'बाढ़ में तो सारा ‘सिस्टम’ ही डूब गया है'

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- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, भागलपुर के नवगछिया से बीबीसी हिंदी के लिए
सुबह के दस बजे हैं. मैं एनएच-31 पर खड़ा हूं. मेरी एक तरफ नवगछिया कचहरी है तो दूसरी तरफ पावर सब स्टेशन. दोनों डूब चुके हैं. बीच में है हाइवे और इस पर चहलकदमी करती चंद जिंदगियां.
लोगों ने सड़क किनारे डेरा डाला है. इनमें तेतरी भी हैं. उन्होंने कड़ाही में तेल डाला है. वह आलू का भुजिया बना रही हैं. बन जाएगा तो घर के लोग इसी सड़क पर खाना खाएंगे. उनकी माई (मां) फूलकुमारी उनके एक साल के भाई को बाढ़ के पानी में नहला रही हैं.

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नहाने के बाद अन्न के कुछ दाने वह भी खाएगा.
तेतरी के पापा अशोक कचहरी में भूजा-चाय की दुकान चलाते थे. एक झोपड़ी थी. वही इनकी दुकान थी, मकान भी. अब वह झोपड़ी बाढ़ के पानी में डूब गई है.
नवगछिया कचहरी डूब चुकी है. जेल में भी पानी है. सारे कैदियों को भागलपुर जेल शिफ्ट कर दिया गया है. ट्रेजरी डूबी है. एसपी, डीएसपी और एसडीओ के दफ्तर डूब गए हैं. अस्पताल डूबा है.

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नवगछिया रेलवे स्टेशन का टिकट काउंटर भी बाढ़ के पानी में आधा डूब गया है.
पूर्णिमा प्रतापपुर गांव की मीरा देवी स्टेशन जा रही हैं. उन्होंने बताया,'' तीन दिन इंतजार करने के बाद जब पानी नहीं घटा, तो हमें घर छोड़ना पड़ा. पूरा गांव खाली हो चुका है.''
धरहरा, गोपालपुर, इस्माइलपुर, रंगड़ा, वीरपुर, बिहपुर में भी यही हालत है.

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एसडीआरएफ के सब इंस्पेक्टर वीरेंद्र कुमार ने बीबीसी को बताया,''लक्ष्मीपुर गांव में तटबंध टूटने के कारण यह हालत हुई है. एसपी, एसडीओ, एसडीपीओ और तमाम जजों के सरकारी आवासों में बाढ़ का पानी घुस गया है.''
इलाके के थाना प्रभारी एसके आजाद कहते हैं कि हमारे एसपी साहब सुरक्षित हैं.
पावर सब स्टेशन की आवासीय कॉलोनी डूब गई है. यहां की वंदना झा ने बीबीसी को बताया कि उनकी कॉलोनी में शनिवार देर रात पानी घुस गया. वे बच्चों को लेकर किसी तरह सड़क तक आ सकीं.

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जज कॉलोनी कैंपस में आम के बहुत पेड़ हैं. सांपों ने इन पेड़ों पर आसरा लिया है.
सभी दफ्तरों में काम-काज ठप हो चुका है. शहर की बिजली काट दी गई है. यह एक तरह का अघोषित आपातकाल है. इन सबके बीच कुछ लोग बाढ़ के पानी के साथ सेल्फी ले रहे हैं ताकी उसे फेसबुक पर पोस्ट कर सकें. जिंदगी का एक रंग यह भी है.
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