ट्वीट से दागते हैं तथागत विवादों के गोले

तथागता रॉय

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    • Author, अमिताभ भट्टासाली
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, कोलकाता

ट्विटर पर अपने विवादित ट्वीट्स की वजह से त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत रॉय लगातार सुर्खियों में रहते हैं.

पाकिस्तान पर <link type="page"><caption> तथागत रॉय</caption><url href="https://twitter.com/search?q=Governer%20Tripura&src=typd" platform="highweb"/></link> के विवादित ट्वीट ने एक बार फिर हंगामा खड़ा कर दिया है.

रॉय ने मशहूर पाकिस्तानी गज़ल गायक ग़ुलाम अली को लेकर मंगलवार को ट्वीट किया था, जब ग़ुलाम अली कोलकाता में एक कॉन्सर्ट में गा रहे थे.

गुलाम अली

शिवसेना की धमकी के बाद गुलाम अली का मुंबई में होने वाला कॉन्सर्ट रद्द कर दिया गया था. बाद में यह कॉन्सर्ट कोलकाता में रखा गया.

रॉय ने अपने ट्वीट में बंगाली हिंदुओं पर हुए अत्याचारों का ज़िक्र किया था.

उन्होंने 11 जनवरी को किए अपने ट्वीट में 12 फरवरी 1950 को आशुगंज (अब बांग्लादेश) में हिंदुओं के साथ हुए अत्याचार का ज़िक्र किया.

हालांकि इस पर राज्यपाल की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है. फ़िलहाल यह पता नहीं चल पाया है कि क्या रॉय पाकिस्तानी गायक के भारत में गाने को लेकर नाख़ुश थे.

गुलाम अली

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अब तक यह भी पता नहीं चल पाया है कि उन्होंने ग़ुलाम अली के लिए अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल क्यों किया.

ये साफ़ नहीं हो पाया कि राज्यपाल ने तीन मामलों, 1950 के दंगे, ग़ुलाम अली के कोलकाता कन्सर्ट और पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में हिंदू बंगालियों पर अत्याचार को क्यों मिलाया.

उनसे इस बात पर भी प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है कि उन्होंने केवल हिंदू बंगालियों के पाकिस्तान के हाथों प्रताड़ित होने की बात कही है, जबकि बांग्लादेश के पाकिस्तान का हिस्सा रहते हुए हिंदू और मुसलमान दोनों ही मारे गए थे.

पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन हमला

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त्रिपुरा के राज्यपाल का ट्विटर पर विवादित बातें लिखना कोई नई बात नहीं है.

पठानकोट वायुसेना अड्डे पर चरमपंथी हमले को के दौरान भी उन्होंने ट्वीट किया था.

जब बीबीसी ने उनसे सवाल पूछा था कि उन्होंने ऐसा ट्वीट क्यों किया तो रॉय ने कहा था, "अगर हम दहशतगर्दों के अंदर मौत का खौफ़ जगा पाएं तभी वो दहशतगर्दी बंद करेंगे क्योंकि मैं एक संवैधानिक पद पर हूँ तो मुझे लगा कि ये मेरा संवैधानिक कर्तव्य है कि मैं चरमपंथ को रोकने के लिए कोई ठोस सुझाव दूँ."

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रॉय ने पिछले साल ट्वीट किया था कि फांसी देने के बाद कई भावी चरमपंथी याकूब मेमन के दफ़न की रस्म में हिस्सा ले सकते हैं. उनके इस ट्वीट ने भी काफ़ी विवाद पैदा कर दिया था.

रॉय दशकों तक आरएसएस के सदस्य रहे हैं. वो कुछ साल तक पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष भी रहे.

आरएसएस

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उन्होंने बीजेपी के टिकट पर कई बार चुनाव भी लड़ा है.

त्रिपुरा में सरकार चला रही मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (माकपा) सदस्य मोहम्मद सलीम ने बीबीसी से कहा, "मिस्टर रॉय अभी भी आरएसएस से जुड़े हैं. वह गवर्नर हाउस को आरएसएस के काम के लिए इस्तेमाल करते हैं. वो संवैधानिक कुर्सी पर बैठकर सोशल मीडिया के ज़रिए आरएसएस की विचारधारा का प्रचार-प्रसार करते हैं."

मोहम्मद सलीम के आरोपों पर तथागत रॉय की प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है क्योंकि उनसे संपर्क नहीं हो पाया.

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