उत्तराखंड का भाग्य स्टिंग, डिफ़ेक्शन तय करेगा?

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उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पूछा है कि "राज्य का भाग्य निर्धारण स्टिंग और डिफ़ेक्शन करेंगे?!"

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रविवार दोपहर देहरादून में मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि "मैं अपने घर के दरवाज़े खोल देता हूं, आप आ कर मेरी कमाई की स्क्रूटिनी कर लें. साथ ही उन लोगों की कमाई की भी स्क्रूटिनी की जानी चाहिए जो ख़ुद को गामा पहलवान समझते हैं."
उन्होंने कहा कि "वे संपत्ति पर बेनामी क़ब्ज़े संबंधित बिल को लाना चाहते थे जिसका बाग़ी नेता हरक सिंह ने विरोध किया था."

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इससे पहले उन्होंने आरोप लगाया था कि मौजूदा बीजेपी सरकार "धनबल से राज्य की राजनीति का अपहरण" करने का प्रयास कर रही है.
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली का हालांकि कहना था, "राज्य में गणतंत्र की हत्या 18 तारीख़ को ही हो गई थी जब राज्य सरकार ने अल्पमत को बहुमत कह दिया था. बिना बहुमत राज्य में सरकार कैसे चल सकती है."

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उन्होंने हरीश रावत पर विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त के आरोप लगाए.
उन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया.
कांग्रेस महासचिव शकील अहमद ने संवाददाताओं से बात की और कहा “प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार नर्वस हैं और इसलिए राज्य में गणतंत्र की हत्या कर जल्दबाज़ी में राष्ट्रपति शासन लगाया गया.”

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उन्होंने कहा "यदि बहुमत साबित करने का मौक़ा मिला होता तो हरीश रावत सरकार कल होने वाली परीक्षा में सफल होती."
कांग्रेस की ही अंबिका सोनी का कहना था, “हम देख रहे हैं कि अरूणाचल प्रदेश से इसकी शुरूआत हुई जो की चीन के साथ सटा राज्य है. यहां लोगों के या राज्य के विकास के मुद्दों की अनदेखी करते हुए यहा रष्ट्रपति शासन लगाया गया.”

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति शासन लागू करने का फ़ैसला जल्दबाज़ी में लिया गया है.
उन्होंने पूछा कि क्या किसी फ़र्ज़ी स्टिंग वीडियो के आधार पर कैबिनेट मीटिंग बुलाई जानी चाहिए. उन्होंने कहा "सरकार को बहुमत साबित करने का प्रयास नहीं करने दिया गया."

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एक अऩ्य कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने ट्विटर पर लिखा "पवित्र ईस्टर के दिन उत्तराखंड में गणतंत्र को सूली पर चढ़ा दिया गया है."
एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा. "राष्ट्रपति शासन आख़िरी रास्ता होना चाहिए. उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन असंवैधानिक और अगणतांत्रिक है."
हरीश रावत सरकार के 9 विधायकों के बाग़ी होने के बाद सरकार मुश्किलों में घिर गई थी. सरकार को 28 मार्च को बहुमत साबित करना था.
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