एक सम्पूर्ण भोजन जिसे खिचड़ी कहते हैं

खिचड़ी

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इमेज कैप्शन, बीरबल की खिचड़ी मुहावरा है
    • Author, इंदु पांडेय
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में हाल ही में खिचड़ी पर एक परिचर्चा हुई, जिसमें खिचड़ी का महत्व कुछ इस तरह से बताया गया कि एक बार तो बिरयानी भी फीकी लगने लगे.

परिचर्चा का संचालन शिक्षा से जुड़ी कुसुम जैन ने किया. वह कई दिनों से खिचड़ी पर लोगों की राय लेती रही हैं. कुसुम का कहना है कि खिचड़ी एक मामूली खाना नहीं है, बल्कि बहुत ख़ास है.

उनके अनुसार संक्रांति के मौक़े पर इसको दान भी दिया जाता है और कई जगह खिचड़ी उत्सव भी मनाया जाता है.

 खिचड़ी

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इमेज कैप्शन, खिचड़ी के यार को सब प्यार करतें है .

इस परिचर्चा में पुष्पेश पंत भी शामिल थे. उन्होंने कहा कि खिचड़ी पारिवारिक भोजन है, जो भारत के लगभग हर हिस्से में बनाई और खाई जाती है.

उनके अनुसार खिचड़ी एक शुभ खाना भी है.

पंत कहते हैं कि पंजाब की चना दाल खिचड़ी से लेकर दक्षिण की पोंगल तक सबका अपना महत्व है. कोई लाख मुंह बनाए लेकिन खिचड़ी के महत्व से इनकार नहीं किया जा सकता.

उनका कहना है, "मज़ेदार बात है कि खिचड़ी पुलाव और बिरयानी को भी मात देती है. लंदन में केजरी मिलती है जिसमें मछली पड़ती है. जॉनसन की डिक्शनरी में इसका ज़िक्र मिलता है जो खिचड़ी का ही एक रूप है."

 खिचड़ी

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इमेज कैप्शन, कई प्रकार की खिचड़ी का स्वाद एक जगह मिला

पुष्पेश आगे कहते हैं, "अल-बेरुनी ने किताबुलहिंद में लिखा है कि खिचड़ी सर्वप्रिय भोजन है. ये बात और है कि इसको लेकर लोगों के मन में अलग-अलग धारणाएं हैं."

बीएल इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडोलोजी के निदेशक जीसी त्रिपाठी के अनुसार खिचड़ी का ज़िक्र आयुर्वेद की पुस्तकों में मिलता है. उनके अनुसार चरक संहिता में भी खिचड़ी का उल्लेख है.

वह कहते हैं, "किशर शब्द से निकला है खिचड़ी, जिसका उत्तम समय मकर संक्रांति के बाद शुरू होता है. इस समय देवयोग शुरू हो जाता है और खिचड़ी देवताओं को पसंद है. सूर्य का उत्तरायण होना उत्साह और ऊर्जा के संचारित होने का काल है जिसकी शुरुआत खिचड़ी से होती है."

खिचड़ी उत्सव

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मकर-संक्रांति पर्व को तमिलनाडु में 'पोंगल’ के नाम से जानते हैं, जो कि एक तरह का पकवान है. पोंगल चावल, मूंगदाल और दूध के साथ गुड़ डाल कर पकाया जाता है.

तमिलनाडु में पोंगल सूर्य, इन्द्र देव, नई फ़सल और पशुओं को समर्पित पर्व है जो चार दिन का होता है.

पुष्पेश पंत कहते हैं कि यूं तो खिचड़ी के चार यार होते हैं लेकिन इन्हें बढ़ाया भी जा सकता है.

उनके मुताबिक़ आप अपनी इच्छा से इसके यार चुन सकते हैं, खिचड़ी बुरा नहीं मानती.

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