पूर्व माओवादियों की शादी को लेकर हुआ विवाद

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    • Author, आलोक प्रकाश पुतुल
    • पदनाम, रायपुर से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण कर चुके दो माओवादियों के विवाह समारोह को लेकर विवाद शुरू हो गया है.

पिछले शनिवार को बस्तर पुलिस और सामाजिक एकता मंच नाम के एक संगठन ने जगदलपुर में एक भव्य विवाह समारोह में पोडियामी लक्ष्मण और कोसी की शादी कराई.

पुलिस के अनुसार इंद्रावती एरिया कमेटी की जनमिलिशिया प्लाटून नं 3 के डिप्टी कमांडर रहे पोडियामी लक्ष्मण ने अक्तूबर 2014 में आत्मसमर्पण किया था, जबकि उनकी दुल्हन बनी कोसी मरकाम ने पिछले महीने ही पुलिस के सामने हथियार डाले.

बस्तर समेत आसपास के ज़िलों के आधा दर्जन आईपीएस और बस्तर के आईजी पुलिस एसआरपी कल्लुरी पगड़ी बांधे बाराती बने थे. इस आयोजन में लगभग 10 हज़ार लोगों ने भाग लिया.

पोडियामी लक्ष्मण ने अक्टूबर 2014 में आत्मसमर्पण किया था

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शादी के अगले दिन नव दंपति को आरक्षक पद की नौकरी भी दी गई.

लेकिन छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी का कहना है कि पुलिस ने जिस माओवादी नेता पोडियामी लक्ष्मण की शादी करवाई है, उन पर 25 मई, 2013 को हुए जीरम घाटी के हमले में शामिल होने का आरोप है.

इस हमले में केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और आदिवासी नेता महेंद्र कर्मा समेत 32 लोग मारे गए थे.

कांग्रेस का कहना है कि जिन माओवादियों के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलना चाहिए था, जिन्हें जेल में होना था, पुलिस उनके लिए करोड़ों रुपए ख़र्च कर शादी-ब्याह का आयोजन कर रही है.

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और विधानसभा में नेता प्रतीपक्ष टीएस सिंहदेव कहते हैं, “इस हमले में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से शामिल कोई भी व्यक्ति दया और रियायत का पात्र कभी नही हो सकता. इस हमले में बर्बरता और क्रूरता की सीमा को पार कर दिया गया था.”

सिंहदेव ने पूर्व माओवादियों की शादी पर पुलिस को घेरा

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सिंहदेव ने कहा, “ऐसे हमले में शामिल अपराधी को उसकी स्वीकारोक्ति के बाद भी दंड देने के बजाय इनाम दिया जा रहा है. उसकी शादी करवाई गई. पूरा पुलिस अमला ऐसे खुशियां मना रहा था, मानो उन्होंने कोई क़िला फतह कर लिया हो. कोई सरकार इतनी ग़ैर ज़िम्मेदार और संवेदनहीन कैसे हो सकती है? ”

हालांकि इस विवाह समारोह के सूत्रधार समझे जाने वाले बस्तर के आईजी पुलिस एसआरपी कल्लुरी का कहना है कि इस तरह के आयोजन से माओवादियों के बीच यह संदेश जाता है कि वे अगर मुख्यधारा में लौटेंगे तो पुलिस-प्रशासन और पूरा समाज उनका साथ देगा.

कल्लुरी कहते हैं, “माओवाद को ख़त्म करने के लिए मुठभेड़ें करके नक्सलियों को मारना ज़रूरी नहीं है, बल्कि हम माओवादियों का दिल जीत कर, हृदय परिवर्तन कर माओवाद को समाप्त करना चाहते हैं. आप मुख्यधारा में जुड़िए, हम तहेदिल से आपका स्वागत करेंगे, आपको सर आंखों पर रखेंगे.”

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लेकिन मार्क्सवादी नेता नंद कश्यप पुलिस की इस तरह की कार्रवाई पर कई सवाल खड़े करते हैं. नंद कश्यप कहते हैं, “माओवाद की समस्या गुड्डे गुड़ियों का खेल नहीं है. संकट ये है कि पुलिस इसे अब सस्ती लोकप्रियता के सहारे हल करने की कोशिश करती नज़र आ रही है.”

कश्यप का कहना है कि बस्तर के आईजी पुलिस, एसपी और दूसरे अधिकारी बारात में नाच रहे थे और इस समारोह की प्रशंसा कर रहे थे, उसी समय बीजापुर में सुरक्षाबल के जवानों द्वारा कथित रूप से सामूहिक दुष्कर्म की शिकार 9 आदिवासी औरतें अपनी रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए भटक रही थीं.

कश्यप मानते हैं, “आदिवासियों का विश्वास इस तरह तो नहीं ही जीता जा सकता.”

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