'कश्मीर पर सियासी पहल से ही बनेगी बात'

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    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मानते हैं कि कश्मीर की समस्या का राजनीतिक हल निकाला जाना चाहिए और यह मुद्दा सिर्फ़ विकास के सहारे सुलझाया नहीं जा सकता.

प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्वीट किया है, "बातचीत होनी ही चाहिए और संविधान के दायरे में रहते हुए इस समस्या का स्थायी हल खोजा जाना चाहिए. सभी राजनीतिक दलों के साथ काम कर के ऐसा होना चाहिए."

सोमवार को जम्मू-कश्मीर के प्रमुख विपक्षी दलों के सदस्यों ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से राज्य के हालात पर चर्चा की है.

भारत प्रशासित कश्मीर घाटी में पिछले 45 दिनों से कर्फ़्यू है. कश्मीर में 8 जुलाई से खराब हुए हालात ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है.

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इन हालात के बीच भी राजनेताओं की बयानबाज़ी रुकी नहीं थी.

इस मुलाकात से पहले भारतीय जनता पार्टी के महासचिव राम माधव ने ट्वीट किया था, "वे सियासी समाधान की बात करते हैं, लेकिन कभी भी आज़ादी के नारों पर स्पष्टीकरण नहीं दिया. जब वो सत्ता में थे और उन पर पत्थर फेंके जाते थे, तब उन्होंने सियासत की बात नहीं की."

इसके जवाब में उमर अब्दुल्ला ने कहा था, "हमने समाधान का प्रस्ताव दिया था, सत्ता में और सत्ता से बाहर रहते हुए भी. लेकिन जो आप सुनना नहीं चाहते, उसके लिए बहरे बन जाते हैं."

विपक्षी दलों के सदस्यों के साथ प्रधानमंत्री की बैठक लगभग एक घंटे तक चली.

बैठक के बाद उमर अब्दुल्ला ने कहा, "प्रधानमंत्री ने हमारे ज्ञापन को स्वीकार किया. जम्मू-कश्मीर का मसला सियासी है. रह-रह कर इस तरह के हालात बन जाते हैं. लेकिन अगर सियासी तौर पर इसका हल नहीं निकाला जाता तो बार-बार हमसे यही चूक होती रहेगी. प्रधानमंत्री ने भी स्वीकार किया कि सिर्फ़ विकास में ही इन मसलों का हल नहीं है. वो सभी पक्षों से बातचीत के हिमायती नज़र आए."

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वहीं, विपक्ष के प्रतिनिधिमंडल में शामिल जम्मू-कश्मीर में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता मुहम्मद यूसुफ़ तारिगामी ने बीबीसी को बताया कि बैठक में प्रधानमंत्री का रुख काफी सकारात्मक था और उन्होंने संजीदगी के साथ सबकी बातें सुनीं.

उनका कहना था कि प्रधानमंत्री ने कहा कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह फिर जम्मू-कश्मीर जाएंगे.

तारिगामी ने कहा, "हमने प्रधानमंत्री को बताया कि जम्मू-कश्मीर का मामला क़ानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ा है, लेकिन सिर्फ़ इन्हीं दो मुद्दों तक महदूद नहीं है. हमने सुझाव दिया कि इस पुराने लंबित मसले को राजनीतिक तौर पर सुलझाना होगा और वो भी बातचीत के ज़रिए. इस बातचीत में सभी साझेदारों को शामिल करना होगा."

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तारिगामी ने कहा, "प्रधानमंत्री से मिलकर हमारी उम्मीदें जगी हैं."

जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष ग़ुलाम अहमद मीर ने बीबीसी से कहा, "प्रधानमंत्री साफ़ किया कि प्रतिनिधिमंडल की बातों ने उनके दिल को छू लिया, क्योंकि बहुत सारी नई जानकारियां उन्हें हम से मिलीं. हमने प्रधानमंत्री से अनुरोध भी किया कि वो जम्मू-कश्मीर की जनता का विश्वास जीतने के लिए सीधा संवाद कायम करें."

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