इरोम शर्मिला को ज़मानत मिली

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- Author, वंदना
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मणिपुर के इंफ़ाल से
मणिपुर से अफ़स्पा हटाने के लिए पिछले 16 साल से भूख हड़ताल कर रही इरोम शर्मिला को इंफाल की एक अदालत ने जमानत दे दी है.
इरोम के वकील ने अदालत परिसर में बताया कि इरोम की जमानत मंजूर हो गई है. लेकिन आदेश अभी जेल अधिकारियों को नहीं मिला है. इसलिए अभी वो रिहा नहीं हुई है.
उन्होंने कहा कि रिहा होने के बाद ही इरोम आगे के क़दम और भूख हड़ताल पर कोई फ़ैसला करेंगी.
इससे पहले इरोम ने अदालत से कहा कि अब वो आज़ाद होना चाहती हैं.
इरोम ने अदालत से कहा, ''मुझे एक अजीब महिला के रूप में देखा जा रहा है. लोग कहते हैं कि राजनीति गंदी होती है. लेकिन समाज भी तो गंदा है. मैं सरकार के खिलाफ चुनाव में खड़ी होऊंगी. मैं सबसे कटी हुई थी.''

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उन्होंने कहा, ''मैंने महात्मा गांधी के सिद्धांतों का पालन किया. मेरा ज़मीर कैद था. मुझे अब आज़ाद होना होगा. मुझे अब रणनीति बदलनी होगी. मुझे लोग एक इंसान के तौर पर क्यों नहीं देख सकते. जब मैं अपना अनशन तोड़ूंगी, तो मेरे खिलाफ लगे आरोपों में जमानत मिल जाएगी. मैं अपील करती हूं कि मुझे आजाद किया जाए.''
मंगलवार को देसी-विदेशी मीडिया की भारी मौज़ूदगी में इंफाल की अदालत में पेश किया गया. जमानत मिलने के बाद उन्होंने जज से मीडिया से बात करने की इजाजत मांगी.
जज ने उन्हें मीडिया से बात करने के लिए आधे घंटे का समय दिया. लेकिन भारी धक्का-मुक्की की वजह से वो अपनी बात नहीं रख पाई. सुरक्षाकर्मियों ने बहुत मुश्किल से उन्हें वहां से सुरक्षित निकाला.

इरोम ने कुछ दिन पहले ही अनशन ख़त्म कर राजनीति में लौटने और शादी करने की इच्छा जताई थी.
आफ़्सपा, भारत के कई राज्यों में लागू है, जिसमें मणिपुर और भारत-प्रशासित कश्मीर शामिल हैं.
अफ़्सपा के तहत सैनिक बिना वॉरेंट किसी को भी गिरफ्तार कर सकती है और कुछ परिस्थितियों में तो उन्हें गोली मारने तक का भी अधिकार है.

इरोम ने अपनी भूख हड़ताल तब शुरू की जब 10 लोगों को भारतीय सेना ने मार डाला. इस दौरान वो ज्यादातर समय न्यायिक हिरासत में इंफ़ाल के एक अस्पताल में रही हैं.
आज इरोम अपनी 16 साल की हड़ताल खत्म कर रही हैं.
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