जिस क़त्ल का ज़माने में शोर था, वह हुआ ही नहीं

दक्षिण अ़फ़्रीका, बलात्कार का विरोध

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    • Author, बीबीसी ट्रेंडिंग
    • पदनाम, क्या चर्चा में है और क्यों

दक्षिण अफ़्रीका में निर्मम बलात्कार और हत्या का एक के बाद एक कई ट्वीट में वर्णन करने से देश के सोशल मीडिया यूज़र्स डर गए. इसे बाद में स्थानीय मीडिया ने उठा लिया.

बाद में पता चला कि यह पूरी कहानी गढ़ी हुई थी पर इससे देश में बलात्कार को लेकर असली बहस शुरू हो गई है.

बहुत से लोगों ने जिस इशारे को छोड़ दिया वह पहले ट्वीट में था...'कहानी का समय...'

ये ट्वीट रविवार को किया गया. उसके बाद अगले कुछ घंटे तक 70 ट्वीटों में कहानी कही गई. हर ट्वीट में इसका अगला हिस्सा बयान किया गया था. ये ट्वीट एक नामालूम से ट्विटर यूज़र @जस्टकुथी (@JustKuthi) के अकाउंट से किए जा रहे थे.

उन्होंने अपनी 'दोस्त' कामो की बुरी तरह तलाश किए जाने का ब्यौरा दिया था जो कहानी के अंत में बलात्कार की शिकार और बुरी तरह घायल मिलती है और फिर अस्पताल में उसकी मौत हो जाती है.

कामो के बलात्कार की झूठी कहाने के ट्वीट

लोगों ने शुरुआती ट्वीट नहीं देखा था और कहानी के अन्य पहलू मिलकर इसे असली सा बना रहे थे. उदाहरण के लिए कामो का एक ट्विटर प्रोफ़ाइल है और लेखिका ने कहानी के अंत में इसे साथ जोड़ दिया.

बहुत से नेटवर्क इस सच्ची लगने वाली कहानी से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने मदद और सांत्वना के संदेश ट्वीट करने शुरू कर दिए. लेखिका भी इन्हें लेकर खेलती रही और यह बताए बिना कि यह गढ़ी हुई कहानी है इन संदेशों को रीट्वीट करना शुरू कर दिया.

एक संदेश में लिखा गया था, "मैं बहुत शिद्दत से तुम्हें गले लगाना चाहता हूं. मैं तुम्हारे लिए प्रार्थना करूंगा, कृपया सुरक्षित रहो."

दक्षिण अफ़्रीका के महिला विभाग के प्रतिनिधि ने ट्वीट किया, "कृपया साथ आएं और महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ हिंसा से लड़ने में हमारी मदद करें. #कामो की कहानी दिल दहला देने वाली है."

कामो के बलात्कार की झूठी कहाने के ट्वीट

रविवार से 'कामो' ट्विटर पर करीब 60,000 बार नज़र आया और इसके अलावा #आरआईपीकामो को 7,000 बार इस्तेमाल किया गया.

सोमवार सुबह दक्षिण अफ़्रीका के स्टार अख़बार ने कहानी के एक पहलू को तथ्य के रूप में छापा. इसकी हेडलाइन थी, "युवा कामो को अश्रुपूरित विदाई क्योंकि उसकी ज़िंदगी निर्दयतापूर्वक और अकारण ख़त्म कर दी गई".

यह हेडलाइन बाद में ट्विटर पर मज़ाक की एक वजह बन गई.

सोशल मीडिया यूज़र्स ने अख़बार के लेख पर सवाल उठाए और पूछा कि क्या अख़बार ने मौत की पुष्टि की थी या लेखिका से संपर्क किया था.

बाद में अख़बार ने माना कि अन्य लोगों की तरह वो भी मूर्ख बन गए थे. इसके संपादक केविन रिची ने प्रतिद्वंद्वी समाचार संगठन न्यूज़ 24 से कहा कि यह झूठी कहानी 'पत्रकारिता 101' का अहम मुद्दा उजागर करती है. उन्होंने स्वीकार किया कि इस ख़बर की पुलिस से पुष्टि नहीं की गई थी.

कामो के बलात्कार की झूठी कहाने के ट्वीट

उन्होंने कहा, "हमारे चेहरे शर्म से लाल हैं और हम बिल्कुल ख़ुश नहीं. इस घटना से जो भी सीखा जा सकता है, हम सीखने की कोशिश कर रहे हैं."

"यह उस तरह की पत्रकारिता नहीं है जिसके लिए हम ख़ुद पर गर्व करें. यह हमारे लिए और समाचार उद्योग के लिए बड़ा सबक है."

स्टार में मूल ख़बर लिखने वाली पत्रकार ने प्रायश्चित स्वरूप इसकी पड़ताल शुरू की और सोमवार को नया लेख लिखा. लगता है कि पाठकों को इस बारे में बताते हुए वह सच के कुछ नज़दीक पहुँचीं.

अख़बार के अनुसार @जस्टकुथी दक्षिण अफ़्रीका के उत्तरी इलाक़े के एक क़स्बे की 18 वर्षीय युवती है.

अपने ट्वीटों के बारे इस युवती ने स्टार को बताया, "मैंने इंटरनेट पर एक कहानी पढ़ी थी और इससे मुझे लगा कि मैं अब दक्षिण अफ़्रीका में नहीं रहना चाहती."

"इसलिए मैंने अपनी एक कहानी गढ़ी, ताकि लोगों को पता चले कि दक्षिण अफ़्रीका में रहना कितना मुश्किल है. इतने ज़्यादा लोगों ने प्रतिक्रिया दी, कि मैंने इसे रहने दिया. मैं लोगों को गुमराह करने के लिए माफ़ी चाहती हूँ."

कामो के बलात्कार की झूठी कहाने के ट्वीट

उन्होंने यह भी कहा कि वास्तव में कामो नाम की उनकी एक दोस्त की हाल ही में मौत हो गई थी और जिस ट्विटर अकाउंट का उन्होंने कहानी में ज़िक्र किया है, वह दरअसल उसी का था. लेकिन स्टार उस अकाउंट का जीवित व्यक्ति से संबंध स्थापित ही कर सका.

बहरहाल इस कहानी से वास्तविक दुनिया में एक बहस शुरू हो गई है.

एक दक्षिण अफ़्रीकी न्यूज़ साइट पर एक लेखक ने पूछा, "अगर यह कहानी सचमुच गढ़ी गई थी, तो कैसे इतने सारे लोगों ने बिना सवाल उठाए मान लिया कि ऐसा सचमुच हो सकता है?"

महिला विभाग भी ट्विटर पर चल रही इस जंग में कूद पड़ा, "महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ हिंसा वास्तविक है. कुथी की कहानी झूठी हो सकती है लेकिन वास्तव में बहुत सारी कामो मौजूद हैं."

बलात्कार विरोधी प्रदर्शन

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दक्षिण अफ़्रीका में यौन हिंसा एक बड़ा मुद्दा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2014-15 में 50,000 से भी अधिक यौन हिंसा के मामले दर्ज किए गए.

हालांकि सरकारी आंकड़ों में मामूली गिरावट दिख रही है पर सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं कि असली संख्या ज़्यादा हो सकती है.

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