वंजारा अब करेंगे राजनीति का एनकाउंटर?

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    • Author, प्रशांत दयाल
    • पदनाम, अहमदाबाद से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

इशरत जहां मुठभेड़ मामले में ज़मानत मिलने के बाद नौ साल बाद गुजरात लौटे पूर्व डीआईजी डीजी वंजारा का बयान किसी मंझे हुए नेता सा था.

वंजारा फ़र्ज़ी एनकाउंटरों के मामलों से जूझ रहे हैं.

वंजारा का स्वागत शुक्रवार सुबह किसी नेता की तरह ही था. फूलमालाओं से लदे वंजारा ने अहमदाबाद पहुँचने पर कहा, "मेरा स्वागत देश की पुलिस का स्वागत है. ये उनका स्वागत है जिन्होंने आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी."

ज़मानत मिलने के बाद वंजारा पांच फ़रवरी 2014 को जेल से रिहा हुए थे, पर उनके गुजरात आने पर रोक लगी हुई थी.

इसी महीने दो अप्रैल को उन्हें गुजरात आने की अनुमति दी गई थी.

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने और प्रधानमंत्री बनने के बाद, बीजेपी को उनके क़द का कोई नेता गुजरात में नहीं मिल रहा है.

इस दौरान गुजरात में बीजेपी की स्थिति कमज़ोर भी हुई है और पाटीदार आंदोलन की वजह से भी बड़ी संख्या में लोग बीजेपी से दूर होते दिख रहे हैं.

ऐसे में अपना समर्थन बचाने के लिए वंजारा के बहाने कथित 'आतंकवाद' का कार्ड खेलना बीजेपी के लिए सबसे सुरक्षित और आसान माना जा रहा है.

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डीजी वंजारा 2002 से 2005 तक अहमदाबाद की क्राइम ब्रांच के डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस थे. उनकी इस पोस्टिंग के दौरान क़रीब 20 लोगों का एनकाउंटर हुआ.

बाद में सीबीआई जाँच में पता चला कि ये एनकाउंटर फ़र्ज़ी थे. ये माना जाता था कि वे गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे क़रीबी पुलिस अधिकारी थे.

वंजारा को 2007 में गुजरात सीआईडी ने गिरफ़्तार किया था. उन पर आठ लोगों की हत्या का आरोप लगा, जिनमें सोहराबुद्दीन, उनकी पत्नी क़ौसर बी, तुलसीराम प्रजापति, सादिक़ जमाल, इशरत और उसके साथ मारे गए तीन अन्य लोग शामिल हैं.

इनके एनकाउंटर के बाद क्राइम ब्रांच ने सफ़ाई दी थी कि ये सभी पाकिस्तानी चरमपंथी थे और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की जान लेना चाहते थे. बाद में कोर्ट के आदेश पर सीबीआई जाँच में पता चला कि ये सभी एनकाउंटर फ़र्ज़ी थे.

इशरत जहां की मां. (फ़ाइल फ़ोटो)

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गुजरात में 2017 में विधानसभा चुनाव होने हैं.

पाकिस्तानी मूल के अमरीकी चरमपंथी डेविड हेडली ने अपने बयान में इशरत जहां को चरमपंथी बताया था. इसके बाद से बीजेपी को विरोधियों पर हमला बोलने का मौक़ा मिल गया था.

सूत्रों के मुताबिक़ अब बीजेपी इस बयान को अपने फ़ायदे में इस्तेमाल कर सकती है, और वंजारा को उनकी घरेलू सीट साबरकांठा से चुनाव मैदान में भी खड़ा कर सकती है.

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