जम्मू-कश्मीर: पहली महिला सीएम बनेंगी महबूबा

महबूबा मुफ़्ती

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    • Author, रियाज़ मसरूर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर

महबूबा मुफ़्ती भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री होंगी. 56 साल की महबूबा जल्द ही मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी.

राज्य के मुख्यमंत्री और महबूबा के पिता मुफ़्ती मोहम्मद सईद का गुरुवार को दिल्ली में निधन हो गया था. उनके निधन से राज्य राजनीतिक सूनापन आ गया है.

महबूबा के क़रीबियों का कहना है कि भाजपा नेता राम माधव महबूबा को राज्य के 13 वें मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पार्टी का समर्थन देने के लिए दिल्ली से श्रीनगर रवाना हो चुके हैं.

पिछले साल मार्च से महबूबा की पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी भाजपा राज्य में मिलीजुली सरकार चला रहे हैं.

विधानसभा चुनाव में पीडीपी ने कश्मीर घाटी में 28 सीटें जीती थीं. वहीं भाजपा ने 87 सदस्सीय विधानसभा में 25 सीटें जीती थीं.

मुफ़्ती मोहम्मद सईद

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पीडीपी सूत्रों का कहना है कि महबूबा संसद की सदस्यता से इस्तीफ़ा देंगी. वो दक्षिण कश्मीर से सांसद हैं.

मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने दिसंबर में आयोजित अपने अंतिम संवाददाता सम्मेलन में इसके पर्याप्त संकेत दिए थे कि वो अपना उत्तरदायित्व अपनी बेटी को सौंपेंगे.

उन्होंने कहा था, ''वह सक्षम है. उसने पार्टी का निर्माण किया और वह लोगों से अच्छी तरह से जुड़ी हुई है. मुझे लगता है कि वह राज्य को चलाने के लिए पर्याप्त बुद्धिमान है.''

मुफ़्ती मोहम्मद सईद और ग़ुलशन आरा के दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग स्थित घर में महबूबा का जन्म 22 मई 1959 को हुआ था.

महबूबा ने कश्मीर विश्वविद्यालय से क़ानून की पढ़ाई की है. महबूबा के भाई तस्दुक मुफ़्ती हॉलीवुड के मशहूर सिनेमेटोग्राफ़र हैं और उनकी बहन रूबिया सईद पेशे से डॉक्टर हैं.

चुनाव प्रचार करतीं महबूबा मुफ़्ती.

मुफ़्ती मोहम्मद सईद 1989 में वीपी सिंह की जनमोर्चा सरकार में गृहमंत्री बने थे. इसके कुछ समय बाद ही जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट (जेकेएलएफ़) के चरमपंथियों ने रूबिया सईद को अगवा कर लिया था. रूबिया की रिहाई के बदले में सरकार ने जेल में बंद पांच विद्रोहियों को रिहा किया था.

महबूबा की शादी ज़ावेद इक़बाल शाह के साथ हुई थी. लेकिन बाद में तलाक हो गया. शाह अभी नेशनल कांफ़्रेंस के साथ हैं. दोनों की इल्तिज़ा और इरतिका नाम की दो बेटियां हैं, जो अमरीका में पढ़ती हैं.

महबूबा 1996 में उस समय चर्चा में आईं जब उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता. उन्होंने विधानसभा में फारूक अब्दुल्ला सरकार का जमकर विरोध किया.

मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने 1999 में पीडीपी का गठन किया और महबूबा पार्टी को ज़मीन स्तर तक ले गईं.

मुफ़्ती मोहम्मद सईद, प्रधानमंत्री नरेंद्र् मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के साथ महबूबा मुफ़्ती.

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साल 2002 के विधानसभा चुनाव में पीडीपी ने 16 सीटें जीतीं और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई. महबूबा ने 2004 का लोकसभा चुनाव जीता. लेकिन 2009 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. वो 2014 में फिर लोकसभा के लिए चुनी गईं.

पीडीपी की राजनीति में महबूबा को एक मज़बूत महिला माना जाता है. नई दिल्ली के सत्ता के गलियारों में उन्हें तगड़ा सौदेबाज़ माना जाता है.

दिल्ली के एक तबके को लगता है कि महबूबा के कश्मीर के हथियारबंद विद्रोहियों के साथ अच्छे संबंध हैं. भारतीय सेना के साथ संघर्ष में मारे गए चरपंथियों के परिवार को सांत्वना देते हुए भी वो नज़र आती हैं.

माना जा रहा था कि भाजपा में महबूबा को मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार करने को लेकर कुछ हिचक है. लेकिन दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने मुफ़्ती मोहम्मद सईद के उत्तराधिकारी के रूप में महबूबा की ताजपोशी की पीडीपी की इच्छा पर सहमति जता दी है.

महबूबा मुफ़्ती

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पीडीपी के एक मंत्री ने कहा, '' यहां गृहमंत्री के पद जो कि आमतौर पर मुख्यमंत्री के पास होता है, जैसे कुछ मुद्दे हैं. लेकिन मुझे उम्मीद है कि महबूबा के कार्यभार संभालते हीं चीजें ठीक हो जाएंगी.''

महबूबा ने मार्च 2008 में पाकिस्तान की यात्रा कर सबको चौंका दिया था. उस दौरान वो तत्कालीन पाकिस्तान राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी के साथ नज़र आई थीं.

महबूबा के साथ साझा प्रेस कांफ्रेंस में ज़रदारी ने कहा था, ''महबूबा मेरी बहन है. हम भारत के साथ विश्वास बहाली के उपायों में प्रगति चाहते हैं.''

पार्टी नेताओं के साथ महबूबा मुफ़्ती

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महबूबा को पार्टी के अंदर से ही चुनौती मिल सकती है. पार्टी के कुछ बड़े नेता मुफ़्ती मोहम्मद सईद के हिंदू राष्ट्रवादी भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने के फ़ैसले से ख़ुश नहीं थे.

पीडीपी समर्थक ज़ाहिद कहते हैं, ''अगर वो मज़बूती से पैर जमाना चाहती हैं तो उन्हें विरोध की आवाज़ उठाने वालों को पार्टी में वापस लाना होगा.''

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