ट्राई ने फेसबुक के फ्री बेसिक्स को दिया झटका

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भारतीय टेलीकॉम नियामक संस्था (ट्राई) ने नेट न्यूट्रैलिटी का समर्थन करते हुए कहा कि इंटरनेट कंपनियों को अलग-अलग दामों पर सेवाएं मुहैया कराने की इजाज़त नहीं होगी.
भारत में बड़े पैमाने पर लोगों तक फ्री इंटरनेट पहुंचाने की फ़ेसबुक इंक की योजना को ट्राई के फैसले से बड़ा झटका लगा है.
फ़ेसबुक ने ट्राई के फैसले पर निराशा जताई है.
फ्री बेसिक्स योजना चंद वेबसाइटों को निःशुल्क पहुंच की सुविधा देता है. इन मुफ़्त वेबसाइटों में कुछ स्थानीय समाचार और मौसम अनुमान, बीबीसी, विकिपीडिया और कुछ हेल्थ साइटें शामिल थीं.
ट्राई के अध्यक्ष आरएस शर्मा ने कहा कि इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों को अलग अलग वेबसाइटों के लिए अलग अलग शुल्क लेने की इजाज़त नहीं होगी.

ट्राई ने कहा कि हालांकि आपात स्थिति में ऐसा किया जा सकता है. इसका मतलब ये हुआ कि फेसबुक के फ्री बेसिक्स को भारत में अमल में नहीं लाया जा सकेगा.
फ़ेसबुक के प्रमुख मार्क ज़ुकरबर्ग ने फ्री बेसिक्स को लेकर व्यापक अभियान चलाया था और सोशल मीडिया यूज़र्स से इसके समर्थन में ट्राई से अपील करने को कहा था.
नेट न्यूट्रैलिटी को लेकर काफी विवाद रहा है. इसका समर्थन करने वालों का तर्क है कि इंटरनेट के दायरे के बाहर रहने वाले लाखों लोगों को इससे निःशुल्क जोड़ा जा सकता है.
वहीं फ्री बेसिक्स के आलोचकों का तर्क है कि फ्री बेसिक्स, नेट न्यूट्रैलिटी के सिद्धांत का उल्लंघन है.
नेट न्यूट्रैलिटी का मतलब है कि इंटरनेट सबके लिए समान रूप से पहुंच में हो.
ट्राई ने कहा है कि अलग-अलग शुल्क लगाने वाले सेवा प्रदाताओं पर प्रति दिन 50,000 रुपए का जुर्माना लगेगा.
फ़ेसबुक ने इंटरनेट डॉट ओआरजी नाम से 2013 में फ्री बेसिक्स परियोजना की शुरुआत की थी. इस योजना को अब तक 36 देशों में लागू किया जा चुका है.
कंपनी का दावा है कि इस योजना से वो डेढ़ करोड़ लोग इंटरनेट से जुड़े, जो इसके बिना इंटरनेट से नहीं जुड़ पाते.
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