पूर्व माओवादियों की शादी पर सरकार की सफ़ाई

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    • Author, आलोक प्रकाश पुतुल
    • पदनाम, रायपुर से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण कर चुके दो माओवादियों की शादी को लेकर विवाद पर राज्य सरकार ने कहा है कि दोनों माओवादियों का जीरम घाटी हमले से कोई लेना देना नहीं है.

पिछले शनिवार को बस्तर पुलिस और सामाजिक एकता मंच नाम के एक संगठन ने जगदलपुर में एक भव्य समारोह आयोजित कर पोडियामी लक्ष्मण और कोसी मरकाम की शादी कराई और उन्हें आरक्षक की नौकरी भी दी गई थी.

लेकिन कांग्रेस पार्टी ने इस शादी को लेकर आपत्ति की थी और कहा था कि जो लोग जीरम कांड में कांग्रेस नेताओं की हत्या में शामिल रहे हैं, पुलिस करोड़ों खर्च कर उनकी शादी करा रही है.

25 मई, 2013 को जीरम घाटी में माओवादी हमले में पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और आदिवासी नेता महेंद्र कर्मा समेत 32 लोग मारे गए थे.

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कांग्रेस की इस आपत्ति के बाद राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने राज्य के पुलिस महानिदेशक, बस्तर के आईजी और बस्तर के एसपी से पूरी रिपोर्ट मांगी, जिसके बाद यह स्पष्ट हो गया है कि दोनों माओवादी जीरम कांड में शामिल नहीं थे.

इधर गृह मंत्री रामसेवक पैंकरा ने भी दावा किया है कि जिन माओवादियों की शादी करवाई गई है, उनका जीरम हमले से कोई लेना-देना नहीं है.

रामसेवक पैंकरा ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “हमारे पास जो रिपोर्ट आई है, उसके अनुसार दोनों माओवादी जीरम घाटी कांड में शामिल नहीं थे. यह कांग्रेस की राजनीतिक बयानबाजी है.”

हालांकि मुख्यमंत्री रमन सिंह और राज्य के गृह मंत्री रामसेवक पैंकरा के बयानों से उलट बस्तर के पुलिस अधिकारी अभी तक दावा करते रहे हैं कि दोनों पूर्व माओवादी पोडियामी लक्ष्मण और कोसी मरकाम जीरम कांड में शामिल थे.

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पुलिस के अनुसार इंद्रावती एरिया कमेटी की जनमिलिशिया प्लाटून नं 3 के डिप्टी कमांडर पोडियामी लक्ष्मण ने अक्टूबर 2014 में आत्मसमर्पण किया था. पुलिस ने उस समय लक्ष्मण के जीरम घाटी हमले में शामिल होने का दावा किया था.

पिछले साल अप्रैल में पुलिस संरक्षण में ही पोडियामी लक्ष्मण ने बीबीसी से एक रिकॉर्डेड बातचीत में विस्तार से बताया था कि वह जीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं पर हमले के समय किस तरह माओवादियों के साथ थे और उनकी क्या भूमिका थी.

इसी तरह दो दिसंबर 2015 को जदगलपुर में मीडिया के सामने कोसी मरकाम समेत दो अन्य लोगों को इनामी माओवादियों का आत्मसमर्पण बता कर पेश किया गया था.

बस्तर के एसपी राजेंद्र नारायण दास ने तब दावा किया था, "कोसी मरकाम माओवादियों की प्लाटून कमांडर नंबर 26 की सदस्य रही है और उस पर 2 लाख रुपए का इनाम घोषित है."

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एसपी के अनुसार, "कोसी मरकाम कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान माओवादियों द्वारा किए गए जीरम घाटी हमले में शामिल रही है. साथ ही वह टाहकवाड़ा मुठभेड़ में भी शामिल रही है, जिसमें 16 जवान मारे गए थे."

पुलिस के स्वीकार और मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के इनकार को कांग्रेस पार्टी अब मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है.

कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी का कहना है कि जिस मामले में अभी तक ढंग से आरोप पत्र तक पेश नहीं किए गए हैं, उस मामले के अभियुक्तों को पुलिस भला अपने स्तर पर मुक्त कैसे कर सकती है?

त्रिवेदी कहते हैं, “जीरम के हत्यारों की शादी का आयोजन कर के पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में सब कुछ मनमाने तरीक़े से चल रहा है. हम पूरे मामले को सड़क से लकर अदालत तक लेकर जाएंगे.”

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