सूखे से निपटने के लिए नदियों को जोड़ेंगे: उमा

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- Author, नवीन सिंह खड्का
- पदनाम, पर्यावरण संवाददाता, बीबीसी
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने कहा है कि सरकार सूखे से निपटने के लिए नदियों को जोड़ने के बारे में सोच रही है.
बीबीसी के साथ ख़ास बातचीत में उन्होंने कहा कि ब्रहमपुत्र और गंगा जैसी बड़ी नदियों के पानी को सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचाया जाएगा और ये सरकार की अहम प्राथमिकताओं में शामिल है.
भारत के एक बड़े हिस्से में लगभग 33 करोड़ लोग सूखे के हालात झेल रहे हैं.
पानी स्थानांतरित करने के लिए नदियों को जोड़ने की इस योजना में 30 लिंक होंगे. इनमें से 14 लिंकों को पानी हिमालय के ग्लेशियरों से मिलेगा जबकि 16 लिंक मध्य और दक्षिणी हिस्से में होंगे.
वहीं कई पर्यावरणविद् नदियों की जोड़ने का विरोध करते रहे हैं. उनका तर्क है कि इससे कई पारिस्थितिक संकट पैदा होंगे.
हालांकि सुप्रीम कोर्ट नदियों को जोड़ने की योजना को हरी झंडी दे चुका है.

उमा भारती ने कहा, "नदियों को जोड़ना हमारा मुख्य एजेंडा है और हमें इस बारे में लोगों का समर्थन प्राप्त है. मैं इस काम को तेज़ी करने के लिए प्रतिबद्ध हूं."
उन्होंने कहा, "हम अभी पांच नदियों को लिंक कर रहे हैं और इनमें पहला उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में केन-बेतवा लिंक है, जिस पर काम बस शुरू होने को ही है."
"फिर हम दमन गंगा-पिंजल इंटरलिंक पर काम करेंगे, जिससे मुंबई के लिए पानी मुहैया कराया जाएगा."
उमा भारती ने कहा कि आज़ादी के बाद ये पहला मौक़ा है जब नदियों को जोड़ने की योजना पर अमल होगा.
उन्होंने कहा कि अगले कुछ सालों में सिंचाई और पीने के लिए पानी मुहैया कराने के लिए भी कई योजनाएं तैयार की गई हैं और नदियों को जोड़ना एक दीर्घकालीन योजना है.

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भारत में बीते दो सालों में औसत से कम बारिश हुई है, ऐसे में, देश का एक बड़ा हिस्सा सूखा झेल रहा है. देश के 29 में आधे राज्यों में पानी का संकट है.
जो राज्य सबसे ज्यादा पीड़ित हैं उनमें महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश शामिल हैं. कई जगह केंद्र को पानी की ट्रेन भी भेजनी पड़ी है.
वहीं आलोचकों का कहना है कि नदियों को जोड़ने की परियोजना आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण की दृष्टि से उचित नहीं है.
पर्यावरणविद् हिमांशु ठक्कर कहते हैं, "जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में देखें तो ये और भी असंभव है क्योंकि आप नहीं जानते कि नदियों की धारा का क्या होगा."

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उनका कहना है, "ये परियोजना इस विचार पर आधारित है कि जहां ज़रूरत से ज्यादा पानी है उसे सूखा प्रभावित इलाक़ों तक पहुंचाया जाए, लेकिन इस बारे में कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हुआ है कि किन इलाकों में ज्यादा पानी है और किन इलाक़ों में कम."
वहीं सरकार का कहना है कि नदियों को जोड़ने की योजना से 35 हज़ार हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होगी और 34 हज़ार मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा.
वाजयेपी सरकार के दौरान भी भाजपा ने नदियों की जोड़ने पर ज़ोर दिया था लेकिन उसके बाद सत्ता में आई कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने इस योजना में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई.
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