्त को पुनपुन का जल स्तर उफनती गंगा के पानी घुसने की वजह से तेज़ी से बढ़ रहा था. पटना के लखीपुर कोली गांव के पास बने रिंग बांध के टूटने का ख़तरा पैदा हो गया.

क़रीब 1200 मीटर लंबे बांध का लगभग एक चौथाई हिस्सा पहले से ही कमज़ोर था. उसी हिस्से के कुछ दरारों से पानी गांव में प्रवेश करने लगा.

पटना से करीब पंद्रह किलोमीटर दूर बसे लखीपुर वासियों ने दिन-रात कोशिश कर न केवल ख़ुद बल्कि पटना को भी बाढ़ के खतरे से बचाया.

यह गांव पुनपुन नदी के किनारे बने रिंग बांध और पटना सुरक्षा बांध के बीच बसा है.

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लखीपुर कोली के ओम सिंह बताते हैं, "20 तारीख़ की सुबह रिंग बांध पर पहुंचा तो नदी की धार बहुत तेज़ थी. बांध के चार जगहों पर ख़तरा ज्यादा था. शाम तक हम लोगों ने बांध पर मिट्टी की बोरियां डाल कर इसे बचाने की कोशिश की."

ओम सिंह बताते हैं कि फिर गांव वालों ने पटना डीएम को फोन किया. और उनके निर्देश पर प्रशासनिक महकमा वहां पहुंचा.

और ग्रामीण उनके साथ बांध को बचाने के काम में जुट गए.

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युवक आनंद कुमार बताते हैं, "क़रीब दर्जन भर ग्रामीण रात भर प्रशासन के साथ बांध पर मरम्मत के काम में डटे रहे. रात के अंधरे में हमने मोबाइल की रोशनी में काम किया."

गांव के बुजुर्ग शिवपूजन सिंह ने कई बार बाढ़ के पानी को चढ़ते-उतरते और तबाही मचाते देखा है. उनके मुताबिक अगर रिंग बांध टूटता तो फिर पटना सुरक्षा बांध को बचाना भी मुश्किल होता है. और अगर ऐसा होता तो फिर पटना शहर का बड़ा हिस्सा भी डूबता.

शिवपूजन कहते हैं, "सुरक्षा बांध के उत्तर का इलाक़ा नदी से क़रीब तीस फीट नीचे हैं. ऐसे में यह हिसाब लगाना मुश्किल है कि सुरक्षा बांध टूटने के बाद यह पानी पटना के कितने बड़े हिस्से को नुकसान पहुंचाता. "

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पटना जिलाधिकारी संजय कुमार अग्रवाल का भी मानना है कि लखीपुर कोली गांव के रिंग बांध के टूटने से पटना का बाहरी इलाक़ा काफ़ी प्रभावित होता.

ग्रामीणों के जज्बे की तारीफ करते हुए वे कहते हैं, "रात में अगर बचाव का काम शुरु नहीं होता तो सुबह तक बांध कट चुका होता. ख़तरे के समय पानी के सामने कोई नहीं रहना चाहता क्यूंकि बह जाने का डर रहता है. वो भी अंधरी रात में. लेकिन लखीपुर कोली के ग्रामीण ऐसे हालात में भी प्रशासन के साथ डटे रहे."

सोमवार को जिलाधिकारी ने अपने दफ्तर में ग्रामीणों की इस सजगता और कोशिश के लिए उनको सम्मानित किया. ज़िलाधिकारी ने गांव के लोगों को फ्लड चैंपियन घोषित करते हुए शील्ड भी दिया.

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